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अब माफ भी करों शिवराज....

माननीय, हमने तो भोपाल के जम्बूरी मैदान पर वह दृश्य भी देखा है, जब आपने नरेन्द्र मोदी की तुलना में लालकृष्ण आडवाणी को अधिक तवज्जो दी थी। हाय! आंखें फूट जाएं , जो आज यह देखना पड़ रहा है कि इन्हीं मोदी ने आपको जम्बूरी मैदान वाले भोपाल से दूर करने का पूरा बंदोबस्त कर दिया है। ईमान से कहता हूं, ये सदस्यता-फदस्यता अभियान जैसे खालिस शाकाहारी काम आपको शोभा नहीं देते। न लच्छेदार बातें करने का मौका। न ही सरकारी खजाने का गला घोंटकर योजनाओं के जरिये वोट पकाने की जुगाड़। ले-देकर वही पार्टी की रीति-नीति वाली बातें। आप इस सबके लिए नहीं बने हैं। आग लगे ऐसे मतदाता को, जो आपको चार या छह सीट और देने की उदारता नहीं दिखा सका। ठठरी बंधे उस वोटर की भी, जिसने मोदी को स्पष्ट बहुमत देकर उन्हें आपकी दुर्गति करने के लिए एक बार फिर पूरी तरह सक्षम बना दिया। बताइये जरा, आप चीखते रहे माफ करो महाराज और एक ये मोदी हैं, बगैर चीखे कर दिया, माफ करो शिवराज।   आगे पढ़ें

फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर) और भी

राज्य और भी

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विरोध के बाद सामूहिक विवाह में वर-वधु के फेरे और मंत्रोच्चार नहीं कराएंगे सरकारी शिक्षक

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 17 जून को हायर सेकंडरी स्कूल नसरुल्लागंज में सामूहिक विवाह कार्यक्रम होना है। इस कार्यक्रम में पंडताई का काम सरकारी शिक्षकों को सौंपा गया था। अनुविभागीय अधिकारी ने 25 ब्राह्मण शिक्षकों को तैनात किया था। आदेश जारी होते ही शिक्षकों ने विरोध शुरू कर दिया। आखिर रविवार को अनुविभागीय अधिकारी ने दो दिन पुराना आदेश निरस्त कर दिया। उल्लेखनीय है कि दो साल पहले सिंगरौली के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी आरके दुबे ने शिक्षकों की सामूहिक विवाह कार्यक्रम में खाना परोसने से लेकर अन्य व्यवस्थागत काम करने की ड्यूटी लगाई थी।   आगे पढ़ें

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चुनाव में मिली पराजय के बाद बसपा ने शुरू की सर्जरी, रीवा और भोपाल जोन के प्रभारी को हटाया

पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि सभी आठों जोन की कमान सक्रिय सदस्यों को सौंपी गई है। भोपाल जोन में 27, इंदौर 28, उज्जैन 29 एवं बैतूल में 30 जून को बैठक बुलाई गई है। इन बैठकों में प्रदेश अध्यक्ष पिप्पल और प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम भी मौजूद रहेंगे। इनके अलावा जुलाई प्रथम सप्ताह में ग्वालियर, जबलपुर, सतना और छतरपुर जिले में पदाधिकारियों की बैठक में निचले स्तर तक के कार्यकतार्ओं को बुलाया है। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में बसपा का जनाधार तेजी से खिसक चुका है। पार्टी को अब राष्ट्रीय दल की मान्यता समाप्ति की चिंता सताने लगी है, इसलिए वह अब नए सिरे से जिला स्तर पर संगठन को सशक्त बनाने में जुटी है।   आगे पढ़ें

राजनीति और भी

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फारूक अब्दुल्ला की बात सुनने की बजाय कश्मीरी पंडितों ने लगाए मोदी-मादी के नारे, वीडियो वायरल

बताया जा रहा है कि मंदिर में एक धार्मिंक समागम के सिलसिले में देश-विदेश में रह रहे विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक वर्ग आया हुआ था। इससे एक दिन पहले सोमवार को मां क्षीर भवानी का मेला भी लगा था। डॉ. फारूक अब्दुल्ला जब ज्येष्ठा देवी मंदिर में पहुंचे तो वहां मौजूद कई कश्मीरी पंडितों ने उन्हें घेरते हुए मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए। डॉ. अब्दुल्ला के साथ मौजूद लोगों ने नारे लगा रही भीड़ को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन नारेबाजी नहीं रुकी।   आगे पढ़ें

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चुनाव हारने के बाद लालू की बेटी ने करोड़ों की परियोजना की मंजूरी ली वापस, विपक्ष ने कसा तंज

योजना विभाग के एक अधिकारी ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया कि अचानक लिए गए फैसले के कारण वह परेशानी में पड़ गए हैं। अधिकारी ने कहा, 'परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी। इसमें से लगभग 6 करोड़ रुपए उनके विभाग को स्वीकृत किए गए थे। अब मंजूरी वापस लिए जाने पर हमें बहुत सारी कागजी कार्रवाई पर समय और ऊर्जा खर्च करनी होगी।' आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं है इसलिए अभी वह इस मामले में कुछ नहीं कह सकते।   आगे पढ़ें

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सियासी तर्जुमा

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संसद में मोदी की सबसे बड़ी चुनौती- तलाक, तलाक, तलाक

तीन तलाक पर सरकार दो बार अध्यादेश लायी लेकिन इसे संसद से पारित कराने में असफल रही।   आगे पढ़ें

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राहुल का आफतकाल और बेचारे कांग्रेसी

स्पंदना ने ट्विटर अकाउंट को लेकर गरिमामय चुप्पी साध रखी है। लेकिन कुछ तो है। क्योंकि उन्होंने उन सीतारमण की प्रशंसा की, जिन्होंने हालिया संपन्न लोकसभा चुनाव में राफेल मुद्दे पर राहुल गांधी को फेल करने मेें महत्वपूर्ण भूमिका निबाही थी। कुट्टी द्वारा मोदी को गांधीवाद अपनाने की बधाई पर नाराजगी शायद इस बात की है कि कांग्रेस ने मोहनदास करमचंद गांधी पर अपना पेटेंट समझ लिया है। बेग का कसूर यह कि उन्होंने मंत्रिमंडल के गठन के समय छींकने या राष्ट्रपति भवन परिसर की ओर बढ़ते मोदी के रास्ते में काली बिल्ली छोड़ने जैसा काम नहीं किया। read more   आगे पढ़ें

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