इस वक्त मौसम बदल रहा है और वायरल फीवर का कहर भी बढ़ रहा है. वायरल बुखार एक कॉमन समस्या है, जिससे बड़ी संख्या में लोग परेशान होते हैं. वायरल फीवर आने पर डॉक्टर पैरासिटामोल टेबलेट लेने की सलाह देते हैं.
बुखार आते ही कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं. लोगों को लगता है कि ये दवाएं बुखार से जल्द राहत दिला सकती हैं.
हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स इस आदत को सेहत के लिए खतरनाक मानते हैं. अब सवाल है कि वायरल बुखार में एंटीबायोटिक लेना सही है या नही? चलिए इस बारे में एक्सपर्ट से जान लेते हैं.
नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत के अनुसार वायरल बुखार वायरस के कारण होता है, जबकि एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण पर असर करती हैं.
वायरस और बैक्टीरिया दोनों अलग-अलग होते हैं, इसलिए एंटीबायोटिक का वायरस पर कोई असर नहीं पड़ता है. इसका मतलब साफ है कि सामान्य वायरल बुखार में एंटीबायोटिक लेने से बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती, बल्कि शरीर पर उल्टा असर पड़ सकता है.
बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से कई साइड इफेक्ट हो सकते हैं. इससे पेट खराब होना, उल्टी-दस्त, एलर्जी और लिवर या किडनी पर असर पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
डॉक्टर ने बताया कि वायरल बुखार में एंटीबायोटिक दवाएं लेने का सबसे बड़ा खतरा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस है. यह दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में एक है. अगर शरीर में यह रेजिस्टेंस हो जाए, तो शरीर पर इन दवाओं का असर धीरे-धीरे खत्म होने लगता है.
भविष्य में जब वास्तव में बैक्टीरियल इंफेक्शन होगा, तब ये दवाएं काम नहीं करेंगी. इससे जान के लिए खतरा पैदा हो सकता है. इसलिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल बेहद सावधानी और एक्सपर्ट की सलाह के बाद ही करना चाहिए.



