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निहितार्थ

देर से आये, लेकिन क्या दुरुस्त भी आये मोदी ?

निहितार्थ: पैंतीस साल से अधिक की पत्रकारिता में मैंने क्राइम की रिपोर्टिंग (crime reporting) भी की है। उसी दौर का एक सच्चा किस्सा है।...

‘नो पाजिटिविटी फॉर हिंदूज’ वाला मामला !!!

निहितार्थ: क्या आप जानते हैं कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के प्रमुख डॉ. जेए जयालाल (Dr. JA Jayalal) को कोर्ट ने जमकर लताड़ा है?...

मानवता के जज्बे के खिलाफ हड़ताल

निहितार्थ: कोढ़ में खाज की बुराई मिलने का काम भी हो गया। राज्य के जूनियर डॉक्टर्स (junior doctors) कोरोना (Corona) के काल में हड़ताल...

बिल्ली के भाग्य से नहीं टूटेगा ये छींका

निहितार्थ: सुभीते के हिसाब से पानी के स्थानीय स्रोतों के अलग-अलग नाम लेकर एक मायनेखेज बात कही जाती है। वह यह कि अब तक...

हिम्मत है तो लिखिए- पीछे से खुलने वाला पायजामा

ये और इस जैसी कई बातें आसानी से गले नहीं उतरती हैं। खास तौर पर जो खाका पहनाकर उन्हें सामने लाया जाता है, वह...

शिवराज के संवेदनशील जज्बें को बाकी राजनीतिज्ञों की मान्यता है यह

एक बात बिना किसी संकोच के कही जा सकती है। वह यह कि सोचते सब हैं, लेकिन सोचकर उस पर अमल कर लेने में...

राजनीति के मसखरे राहुल और कमलनाथ

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से आप यूं भी किसी समझदारी की विशेष उम्मीद नहीं रख सकते हैं। किसी बहुत पढ़े-लिखे और प्रतिष्ठित परिवार (Distinguished...

पहले पूरी तरह उगने तो दीजिये इस सूरज को

ये निश्चित ही एक लंबी रात के ख़त्म होने का संकेत है। लेकिन इसे सुबह के आगमन की आशा से नहीं जोड़ा जा सकता...

क्या ये ‘दिमाग भटकाऊ’ अस्त्र है ?

एक सवाल सहज रूप से उठ रहा है। मध्यप्रदेश (Madhya pradesh) में अदालत और पुलिस नाम की संस्थाओं का कोई अस्तित्व बाकी नहीं बचा...

नाथ की नैतिकता की राजनीति का सड़कछाप संस्करण

भूल बड़ी पुरानी है। ऐसी भूल, जिस पर धूल डालने का शुभ मुहूर्त भी न जाने कब का गुजर चुका है। तो भूल मात्रा...

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