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नाथ की अंगुली और अनाथ सरकारी अस्पताल

यकायक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर अंगुली की खराबी का यह दुर्योग कैसे और क्यों बना, यह अलग से शोध का विषय हो सकता है। आज तो उस सुखद संयोग की बात ही की जाए, जिसने राज्य की जनता का सरकारी स्वास्थ्य सेवा के लिए यकीन मजबूत करने की पहल की है। फिर भी अव्यवस्था-दर-अव्यवस्था के आदी हो चुके हम केवल इतना होने से भला कैसे संतुष्ट हो जाएं। पं. इलाचंद्र जोशी की अद्भुत कृति संन्यासी सहसा याद हो आयी। इस उपन्यास का एक किरदार मोहनदास करमचंद गांधी की सादगी के लिए उनकी तारीफ करता है। तब दूसरा किरदार कहता है कि गांधी जिस तीसरे दर्जे के डिब्बे में यात्रा करते थे, उसे उनका नाम सुनते ही भीड़ से खाली कर दिया जाता था। यानी यात्रा तो थर्ड क्लास की, किंतु इस दर्जे के अन्य यात्रियों को होने वाली कोई भी परेशानी नहीं। यकीनन मुख्यमंत्री का मामला भी ऐसा ही रहा। उन्हें भीड़ से भरे ओपीडी काउंटर पर जाकर पर्ची कटवाना नहीं पड़ी। डॉक्टर के कक्ष के बाहर लाइन में लगना नहीं पड़ा। डॉक्टर भी उनसे यह हिम्मत नहीं कर सकता था कि अस्पताल की बजाय उन्हें किसी प्राइवेट जगह से जाकर जांच कराने को कहता। सब उस खालिस आदर्श व्यवस्था के तहत हुआ, जो हमीदिया सहित प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में किसी सामान्य मरीज के लिए न कभी पहले लागू हुई और न ही भविष्य में उसके लागू होने के कोई आसार हैं।   आगे पढ़ें

फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर) और भी

राज्य और भी

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कमलनाथ सरकार सरकारी स्कूली बच्चों को यूनिफार्म की बजाए देगी 600 रुपए

मंत्री ने यह निर्णय पिछले वर्ष यूनिफार्म वितरण में हुई देरी और अनियमितताओं को देखते हुए लिया है। दरअसल पिछले दस वर्षों से विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए चेक ही वितरित किए जाते थे, लेकिन पिछली सरकार ने विद्यार्थियों को चेक की जगह यूनिफॉर्म देने का निर्णय लिया था। यूनिफॉर्म सिलाई का काम स्वयंसेवी संस्थाओं को दिया गया था। इसके कारण स्थिति यह रही कि छह माह तो स्वयंसेवी संस्थाओं के चयन में निकल गए। स्वयंसेवी संस्थाओं ने जनवरी-फरवरी में बच्चों को यूनिफॉर्म दिए, जो बच्चों के हिसाब से सही साइज का नहीं रहा।   आगे पढ़ें

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प्रदेश सरकार बजट में युवाओं को रोजगार देने कर सकती है नई योजना की घोषणा

बजट में ऐसा कोई कर नहीं लगाया जाएगा, जिसका प्रभाव सीधे आम आदमी पर पड़े। विभिन्न् विभागों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद उनकी बजट संबंधी मांगों पर विस्तृत चर्चा कर ली गई है। ऐसी योजनाएं, जो किन्हीं दूसरे विभागों में भी चल रही हैं, उन्हें एक साथ करने के साथ ही ऐसी योजनाएं जो अपना उद्देश्य पूरा कर चुकी हैं उन्हें बंद करने पर भी सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। ऐसे कार्यक्रम बनाया जाएं, जिससे युवाओं को रोजगार के ज्यादा से ज्यादा मौके मिल सकें। औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने के लिए उद्योगों को वास्तविक रियायत दी जाएं लेकिन यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वे उद्योग स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार भी मुहैया कराएं।   आगे पढ़ें

राजनीति और भी

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चुनाव मिली हार के बाद छलका मायावती का दर्द, कहा- गठबंधन कराना रही सबसे बड़ी भूल

