राज्य और भी

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इंदौर में आम जनता को कोरोना वायरस से बचाने में लगे सभी व्यक्तियों को सीएम शिवराज ने दिया साधुवाद

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज इंदौर में आम जनता को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए दी जारी रही सेवाओं के लिए वहां कार्यरत चिकित्सकों, समाजसेवियों, राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को साधुवाद दिया। उन्होंने इस बड़ी विपदा के समय सेवा कर रहे लोगों की सराहना भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप निरंतर पीड़ित मानवता की सेवा कर रहे हैं। आपके इस जज्बे को मैं प्रणाम करता हूँ। इस महामारी से निपटने में आप जुटे रहें, मैं भी आपके साथ हूँ। आप लोगों से इंदौर आने पर मिलूंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब मिलकर कोरोना को पराजित कर देंगे। मानवता के विरूद्ध कोरोना द्वारा छेड़े गए युद्ध में हमारी विजय होगी। चौहान आज मंत्रालय से इंदौर में कोरोना की स्थिति के बारे में विभिन्न वर्गों से टेलीफोन पर बात कर रहे थे।   आगे पढ़ें

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कोरोना संक्रमण: गौ शाला में गायों की सेवा कर रहे नरोत्तम मिश्रा, खाना बनाने में व्यस्त कैलाश विजयवर्गीय

पोता-पोती के साथ खेलने का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा के वरिष्ठ विधायक नरोत्तम मिश्रा का एक और वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में नरोत्तम मिश्रा भोपाल में अपने घर के पीछे बनी गौ शाला में गायों की सेवा करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनकी गौ सेवा दैनिक दिनचर्या में शामिल है। उधर, इंदौर में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने खाली समय में सालों बाद घर की जिम्मेदारी संभाल ली है। कैलाश का भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें वे शिमला मिर्च की सब्जी बनाते नजर आ रहे हैं।   आगे पढ़ें

राजनीति और भी

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पश्चिम बंगाल में गृहमंत्री ने ममता पर बोला हमला, कहा- सीएए के खिलाफ अल्पसंख्यकों को भड़काया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी पर अयोध्या में राम मंदिर का विरोध करने का आरोप लगाया। कोलकाता में 'हम अन्याय नहीं सहेंगे' अभियान की शुरूआत करते हुए रविवार को उन्होंने कहा- ममता दीदी ने कांग्रेस, सपा, बसपा, वामपंथियों के साथ मिलकर राम मंदिर का विरोध किया। ममता ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ अल्पसंख्यकों को भड़काया। इस बीच, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि दिल्ली कुछ दिनों से जल रही है। उन्होंने कहा- केंद्र की सत्ताधारी पार्टी दिल्ली चुनाव नहीं जीत सकी इसलिए उसने सांप्रदायिकता फैलाकर समाज को बांटने की कोशिश की।   आगे पढ़ें

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केन्द्रीय मंत्री ने फिर दिया बयान, कहा- पूर्वजों से गलती हो गई। मुसलमान भाइयों को 1947 में ही पाकिस्तान भेज दिया जाना चाहिए था

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया। बुधवार को बिहार के पूर्णिया में मीडिया से बातचीत के दौरान सिंह ने कहा- हमारे पूर्वजों से गलती हो गई। मुसलमान भाइयों को 1947 में ही वहां (पाकिस्तान) भेज दिया जाना चाहिए था। सिंह के मुताबिक, 1947 के पहले हमारे पूर्वज आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे, उसी वक्त मोहम्मद अली जिन्ना इस्लामिक स्टेट की योजना बना रहे थे। गिरिराज के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सिंह ने ये भी कहा कि पूर्वजों की गलती का खामियाजा हमें आज उठाना पड़ रहा है।   आगे पढ़ें

मालवा और भी

मध्यभारत और भी

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विंध्य और भी

सियासी तर्जुमा

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मध्यप्रदेश में कोरोना पर्यटन क्यों नहीं...?

शिवराज की हिमायत नहीं। मुख्यमंत्री खुद न जा पा रहे हों तो मंत्री और आला अफसरों को मजदूरों के सेवा कार्य की निगरानी के लिए भेजना चाहिए। इसके बावजूद शिवराज और उनकी टीम का इस संकटकाल में मौके पर न जाना फिर भी समझ आता है कि वे मंत्रालय से भी निर्देश, आदेश और मॉनिटरिंग कर रहे होंगे। आखिर 8 करोड़ जनता की सेवा की जिम्मेदारी उनके कांधों पर है। इसलिए तमाम सुरक्षा प्रबंधों के बावजूद कोरोना संक्रमण का खतरा उठाना उनके लिए संभव न होगा। लेकिन कमलनाथ और उनकी कांग्रेस की क्या मजबूरी है? विपक्षी दल के नेता और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते वे जा सकते हैं। read more   आगे पढ़ें

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उपचुनाव से पहले भाजपा में चुनौती का दीपक

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत के इस ऐलान के साथ कि सिंधिया खेमे के सभी पूर्व विधायक पार्टी प्रत्याशी होंगे और उन्हें जिताने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के हारे हुए प्रत्याशियों को मेहनत करनी है, असंतोष खदबदाने लगा है। मंत्री और विधायक पद बलिदान कर भाजपा को सत्ता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले इन पूर्व विधायकों के इस त्याग का मोल चुकाना भाजपा की मजबूरी है। पार्टी कार्यकर्ता भी इसे महसूस करते हैं। सभी जानते हैं कि इन बलिदानियों को कमल निशान के साथ चुनाव में उतारना पार्टी के लिए अहसान उतारने जैसा पावन कार्य है। इस सबके बावजूद जिस तरह से कोरोना काल में भाजपा की मान्य परंपरा को दरकिनार कर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए उनकी उम्मीदवारी का ऐलान किया गया उसे लेकर नाराजगी है।   आगे पढ़ें

नज़रिया और भी

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ब्यूरोक्रेसी में कमलनाथ टॉनिक: शिवराज का दृष्टि दोष या नेत्र ज्योति प्रक्षालन!

