सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल के बजाय किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग पर अंतरिम राहत पारित करने से दिल्ली हाई कोर्ट ने रविवार को इन्कार कर दिया।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजली जे आंग्मो की याचिका पर रविवार को विशेष सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि खराब स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराना मनमाना नहीं था।
चूंकि वांगचुक ने खराब हालत के बावजूद खुद से अस्पताल में भर्ती होने का फैसला नहीं किया था, इसलिए सरकार को दखल देने का अधिकार था। बता दें कि नीट-यूजी पेपर लीक के मुद्दे पर 20 जून से जंतर-मंतर पर शुरू हुए सीजेपी के प्रदर्शन में सोनम वांगचुक ने 28 जून से अनशन शुरू किया था।
कोर्ट ने केंद्र-राज्य और पुलिस को भेजा नोटिस
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने कहा कि डॉक्टर वांगचुक की निगरानी कर रहे थे और उन्होंने इलेक्ट्रोलाइट्स लेने के लिए सहमति दी थी। ऐसे में उनके शारीरिक स्वायत्तता के अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। अंतरिम आदेश पारित करने की मांग को ठुकराते हुए पीठ ने केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ दिल्ली पुलिस को याचिका पर नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि किसी भी मेडिकल स्थिति के बारे में अंतिम निर्णय मेडिकल टीम लेगी और मेडिकल प्रोटोकाल के अनुसार फैसला करेगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मेडिकल रिपोर्ट वांगचुक के परिवार के साथ साझा की जाएंगी।
मामले पर अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। पीठ ने रिकार्ड पर लिया कि सोनम वांगचुक के परिवार को दिन भर उनसे मिलने की पूरी छूट दी गई थी और अस्पताल में एक अलग कमरा भी उपलब्ध कराया था।
वकीलों-डॉक्टरों से संपर्क टूटने का दावा, मेदांता ले जाने की इच्छा
सोनम वांगचुक की पत्नी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल व विवेक तन्खा ने तर्क दिया कि सफदरजंग में भर्ती होने के बाद वांगचुक का अपने वकीलों और डाक्टरों से संपर्क टूट गया है। उन्होंने कहा कि स्वजन उन्हें मेदांता ले जाना चाहते हैं।
सिब्बल ने कहा कि सोनम के खिलाफ कोई मामला नहीं है। क्या भारत के नागरिक को अपनी पसंद के अस्पताल में जाने की अनुमति नहीं है? क्या उनके शरीर पर सरकार पर नियंत्रण है। उन्हें इस बात से कोई आपत्ति नहीं है कि एम्स या सफदरजंग के डाक्टर टीम में शामिल हों।
कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक को हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं है और उन्हें अपनी पसंद के डाक्टर या अस्पताल इलाज कराने का अधिकार है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सोनम वांगचुक के आस-पास और कमरे के अंदर पुलिस तैनात है।
वहीं, केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल सालिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा कि 16 जुलाई के आदेश में साफ तौर पर कहा गया था कि सोनम वांगचुक के इलाज और मेडिकल से जुड़ी सभी चीजें सरकार ही करेगी। अभी सफदरजंग और एम्स के डाक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।
उन्होंने तर्क दिया कि उमस भरे मौसम में इतने दिनों तक उपवास करने से मेडिकल दिक्कतें हो सकती हैं और इसी स्थिति को देखते हुए सोनम को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि सोनम की सहमति से उन्हें कुछ शुगर-फ्री इलेक्ट्रोलाइट्स दिए गए थे और एम्स, सफदरजंग और प्राइवेट लैब में खून की जांच कराई गई।
सरकार एम्स शिफ्ट करने को भी तैयार
सरकार पर शक करने की कोई वजह नहीं है, लेकिन सोनम को इलाज कर रहे डाक्टरों का सहयोग करना होगा। एएसजी ने कहा कि अगर कोर्ट को ठीक लगे, तो सरकार उन्हें एम्स भी स्थानांतरित कर सकती है।
सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहे एम्स के चिकित्सक डा. अक्षय ने कहा कि सोनम वांगचुक का इलाज किया जा रहा है और शनिवार से कुछ तरल पदार्थ व बिना चीनी वाला ओआरएस भी लेना शुरू कर दिया है। यह भी बताया कि सोनम को आइवी फ्लूइड्स देने के लिए बात करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया है।
वहीं, सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रही सोनम की पत्नी गीतांजली जे आंग्मो ने भी तर्क दिया कि डाक्टर सहयोग नहीं कर रहे हैं और प्राइवेट लैब में जांच के लिए खून के नमूने देने में देरी की। उन्होंने कहा कि इस वजह से डाक्टरों पर हमारा भरोसा कम हो गया।
गौरतलब है कि 16 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी की याचिका पर सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए उनकी नियमित चिकित्सा जांच व जरूरी दवाएं देने का आदेश दिया था।



