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क्या ये आपातकाल की वापसी है....

भोपाल मध्य से पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह पर पुलिस ने 23 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह उस आवाज को उठाने की सजा है, जिसे जनता की आवाज कहते हैं। वही स्वर, जिसकी दुहाई देते हुए राहुल गांधी आज कश्मीर का नजारा करने पहुंच गए थे, बावजूद इसके कि वहां के प्रशासन ने उन्हें आने की अनुमति नहीं दी। वहां पुलिस का लाठीचार्ज हुआ, जो कानून व्यवस्था बनाने का एक हिस्सा है। कानून व्यवस्था के लिए वो यहां भी हो सकता था अगर किसी अशांति की आशंका हो। लेकिन यह तो नहीं हुआ, पुलिस ने कहा कि उसका रोजाना का काम प्रभावित हुआ है और उससे उसे जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई वो सुरेन्द्रनाथ सिंह से करने का इरादा रखती है। यानि नागरिक प्रदर्शन को मध्यप्रदेश में भारी-भरकम अपराध की शक्ल दे दी गयी है। इस सजा का गुनाह रोचक है। दलील दी गयी कि सिंह द्वारा किये गये जन आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने पर यह राशि खर्च हुई है।   आगे पढ़ें

फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर) और भी

राज्य और भी

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मुख्यमंत्री कन्या विवाह व निकाह योगजना में शादी रचाने वाले जोड़ों को अब तक नहीं मिले 51 हजार

वित्तीय दिक्कतों से जूझ रही राज्य सरकार के पास अब मुख्यमंत्री कन्या विवाह व निकाह योजना में शादी रचाने वाले नए जोड़ों को देने के लिए भी पैसा नहीं है। हालत यह है कि एक अप्रैल से अब तक मुख्यमंत्री कन्या विवाह व निकाह योजना में 22 हजार 500 शादियां हो चुकी हैं, लेकिन किसी के भी खाते में 51 हजार रुपए नहीं पहुंचे, क्योंकि इस साल स्कीम में जितना भी पैसा था, वह 31 मार्च 2019 से पहले हुई 18 हजार शादियों पर खर्च कर दिया गया। इन हालातों के मद्देनजर सामाजिक न्याय विभाग ने वित्त विभाग से कहा है कि वह इमरजेंसी फंड से राशि जारी करे, ताकि कन्या के खाते में 51 हजार रुपए दिए जा सकें। विभाग ने आकस्मिक निधि से 100 करोड़ रुपए मांगे।   आगे पढ़ें

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डूब प्रभावितों ने मुआवजा पाने किया प्रदर्शन, गुजरात, मप्र व केंद्र सरकार को मृत मानकर 15 ने कराया मुंडन

भीलखेड़ा के कैलाश अवास्या की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी 2017 को डूब प्रभावितों को 60-60 लाख रुपए देने के आदेश प्रदेश सरकार को दिए थे लेकिन अभी तक अवास्या को 60 लाख रुपए और 5.80 लाख रुपए का लाभ मिलना बाकी है। विरोध प्रदर्शन के दौरान वे स्वयं शव की तरह लेट गए। इसके बाद डूब प्रभावितों ने उन्हें कफन स्वरूप सफेद चादर ओढ़ाई।   आगे पढ़ें

राजनीति और भी

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कश्मीर दौरे पर जा रहे राहुल समेत विपक्षी दलों के नेताओं को प्रशासन ने लौटाया दिल्ली, गांधी ने कहा- कश्मीर के हालात सामान्य नहीं

राहुल गांधी ने कहा, कुछ दिन पहले राज्यपाल ने मुझे जम्मू-कश्मीर आने का न्यौता दिया था। हम लोग यह महसूस करना चाहते थे कि वहां पर लोगों के साथ क्या हो रहा है। लेकिन हमें श्रीनगर एयरपोर्ट से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। हमारे साथ बदसलूकी हुई और मीडियाकर्मियों को पीटा गया। इससे साफ है कि जम्मू-कश्मीर के हालात सामान्य नहीं हैं। वहीं, गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर की स्थिति खौफनाक बनी हुई है। विमान में हमारे साथ मौजूद कश्मीर के कुछ यात्रियों ने अपना दुखड़ा सुनाया। स्थिति ऐसी है कि उसे सुनकर पत्थरों को भी रोना आ जाए।   आगे पढ़ें

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पिता की गिरफ्तारी पर कार्ति चिदंबरम ने कहा- अनुच्छेद 370 से ध्यान हटाने हुई कार्रवाई

कार्ति ने कहा, हमारे पिता को गिरफ्तार किया जाना टेलीविजन के रियलिटी शो की तरह है। इस तरह के नाटक का कोई कारण नहीं है। ईमानदारी से जांच नहीं की गई। जो अधिकारी जांच कर रहे हैं, वे स्पष्ट रूप से जानते हैं कि कोई मामला नहीं है। लेकिन किसी की हिम्मत नहीं है कि वह फाइल में लिख सके कि कोई मामला नहीं है। कुछ लोगों को खुश करने के लिए यह कार्रवाई की गई। दुर्भाग्वश भारत में किसी भी जांच के खत्म होने की कोई सीमा नहीं है। यहां हमेशा जारी रहती है। किसी को परेशान करने के लिए यह एक बेहतर हथियार है। मेरे पिता हर बार पूछताछ के लिए जांच एजेंसी के समक्ष पेश हुए हैं।   आगे पढ़ें

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नशा और नंगई के बीच नौनिहाल

कई बहुप्रतिष्ठित अखबारों पर यह आरोप लग चुका है कि वे यूजर्स, लाईक,हिट्स बढ़ाने के लिए पोर्न सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि यूजर्स की संख्या के आधार पर ही विग्यपन मिलते हैं। यानी कि वर्जनाओं को वैसे ही फूटने का मौका मिला जैसे कि बाढ़ में बाँध फूटते हैं। सारी नैतिकता इसके सैलाब में बह गई। कमाल की बात यह कि साँस्कृतिक झंडाबरदारी करने वाली सरकार ने इस पर दृढता नहीं दिखाई। इंदौर हाईकोर्ट के वकील कमलेश वासवानी की जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने 850 पोर्नसाईटस पर प्रतिबंध लगाने को कहा। सरकार ने दृढ़ता के साथ कार्रवाई शुरू तो की लेकिन जल्दी ही कदम पीछे खींच लिए।   आगे पढ़ें

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चाचा का खत, भतीजे के नाम

जो निराशावादी मान रहे थे सभरवाल कांड, देशव्यापी मॉब लिंचिंग महायज्ञ एवं गौसंरक्षण आतंकवाद महाअभियान की अलख इस राज्य में मंद पड़ने लगी हैं, उन्हें आज आप और आपके मित्र मंडल ने निराशा से पूरी तरह उबार लिया है।   आगे पढ़ें

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