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पीओके में अंधाधुंध फायरिंग 30 की मौत 200 से ज्यादा घायल

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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध फायरिंग की है। इस फायरिंग में 30 से ज्यादा लोगों के मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में मरने वालों की तादाद 100 से अधिक बताई गई है। ये झड़पें तब हुईं जब पाकिस्तान ने संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पर प्रतिबंध लगा दिया है। जेएएसी पीओके में आर्थिक और राजनीतिक शिकायतों को लेकर विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाला एक प्रमुख नागरिक समाज गठबंधन है।

पीओके में पाकिस्तानी सेना का कहर, इंटरनेट भी बंद

रिपोर्ट के अनुसार, रावलकोट इस समय पीओके में फैल रहे विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गया है। यह विरोध तब तेज हुआ जब प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

पाकिस्तान ने पीओके में प्रस्तावित “लॉन्ग मार्च” से पहले कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि 5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, जिससे संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।

प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मार रही पाक सेना

पाकिस्तानी सेना प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मार रही है। स्थानीय कार्यकर्ताओं के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया है कि आंदोलन के दौरान जेएंडकेजेएएसी के सदस्य शाहजेब हबीब और अमजद कश्मीरी की मौत हो गई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग कर रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन अब केवल रावलाकोट तक सीमित नहीं है। मुजफ्फराबाद, मीरपुर, टाटा पानी और प्लांदरी समेत कई क्षेत्रों में प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया गया है। प्लांदरी में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध किए जाने की भी खबर है।

पीओके को लेकर कई देशों में विरोध प्रदर्शन

पीओके में बिगड़ते हालात को लेकर विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम में एकजुटता प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 9 जून के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। रावलाकोट में जारी तनाव और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के कारण पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक ध्यान आकर्षित कर सकती है।

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