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मध्यप्रदेश या मद्यप्रदेश...!

शिवराज सिंह चौहान सरकार ने भी शराब की दुकानों को कम करने की दिशा में कदम उठाए थे, लेकिन अब मामला उलटा हो गया है। इतना उलटा कि इसकी नींव में कुछ गलत इरादे और भविष्य की भयावह आशंकाएं भी साफ दिख रही हैं। मसलन, झाबुआ में देशी शराब का वेयर हाउस पहले से ही है, अब विदेशी शराब के वहां संग्रहण का इंतजाम कर दिया गया है। इंदौर प्रदेश का इकलौता ऐसा संभाग होगा जहां विदेशी मदिरा के तीन सरकारी गोदाम हो जाएंगे। जाहिर है कि यह प्रयास मालवा से गुजरात तक के बीच शराब तस्करों के लिए गोल्डन गेट बनाने में सफल हो सकता है। सरकार क्लस्टर बनाकर शराब के कारोबार में जो प्रयोग कर रही है, उससे यही होगा कि आने वाले समय में दारू लॉबी शासन व्यवस्था पर हावी हो जाएगी।   आगे पढ़ें

फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर) और भी

राज्य और भी

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स्वरूपानंद सरस्वती ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा- राम मंदिर की लड़ाई लड़ने वालों की अनदेखी की गई

स्वामी स्वरूपानंद ने नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर स्थित मणिदीप आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जो 500 वर्षो से राम मंदिर के लिए लडाई लड़ रहे थे, जो कानूनी पक्ष एवं समाज के प्रतिनिधि हैं। ऐसे हिन्दू समाज की अनदेखी करके इस ट्रस्ट का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट में देश के शंकराचार्यो एवं धमार्चायों को दूर कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।   आगे पढ़ें

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सीएम के बयान पर किया पलटवार, कहा- सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने वाले पहले जनता के सवालों का जवाब दें

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने से पहले जनता के सवालों के जवाब दें। शर्मा ने कहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक के असर और परिणाम के बारे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान काफी कुछ बता चुके हैं। देश की जनता भी सर्जिकल स्ट्राइक को साफतौर पर जानती है, लेकिन जवानों के शौर्य और पराक्रम से लिखी गई सच्चाई को कुछ लोग और उनकी पार्टी के नेता पचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कमलनाथ उन सवालों का जवाब दे, जो प्रदेश की दुर्दशा को लेकर जनता उनसे पूछ रही है।   आगे पढ़ें

राजनीति और भी

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केन्द्रीय मंत्री ने फिर दिया बयान, कहा- पूर्वजों से गलती हो गई। मुसलमान भाइयों को 1947 में ही पाकिस्तान भेज दिया जाना चाहिए था

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया। बुधवार को बिहार के पूर्णिया में मीडिया से बातचीत के दौरान सिंह ने कहा- हमारे पूर्वजों से गलती हो गई। मुसलमान भाइयों को 1947 में ही वहां (पाकिस्तान) भेज दिया जाना चाहिए था। सिंह के मुताबिक, 1947 के पहले हमारे पूर्वज आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे, उसी वक्त मोहम्मद अली जिन्ना इस्लामिक स्टेट की योजना बना रहे थे। गिरिराज के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सिंह ने ये भी कहा कि पूर्वजों की गलती का खामियाजा हमें आज उठाना पड़ रहा है।   आगे पढ़ें

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राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए पीएम ने राहुल की तुलना की ट्यूब लाइट से, राहुल ने भी किया पलटवार

संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राहुल गांधी और कांग्रेस पर कई तंज कसे। भाषण के बीच जब राहुल खड़े होकर कुछ बोलने लगे तो मोदी ने उनकी तुलना 'ट्यूब लाइट' से की। प्रधानमंत्री ने कहा- मैं पिछले 30-40 मिनट से बोल रहा हूं। इन तक (राहुल) करंट पहुंचने में इतना वक्त लग गया। बहुत सी ट्यूब लाइट ऐसी ही होती हैं। इस पर राहुल ने कहा कि मोदी लोगों को असली मुद्दों से भटकाते हैं। वे कांग्रेस और पाकिस्तान की बात करते हैं, लेकिन बेरोजगारी पर एक शब्द नहीं बोलते।   आगे पढ़ें

सियासी तर्जुमा

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भाजपा की ऊहापोह....

शिवराज सिंह चौहान की अतिसक्रियता मुझे भ्रम में डालती है। भ्रम यह है कि क्या वाकई भाजपा ने तय कर लिया है कि अगले पांच साल उसे किस भूमिका में रहना है? अगर उसे विपक्ष की भूमिका निभानी है तो विपक्ष के तेवर और धार तो ट्विटर छोड़ कर सड़क पर संघर्ष से ही सामने आएंगे। और अगर भाजपा नेताओं के जेहन में है कि कमलनाथ सरकार को कभी भी चलता करना है तो फिर उसे तय करना होगा कि उसका अगला नेतृत्व क्या होगा? क्या शिवराज सिंह चौहान वाकई कमलनाथ सरकार के खिलाफ हैं? या फिर तब तक उनकी रस्मी खिलाफत ऐसी ही चलती रहेगी, जब तक यह तय नहीं हो जाता कि इस बार भी मौका उनके ही हाथ आएगा। कांग्रेस या भाजपा के एक-दो विधायक कम-ज्यादा हो जाने से सरकार की स्थिरता और अस्थिरता को लेकर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। फर्क अगर पड़ेगा तो इससे कि भाजपा के नेता और खासकर शिवराज अपने लिए कौन सी भूमिका तय करने के इच्छुक हैं? read more   आगे पढ़ें

