लोकसभा में बुधवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया. इसमें सख्त सजा का प्रावधान है. इस कानून का मकसद ऐसे लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता पर बुरा असर पड़ता है.
सरकार ने 2024 में ही इस कानून को बनाया था. अब इसमें संशोधन लाया गया है. 2024 में लाए गए मूल कानून में संशोधन वाले इस विधेयक की मुख्य बातें निम्न हैं:
- सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को यह अधिकार देना कि वे प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों के मामलों में सुनवाई के लिए किसी भी सत्र अदालत को विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत के तौर पर नामित कर सकें.
- यह प्रावधान करना कि ऐसी विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों में कार्यवाही रोजाना के आधार पर हो और आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी हो जाए.
- केंद्र सरकार को किसी भी अपराध की जांच के लिए विशेष कार्य बल बनाने का अधिकार देना.
- यह प्रावधान करना कि कानून के तहत अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी हो जाए.
- सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को कानून के तहत मामलों को चलाने के लिए एक या अधिक विशेष सरकारी अभियोजक नियुक्त करने का अधिकार देना.
- किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ में अपील करने की व्यवस्था करना, और अपील स्वीकार होने की तारीख से तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करना.
- नए कानून के तहत, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित तरीकों में शामिल पाए गए लोगों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल का कारावास काटना पड़ सकता है और उन पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
- संगठित अपराधों के लिए, विधेयक में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है.
साल 2024 में कानून तब लाया गया था, जब सरकार को प्रश्नपत्र लीक के बड़े विवादों का सामना करना पड़ रहा था. इस कानून से पहले, केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में शामिल विभिन्न संस्थाओं द्वारा अपनाए गए अनुचित साधनों या किए गए अपराधों से निपटने के लिए कोई खास ठोस कानून नहीं था.
इस कानून का मकसद संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) आदि द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना है.
इस बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक के विरुद्ध कड़े प्रावधान के साथ मूल कानून 2024 में लागू किया गया था और आज प्रश्नपत्र लीक संबंधी खामियां सामने आने के बाद सरकार ने माना कि कानून को और कड़ा बनाने की जरूरत है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली में ‘‘मासूम बच्चों पर जुल्मोसितम ढाया गया’’, जबकि सरकार ने सर्वोच्च संयम के साथ कार्रवाई की और सुनिश्चित किया कि कोई हताहत नहीं हो.
उन्होंने कहा, ‘‘शायद वह (गोगोई) अपने अनुभव से बोल रहे थे. क्योंकि असम में 1979 से 1984 तक छात्रों के आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई में 860 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर छात्र थे। उस समय असम में कांग्रेस की सरकार थी.’’
सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने देश में पिछले कुछ साल में 152 बार प्रश्नपत्र लीक होने और इनमें 750 करोड़ बच्चों के प्रभावित होने का दावा किया.
उन्होंने कहा, ‘‘पता नहीं प्रियंका गांधी यह आंकड़ा कहां से लाईं.’’
सिंह ने कहा कि प्रियंका गांधी ने 2024 का कानून लागू होने के बाद कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही, जबकि ऐसे मामलों में 52 प्राथमिकियां दर्ज हो चुकी हैं.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रतिबद्धता के अनुरूप यही सरकार 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाई जो कांग्रेस का अधूरा काम था.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि लोकसभा में पारित प्रश्नपत्र लीक रोधी संशोधन विधेयक पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को खत्म करने की एक कोशिश है. जोशी ने कहा कि यह विधेयक परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता बढ़ाएगा.
शिक्षा मंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया है, जिससे परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों से निपटने के लिए एक सख्त कानूनी ढांचा तैयार होगा.’’
उन्होंने कहा, ‘‘सख्त सजा, त्वरित अदालत, जांच के बेहतर तौर-तरीके और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के प्रावधान वाले इस विधेयक का उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक के पूरे नेटवर्क को खत्म करना और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता को बढ़ाना है.’’



