राज्य और भी

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कंटेनमेंट जोन की गाइडलाइन में बदलाव करेगी सरकार, संक्रमित मरीज मिलने के बाद अब तीन घरों का होगा कंटेनमेंट एरिया; पांच दिन में फ्री होगा क्षेत्र

राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण वाले की इलाकों को कंटेनमेंट एरिया घोषित करने के लिए तय की गई गाइडलाइन में बदलाव करने का फैसला किया है। अब कंटेनमेंट एरिया नए सिरे से परिभाषित होगा। इसके अंतर्गत जिस घर में कोरोना पॉजिटिव केस मिलेगा, उस घर के एक घर दाएं और एक घर बाएं वाले मकान को मिलाकर कुल 3 घरों को ही कंटेनमेंट क्षेत्र घोषित किया जाएगा।   आगे पढ़ें

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मुख्यमंत्री ने लगातार दूसरे दिन राहुल पर साधा निशाना, बोले-जो देश की सेनाओं का मनोबल गिराए उसके लिए घटिया शब्द भी छोटा है

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर लगातार दूसरे दिन निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सेना के हौसले पर सवाल उठाने वाले राहुल गांधी जैसे लोग घटिया स्तर की राजनीति कर रहे हैं। घटिया शब्द भी इनके लिए छोटा है। मुख्यमंत्री ने ये बात बुधवार सुबह भाजपा कार्यालय में मीडिया से चर्चा करते हुए कही।   आगे पढ़ें

राजनीति और भी

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पश्चिम बंगाल में गृहमंत्री ने ममता पर बोला हमला, कहा- सीएए के खिलाफ अल्पसंख्यकों को भड़काया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी पर अयोध्या में राम मंदिर का विरोध करने का आरोप लगाया। कोलकाता में 'हम अन्याय नहीं सहेंगे' अभियान की शुरूआत करते हुए रविवार को उन्होंने कहा- ममता दीदी ने कांग्रेस, सपा, बसपा, वामपंथियों के साथ मिलकर राम मंदिर का विरोध किया। ममता ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ अल्पसंख्यकों को भड़काया। इस बीच, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि दिल्ली कुछ दिनों से जल रही है। उन्होंने कहा- केंद्र की सत्ताधारी पार्टी दिल्ली चुनाव नहीं जीत सकी इसलिए उसने सांप्रदायिकता फैलाकर समाज को बांटने की कोशिश की।   आगे पढ़ें

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केन्द्रीय मंत्री ने फिर दिया बयान, कहा- पूर्वजों से गलती हो गई। मुसलमान भाइयों को 1947 में ही पाकिस्तान भेज दिया जाना चाहिए था

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया। बुधवार को बिहार के पूर्णिया में मीडिया से बातचीत के दौरान सिंह ने कहा- हमारे पूर्वजों से गलती हो गई। मुसलमान भाइयों को 1947 में ही वहां (पाकिस्तान) भेज दिया जाना चाहिए था। सिंह के मुताबिक, 1947 के पहले हमारे पूर्वज आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे, उसी वक्त मोहम्मद अली जिन्ना इस्लामिक स्टेट की योजना बना रहे थे। गिरिराज के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सिंह ने ये भी कहा कि पूर्वजों की गलती का खामियाजा हमें आज उठाना पड़ रहा है।   आगे पढ़ें

मालवा और भी

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सियासी तर्जुमा

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कराह रहा इंसान, कोरोना, शराब और पेट्रोल-डीज़ल से परेशान

सरकार को इसी बीच आर्थिक बदहाली को टालने के लिए शराब की दुकानें खोलने का फ़ैसला भी लेना पड़ा है।यह फ़ैसला भारी मन से लिया गया या ख़ुशी ख़ुशी, यह तो सरकार ही बता सकती है। हालाँकि सरकार यह बात साफ़ कर चुकी है कि राजस्व का एक बहुत बड़ा स्रोत आबकारी है जिस पर विकास की रीढ़ टिकी हुई है। शराबी भी सरकार के फ़ैसले से ख़ुश हैं और तंगहाली में भी सुबह से शाम तक शराब की दुकान खुली होने तक सरकार के फ़ैसले को अपना पूरा-पूरा खुले दिल और खुले मन से समर्थन दे रहे हैं। देशी शराब की दुकान के सामने लगी बड़ी बड़ी लाइनों में ग़रीब और निम्न वर्ग का वह तबका शामिल है जो जन्म से लेकर मौत के कफन तक सरकार की उदारता का क़ायल है।   आगे पढ़ें

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एक्सप्रेस पर सवार उपचुनावों की सियासत, चंबल फतह करने गडकरी फार्मूला पर कांग्रेस का पलटवार