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जेएनयू के आंदोलन की यह टाइमिंग

जेएनयू प्रबंधन ने होस्टल तथा मैस के चार्ज में वृद्धि की। छात्र-छात्राएं इसके खिलाफ सड़क पर आ गये। वृद्धि का कुछ हिस्सा वापस लिया गया। लेकिन आंदोलन जारी रहा। कई अचानक इसका स्वरूप और उग्र करने की कोशिश की गयी। उस समय, जबकि संसद का शीतकालीन सत्र आरम्भ हो रहा था। क्या यह किसी खास टाइमिंग के हिसाब से किया गया? क्यों ऐसा हुआ कि संसद के नजदीक आते सत्र के पहले ही जेएनयू परिसर में लगी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के आसपास आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लिखे गये? क्या यह किसी खास षड़यंत्र का हिस्सा नहीं है कि इसी संस्थान से संबद्ध एक महिला कुछ दिन पहले योग से सैक्स बेहतर है वाले वाक्य की टी-शर्ट पहनकर अपना फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करती है। ध्यान रखिए कि जेएनयू में प्रभावी असर रखने वाली मानसिकता ही वह है, जो योग जैसे विज्ञान को भी हिंदू धर्म से जोड़कर इसका विरोध करती आ रही है। तब भी, जबकि दुनिया के कई देश भारत के इस ज्ञान का लोहा मानकर उसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना चुके हैं।   आगे पढ़ें

शख्सियत और भी

मंदसौर खबर और भी

नज़रिया और भी

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आतंक की राह से हटे पाकिस्तान वर्ना तबाही तय

केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद से पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए तीन बार भारतीय सेना स्ट्राइक कर चुकी है। सितंबर 2016 में उरी में आर्मी हेड क्वार्टर में आतंकी हमले के बाद भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर कश्मीर में चल रहे शिविरों को निशाना बनाया गया था। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तानी सीमा के पांच किलोमीटर घुसकर शक्तिशाली बम बरसा कर बालाकोट में चल रहे आतंकी अड्डों को ध्वस्त कर दिया था। वायु सेना की कार्रवाई से पाकिस्तान की सरकार और सेना इस तरह घबरा उठी कि उसने दुनिया भर में गुहार लगाना शुरू कर दिया ,लेकिन उन्हें कहीं भी सहानुभूति हासिल करने में सफलता नहीं मिली। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि अब थका हारा पाकिस्तान अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत महसूस करेगा, परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सीमा पर उसकी नापाक हरकतों का जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने इस बार तो तोपखाने का इस्तेमाल कर उसे हक्का-बक्का कर दिया। read more   आगे पढ़ें

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नशा और नंगई के बीच नौनिहाल

कई बहुप्रतिष्ठित अखबारों पर यह आरोप लग चुका है कि वे यूजर्स, लाईक,हिट्स बढ़ाने के लिए पोर्न सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि यूजर्स की संख्या के आधार पर ही विग्यपन मिलते हैं। यानी कि वर्जनाओं को वैसे ही फूटने का मौका मिला जैसे कि बाढ़ में बाँध फूटते हैं। सारी नैतिकता इसके सैलाब में बह गई। कमाल की बात यह कि साँस्कृतिक झंडाबरदारी करने वाली सरकार ने इस पर दृढता नहीं दिखाई। इंदौर हाईकोर्ट के वकील कमलेश वासवानी की जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने 850 पोर्नसाईटस पर प्रतिबंध लगाने को कहा। सरकार ने दृढ़ता के साथ कार्रवाई शुरू तो की लेकिन जल्दी ही कदम पीछे खींच लिए।   आगे पढ़ें

विश्लेषण और भी

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लाट साहब!! गुस्सा जायज पर आप भी डकैतों का साथ देने वालों का सजदा छोड़ें

बढ़िया है बाबू जी! बाबू शब्द ब्यूरोक्रेसी के लिए दशकों से इस्तेमाल हो रहा है। सम्भवतः अंग्रेजों के समय से जब लगान इत्यादि राजस्व संग्रहण के लिए इस सर्विस का गठन हुआ था। गुस्सा आना भी चाहिए, लेकिन सिर्फ एक पक्ष पर? घटिया मानसिकता वाले बयान पर नाराजगी जायज है, लेकिन क्या मध्यप्रदेश में कोई ऐसा अफसर भी है, जिसने राज्य मंत्री पद पर रहते समय सामने पड़ने पर बद्रीलाल यादव को सलाम न ठोका हो? यदि है तो गुस्सा जायज है। साल भर पहले तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान या मंत्री रहे उनकी पार्टी नेताओं की जी हजूरी न की हो? आपने अपनी डिग्निटी के लिए तमाम सियासी बिरादरी को डकैत और घपलेबाज का तमगा देकर उनकी डिग्निटी को चुनौती दी है। अब आप कैसे वर्तमान सत्ताधारी नेताओं के सम्मान में मुश्कें कस कर सजदा करेंगे?read more   आगे पढ़ें

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अयोध्या में मन्दिर मस्जिद के बाद अब 'राष्ट्र मन्दिर' के निर्माण की बारी

अयोध्या में मंदिर निर्माण जल्द से जल्द प्रारंभ किए जाने के लिए साधु संतों के जमावड़े ने सरकार से कई बात कानून बनाने अथवा अध्यादेश जारी करने की मांग की गई थी। तब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा था कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और सरकार न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा करेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद भी अपने रुख को दोहराया। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी भूरी -भूरी प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने देश की जनता, साधु संतों और राजनीतिक दलों को इस फैसले की धैर्य पूर्वक प्रतीक्षा करने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया।   आगे पढ़ें

फोटो गैलरी और भी