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मप्र राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द

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मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया।

मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने ताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग अधिकारी) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।

मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को मतदान होना है।

भाजपा प्रत्याशी महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तेलंगाना की एक अदालत में नटराजन के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है और शपथपत्र में इसका उल्लेख नहीं है।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथपत्र में सभी आपराधिक मामलों का उल्लेख किया जाना जरूरी है लेकिन नटराजन ने जानबूझकर इसे छुपाया।

गुप्ता ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने इसी आधार पर नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया है।

राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे न्याय की जीत बताया और कहा कि भाजपा ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

गुप्ता ने बताया कि नटराजन ने इस आपराधिक मामले में अदालत में अपना जवाब भी दाखिल किया है लेकिन शपथ पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया।

उन्होंने कहा, ‘‘इस जानकारी को जानबूझकर छुपाया गया है। उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथ पत्र में आपको यह जानकारी देनी होती है।’

उन्होंने कहा कि इसी प्रावधान के तहत भाजपा के उम्मीदवार महेश केवट ने नटराजन की उम्मीदवारी पर आपत्ति दर्ज की थी।

भाजपा उम्मीदवार के वकील ने कहा कि नामांकन में और भी बहुत सारी खामियां पाई गई।

कांग्रेस के मध्यप्रदेश प्रभारी हरिश चौधरी ने दावा किया कि नटराजन के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है और भाजपा उन्हें परेशान करने के लिए इस प्रकार के मामले सामने ला रही है।

उन्होंने कहा कि नटराजन को अदालत का एक कारण बताओ नोटिस मिला है और शपथ पत्र में इसका उल्लेख किया जाना जरूरी नहीं है।

चौधरी ने कहा कि निर्वाचन आयोग के निर्देश साफ हैं कि नामांकन में जानकारी तब देनी होती है, जब मामला दर्ज हो, नोटिस मिलने पर नहीं।

उन्होंने दावा किया कि तकनीकी तौर पर नटराजन का नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता है।

राज्य में राज्यसभा की खाली हुई जिन तीन सीट पर चुनाव चुनाव हो रहे हैं, उनमें से दो पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत तय मानी जा रही है जबकि संख्या बल के लिहाज से तीसरी सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी है। लेकिन राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को पेचीदा बना दिया है।

भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट पर मध्यप्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया है।

चुघ और अग्रवाल ने शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल किया, जबकि नटराजन और केवट ने सोमवार को नामांकन दाखिल किया।

वर्तमान में मध्यप्रदेश की कुल 230 सदस्यीय विधानसभा में सदस्यों की संख्या 229 है। इनमें भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं जबकि एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है। दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द हो चुकी है, जिस वजह से एक सीट रिक्त है।

श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर उच्च न्यायालय की रोक है।

राज्यसभा की तीन सीट पर मतदान होने की स्थिति में प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत होगी।

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