मध्यप्रदेश में वर्चुअल रैली में गडकरी जब चंबल एक्सप्रेस वे का गीत गुनगुना रहे थे, तब प्रदेश के भाजपा नेता-कार्यकर्ता की आंखों में चंबल-ग्वालियर क्षेत्र की वह 16 विधानसभा सीटें एक-एक कर आगे बढ़ रही होंगी जिन पर उपचुनाव होना है। भिंड, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना सभी जिलों में चंबल एक्सप्रेस वे की गूंज सुनाई देगी। यही 16 विधानसभा सीटों की बढ़त किसी भी पार्टी को बाकी खेल में निर्णायक दौर में पहुंचा देगी। जिस तरह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जो कथित आडियो वायरल हो रहा है और उसमें सुनाई दे रहा है कि मुख्यमंत्री बने रहने के लिए जीतना जरूरी है।   आगे पढ़ें

नज़रिया और भी

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मनरेगा से मिलता रहेगा गरीबों के हाथों को काम

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि वर्तमान कोविड समस्या के चलते काफी प्रवासी मजदूर वापस अपने गांव लौटे हैं। तात्कालिक व्ययवस्था हेतु रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत उन्हें रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है। जिनके पास कोई जॉब कार्ड नहीं है, उन्हें जॉब कार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश राज्यों को दिए गए हैं। प्रधानमंत्री जी के द्वारा मनरेगा बजट में 40 हजार करोड़ रुपए की राशि अतिरिक्त दी गई है, ताकि मजदूरों को ज्यादा रोजगार मिल सके। कुल बजट अब बढक़र एक लाख एक हजाऱ पांच सौ करोड़ रुपया हो गया है।   आगे पढ़ें

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ब्यूरोक्रेसी में कमलनाथ टॉनिक: शिवराज का दृष्टि दोष या नेत्र ज्योति प्रक्षालन!

होता यह है कि सरकार बदलने के साथ लूप लाइन में रखे हुए कोई सीनियर ब्यूरोक्रेट नई सत्ता के संजय बन जाते हैं। उन्हीं की आंखों से सिंहासन पर आरुढ़ व्यक्ति अपनी प्रशासनिक व्यवस्था रचता है। पिछली सरकार के करीबी अफसर प्रमुख पदों अपदस्थ किए जाते हैं और नए बैठाए जाते हैं। दिसंबर 2018 में सत्तासीन होते ही कमलनाथ ने भी यही किया था। उनके संजय बने थे सुधि रंजन मोहंती, जो 15 साल की बीजेपी सरकार में निर्वासन जैसी स्थिति से कई बार दो-चार हुए थे। कमलनाथ ने मोहंती को अपना मुख्य सचिव बनाया और मंत्रालय से लेकर जिलों तक अफसरों का रंग देख कर उनकी पदस्थापना होने लगी।   आगे पढ़ें

विश्लेषण और भी

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म से मोदी,म से मामा,म से महाराज,म से मध्यप्रदेश...बाक़ी मौन रहें, मस्त रहें और मंथन करते रहें

मध्य प्रदेश की राजनीति में अगर किसी के इशारे पर एक सरकार गिराकर दूसरी सरकार बनी तो वह देश के मुखिया मोदी के इशारे पर।यह बात खुले तौर पर मंच से स्वीकार की है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने। प्रधानमंत्री का नाम भले ही न से शुरू होता हो लेकिन उनकी लोकप्रियता ‘म’ अक्षर से शुरू होने वाले उनके सरनेम मोदी से ही है। नारे भी लगते हैं तो मोदी-मोदी के ही।   आगे पढ़ें

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महाराज बन गए टाइगर...शिवराज को सता रहा पंचक का डर

कांग्रेस सरकार गिराकर भाजपा को सिर आँखों पर बिठाकर महाराज ने नई पार्टी के साथ अपनी पसंद-नापसंद में भी आमूलचूल बदलाव कर लिया है। मार्च में भाजपा का दामन थामने के बाद लगातार मध्यप्रदेश से दूरी बनाते हुए महाराज ने राज्यसभा सांसद बनने के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार के दिन क़रीब साढ़े तीन महीने बाद प्रदेश की जनता को अपना दीदार होने दिया।जहाँ मंत्रिमंडल का गठन न होने पर बार-बार महाराज की नाराज़गी के क़यास लगाए गए तो सौ दिन बाद हुए मंत्रिमंडल विस्तार में अपने समर्थकों के हक को लेकर उन्होंने तनिक भी समझौता नहीं किया यह भी सूची ज़ाहिर कर रही है।   आगे पढ़ें

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