होता यह है कि सरकार बदलने के साथ लूप लाइन में रखे हुए कोई सीनियर ब्यूरोक्रेट नई सत्ता के संजय बन जाते हैं। उन्हीं की आंखों से सिंहासन पर आरुढ़ व्यक्ति अपनी प्रशासनिक व्यवस्था रचता है। पिछली सरकार के करीबी अफसर प्रमुख पदों अपदस्थ किए जाते हैं और नए बैठाए जाते हैं। दिसंबर 2018 में सत्तासीन होते ही कमलनाथ ने भी यही किया था। उनके संजय बने थे सुधि रंजन मोहंती, जो 15 साल की बीजेपी सरकार में निर्वासन जैसी स्थिति से कई बार दो-चार हुए थे। कमलनाथ ने मोहंती को अपना मुख्य सचिव बनाया और मंत्रालय से लेकर जिलों तक अफसरों का रंग देख कर उनकी पदस्थापना होने लगी।   आगे पढ़ें

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शराब ठेकेदारों का कोरोना रूदन और सामाजिक सरोकार के नाटक.......

मध्यप्रदेश में शराब की दुकानों को खोलने के लिए सरकार ने मंगलवार से परमिशन दे दी है। लेकिन शराब के कुछ ठेकदारों ने एक नया राग अलापा, अपने सामाजिक सरोकारों का। वे अपने सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए शराब की दुकानों को खोलना नहीं चाहते हैं। लेकिन क्या वाकई हकीकत ऐसी है? या फिर शराब ठेकेदार सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं? सरकार को जो घाटा होना हो, हो लेकिन शराब ठेकेदारों के फायदे में कोई कमी नहीं आना चाहिए। आबकारी विभाग के सहायक आबकारी आयुक्त का इस पर क्या नजरिया है, जानें। read more   आगे पढ़ें

विश्लेषण और भी

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महाराज-शिवराज गठबंधन की अग्निपरीक्षा का सवाल स्क्रीन पर

कांग्रेस के कुछ मतदाता भी सिंधिया के प्रभाव क्षेत्र वाली सीट पर उनके इस कदम का साथ देंगे। तो कुछ उनके विरोध में खड़े दिखाई देंगे। साथ ही भाजपा के कार्यकर्ता भी समर्थन-विरोध के खेमे में बंट जाएंगे और इन 22 सीटों पर परिणाम मिश्रित दिखाई देगा। ऐसे में निर्दलीय विधायकों को साथ मिलाकर और उपचुनाव में विजयी सीटें विजय तिलक लगाकर आधे मन से शिवराज-महाराज गठबंधन पर मुहर लगा देंगे।   आगे पढ़ें

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लाट साहब!! गुस्सा जायज पर आप भी डकैतों का साथ देने वालों का सजदा छोड़ें

बढ़िया है बाबू जी! बाबू शब्द ब्यूरोक्रेसी के लिए दशकों से इस्तेमाल हो रहा है। सम्भवतः अंग्रेजों के समय से जब लगान इत्यादि राजस्व संग्रहण के लिए इस सर्विस का गठन हुआ था। गुस्सा आना भी चाहिए, लेकिन सिर्फ एक पक्ष पर? घटिया मानसिकता वाले बयान पर नाराजगी जायज है, लेकिन क्या मध्यप्रदेश में कोई ऐसा अफसर भी है, जिसने राज्य मंत्री पद पर रहते समय सामने पड़ने पर बद्रीलाल यादव को सलाम न ठोका हो? यदि है तो गुस्सा जायज है। साल भर पहले तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान या मंत्री रहे उनकी पार्टी नेताओं की जी हजूरी न की हो? आपने अपनी डिग्निटी के लिए तमाम सियासी बिरादरी को डकैत और घपलेबाज का तमगा देकर उनकी डिग्निटी को चुनौती दी है। अब आप कैसे वर्तमान सत्ताधारी नेताओं के सम्मान में मुश्कें कस कर सजदा करेंगे?read more   आगे पढ़ें

शख्सियत और भी

मंदसौर खबर और भी

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हम भ्रष्टन के, भ्रष्ट हमारे

देश का सबसे बड़ा (प्रसार संख्या के हिसाब से, विश्वसनीयता के लिहाज से कतई नहीं) अखबार भी नब्बे के दशक की महाभ्रष्ट पत्रकारिता एवं ऊपर सुनाये गए चुटकुले की तरह ही व्यवहार कर गया है। उसने अपने पहले पेज पर छापे संपादकीय में उन भ्रष्टाचारियों के लिए चेतावनी जारी की है, जो वह भ्रष्टाचार करने जा रहे हैं, जिसके घटित होने से पहले ही इस अखबार को उसकी भनक लग गयी है। समाचार पत्र ने चेतावनी दी है कि कोरोना के उपचार से जुड़ी सामग्री की मांग एवं आपूर्ति में गड़बड़ी करने वालों पर उसकी टीम नजर रखेगी। उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। पत्र ने इस धमकी को पुरस्कार बनाने के लिए मैं अपनी पे आ गया तो फिर.... ली शैली भी अपनाई है। इसके लिए संपादकीय में भ्रष्टाचार की कुछ आहटों की वजह से पहले ही टिप्पणी कर रहा है का इस्तेमाल किया गया है।   आगे पढ़ें

निहितार्थ (प्रकाश भटनागर) और भी

फोटो गैलरी और भी