तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने आज दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की। टीएमसी के बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय कर लिया है।
दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद बागी TMC सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि बागी नेताओं ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी के साथ विलय किया है, यह एक राजनीतिक पार्टी है, एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी है। असली TMC कौन है, यह अदालत में तय होगा।
इससे पहले, टीएमसी के बागी नेता दिल्ली में बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव से मिले। बागी खेमे की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि दो और सांसद बागी खेमे में शामिल होने वाले हैं, जिससे लोकसभा में इस गुट में सदस्यों की संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी।
लोकसभा स्पीकर और भूपेंद्र यादव से मिले टीएमसी के बागी
पार्टी के अंदर चल रही खींचतान के बीच, बागी तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय और अन्य रविवार को राजधानी में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के घर पहुंचे ताकि सदन में बैठने की अलग व्यवस्था की मांग कर सकें। इससे पहले दिन में, कुछ बागी TMC सांसद केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे थे। बागी TMC सांसद सायनी घोष, माला रॉय, शताब्दी रॉय, अरूप चक्रवर्ती और काकोली घोष ने राजधानी में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इसी तरह, कोलकाता में भी TMC नेताओं गौतम देब और चंद्रिमा भट्टाचार्य के TMC प्रमुख ममता बनर्जी के आवास पर पहुंचने के साथ बातचीत हुई।
नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में विलय
पार्टी के बागी सांसद ‘नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी’ नाम की क्षेत्रीय पार्टी में विलय कर लिया है। अब ये बागी नेता केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को समर्थन दे सकते हैं। ऐसा करने से अलग संसदीय समूह बनाने से जुड़ी तकनीकी और कानूनी अड़चनों को दूर करने में मदद मिलेगी। नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी का मुख्य राजनीतिक फोकस पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा पर होगा।
वहीं तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बागी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दलबदल विरोधी कानून के तहत ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जिसके तहत कोई “अलग गुट” सदन के भीतर काम कर सके, जबकि वे उस पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीती हुई अपनी सीटें भी अपने पास रखे रहें।
दलबदल विरोधी कानून का दिया हवाला
घोष ने X पर एक पोस्ट में कहा कि कोई सांसद या विधायक अयोग्य घोषित होने से तभी बच सकता है जब राजनीतिक दलों का औपचारिक विलय हो, और वह भी केवल कुछ खास शर्तों के तहत। उन्होंने कहा, ‘जब तक किसी सांसद या विधायक की मूल राजनीतिक पार्टी का किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं हो जाता, तब तक वे दलबदल विरोधी कानून के तहत अपनी सीट खो देंगे या अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे; और उन्हें या तो नई/विलय हुई पार्टी में शामिल होना होगा, या मूल विलय में शामिल होने से इनकार करना होगा।’
सागरिका घोष ने कहा, ‘मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर जीती गई सांसद/विधायक की सीट पर रहते हुए संसद या विधानसभा के भीतर ‘अलग गुट’ बनाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। कानून स्पष्ट है। एक ही चुनाव चिह्न पर सदन के भीतर कोई ‘अलग गुट’ बनाना कानूनी नहीं है। नई पार्टी में विलय करें या अयोग्य घोषित हों।’ उन्होंने आगे कहा, नहीं तो सदन – संसद या विधानसभा – की आपकी सदस्यता गैर-कानूनी होगी।’