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बसपा-सपा गठबंधन को मिली हार के बाद से ही दोनों दलों के बीच खींचतान नजर आने लगी थी। बड़ी हार के बाद दोनों ही पार्टियों ने विधानसभा उपचुनाव अलग लड़ने की घोषणा तक कर दी थी। अब एक बार फिर बसपा सुप्रीमों मायावती का दर्द गठबंधन को लेकर सामने आया है। मायवती ने रविवार को बसपा विधायकों, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक ली थी। इस बैठक में उन्होंने समाजवादी गठबंधन को लेकर लंबी चर्चा की और उसे लोकसभा चुनाव में मिली हार की वजह बताया।   आगे पढ़ें

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तेजस्वी की गैर मौजूदगी में तेज प्रताप ने संभाला मोर्चा, चमकी बुखार पर नीतीश सरकार पर बोला हमला

लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप ने पिछले दिनों ट्वीट करके भी नीतीश सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा, 'सुशासन बाबू, माना कि ये 5-10 वर्ष के मासूम बच्चे किसी दल के वोटर नहीं हैं लेकिन क्या इन सैकड़ों मासूमों की जान आपके सुशासन की जिम्मेदारी नहीं हैं नीतीश बाबू हम राजनीति बाद में कर लेंगे, अभी इन मासूमों की जिंदगी ज्यादा जरूरी है। कुछ भी कीजिए, इन बच्चों को बचा लीजिए...।' बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में अक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार की वजह से अब तक सैकड़ों बच्चों की मौत हो गई है। प्रदेश की सियासत में सत्ता और विपक्ष के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच राज्य की सबसे प्रमुख विपक्षी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव आम लोगों के बीच से गायब हैं।   आगे पढ़ें

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सियासी तर्जुमा

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अब जिद छोड़ों भी वैराग्यानंद जी महाराज...

वैसे वैराग्यानंद की जल समाधि अब जन आंदोलन का विषय है। कारण भी है, लोग फोन पर वैराग्यानंद को परेशान कर रहे हैं। किसी को रालेगांव सिद्धी जाकर अन्ना हजारे साहब से मिलना चाहिए। बुजुर्गवार को बताना चाहिए कि लोकपाल-वोकपाल बहुत हो गया। अब तो समाधि आंदोलन समय की पुकार बन चुका है। जो इसे लेना चाह रहे हैं, उनके लिए इसकी अनुमति का बिल पारित कराया जाए और जो जिंदा दफनाने के लायक होने के बाद भी समाज में पद तथा प्रतिष्ठा से नवाजे जा रहे हैं, उन्हें जबरिया समाधि देने संबंधी बिल को भी मंजूरी दी जाए। अपने भारत कुमार..नहीं-नहीं, मनोज कुमार की आखिरी सुपर हिट फिल्म क्रांति में गुलाम भारत के लिए कहा गया था, इस पर जो आंख उठायेगा, जिंदा दफनाया जाएगा। आजाद भारत के सच्चे शुभचिंतकों के भीतर भी उस क्रांति का ज्वार उमड़ रहा है, जो इस-इस पर जो आंख उठाएगा, जिंदा दफनाया जाएगा वाला इंकलाबी गीत गाने को बेताब हैं। इस-इस का मतलब, देश की एक-एक बच्ची, एक-एक ईमानदार नागरिक, एक-एक सच्चा राष्ट्रभक्त, एक-एक मेहनतकश मजदूर और ममता बनर्जी के राज्य का एक-एक सरकारी डॉक्टर, है। इस फेहरिस्त में और भी कई इस-इस शामिल हैं, किंतु सभी का वर्णन करने में बहुत समय लगेगा। सो सुधी पाठक अपने हिसाब से आगे तय कर लें, किसे और जोड़ना है।   आगे पढ़ें

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संसद में मोदी की सबसे बड़ी चुनौती- तलाक, तलाक, तलाक

तीन तलाक पर सरकार दो बार अध्यादेश लायी लेकिन इसे संसद से पारित कराने में असफल रही।   आगे पढ़ें

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