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मप्र में मूंग खरीदी को लेकर किसान सड़क पर, सीएम हाऊस की सुरक्षा बढ़ाई गई

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मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हजारों किसान 7 दिन का राशन-पानी साथ लेकर भोपाल पहुंच गए हैं.

रास्ते में कई जगह पुलिस की बैरिकेडिंग हटाई गई और धक्का-मुक्की भी हुई, लेकिन किसान मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ते रहे. उन्हें पुलिस रोकने में नाकाम रही. आंदोलनकारी साफ कह रहे हैं कि 100 प्रतिशत मूंग खरीदी, खाद वितरण व्यवस्था में सुधार और किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों पर ठोस फैसला होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे.

100 प्रतिशत मूंग खरीदी पर अड़े किसान

बता दें कि मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी को लेकर सियासत तेज हो गई है. एक तरफ सरकार केंद्र से 75 हजार करोड़ रुपए के बकाया पैकेज की उम्मीद लगाए बैठी है, तो दूसरी ओर किसान 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी की मांग पर अड़े हैं. इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसान भोपाल पहुंच गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर मूंग खरीदी का विवाद क्यों गहराया, किसानों को नुकसान कहां हो रहा है और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

मूंग खरीदी का विवाद क्यों खड़ा हुआ

मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी 1 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित है, लेकिन खरीदी की प्रक्रिया और व्यवस्थाओं को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ है. किसान संगठनों का आरोप है कि संसाधनों की कमी के कारण सरकार खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह लागू नहीं कर पा रही है. वहीं सरकार की उम्मीद केंद्र से मिलने वाले 75 हजार करोड़ रुपए के बकाया पैकेज पर टिकी हुई है. माना जा रहा है कि यह राशि मिलने के बाद खरीदी समेत किसानों से जुड़ी कई योजनाओं को गति मिल सकती है.

MSP है, लेकिन पूरी फसल नहीं खरीदेगी सरकार

बता दें कि मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि सरकारी एजेंसियां कुल उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही एमएसपी पर खरीदती हैं. बाकी 75 प्रतिशत फसल किसानों को खुले बाजार में बेचना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि खुले बाजार में मूंग का भाव 6 से 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है. ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल करीब 2 से 3 हजार रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसान संगठनों का कहना है कि जब एमएसपी घोषित की गई है, तो पूरी उपज उसी दर पर खरीदी जानी चाहिए.

भावांतर योजना भी नहीं बन सकी किसानों की राहत

राज्य सरकार ने इस बार केंद्र से मूंग खरीदी के लिए भावांतर योजना लागू करने की मांग की थी. इस योजना के तहत बाजार और एमएसपी के बीच के अंतर की भरपाई किसानों से की जा सकती थी, लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी. यही कारण है कि अब प्रदेश सरकार केंद्र से लगातार बातचीत कर रही है. उम्मीद जताई जा रही है कि यदि लंबित राशि जारी होती है तो खरीदी व्यवस्था और किसानों के लिए दूसरी राहत योजनाओं पर तेजी से काम किया जा सकेगा.

किसान आंदोलन ने क्यों पकड़ा जोर

दरअसल, मूंग खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान क्रांति पैदल यात्रा शुरू की है. प्रदेश के 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं. यह यात्रा बरखेड़ा से शुरू होकर औबेदुल्लागंज, मंडीदीप और 11 मील बायपास होते हुए भोपाल पहुंची है. हालांकि 11 मील बायपास पर पुलिस ने कई स्तर की बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की.

इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और बाद में किसान बैरिकेड हटाकर शहर में प्रवेश कर गए. इसके बाद वे मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर गए. आंदोलन को देखते हुए होशंगाबाद रोड पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. किसान अपने साथ कई दिनों का राशन लेकर आए हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं.

प्रदर्शन में आए एक किसान रमेश का कहना है कि हम अपने साथ राशन लेकर आए हैं. पुलिस ने हमें रोक दिया है, इसलिए हम रोड पर ही बाटी बना रहे हैं. कोई भी किसान भूखा नहीं रहेगा. उनका कहना है कि अभी तो यह 10 प्रतिशत ही किसान हैं, बाकी किसान गांव में है, बुधवार को वे भी भोपाल कूच करेंगे. हमने सरकार से कोई नई मांग नहीं की है. सरकार हमारी मांग मान जाए, तो हम वापस चले जाएंगे.”

किसानों के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया एक्स पर मध्य प्रदेश कांग्रेस जीतू पटवारी ने बयान दिया. जीतू पटवारी ने लिखा कि “मूंग की 100% सरकारी खरीदी, खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 5 हजार से अधिक किसान परिवार भोपाल पहुंच चुके हैं. किसान नेताओं का साफ कहना है कि मुख्यमंत्री निवास के सामने डेरा डालेंगे और अब अपनी मांगें पूरी होने के बाद ही वापस लौटेंगे.

मुझे सूचना मिल रही है कि आपके निर्देशों के बाद पुलिस भारी बल प्रयोग कर किसानों को हटाने, वापस लौटाने की तैयारी कर रही है. याद रखिए, मेरे किसान परिवारों पर किए गए किसी भी प्रकार के अत्याचार की बीजेपी सरकार को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी. बेहतर यही होगा कि मुख्यमंत्री किसानों से तत्काल चर्चा करें और उनकी प्रत्येक मांग को अविलंब लागू करे.”

किसानों की प्रमुख मांगें

किसान संगठनों की सबसे बड़ी मांग है कि प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी की गारंटी दी जाए. उनका कहना है कि सीमित खरीदी की वजह से अधिकांश किसानों को बाजार में कम दाम पर उपज बेचनी पड़ती है. इसके अलावा किसान खाद वितरण व्यवस्था में सुधार और किसानों से जुड़े लंबित फैसलों पर जल्द निर्णय की भी मांग कर रहे हैं.

इसी बीच जबलपुर हाईकोर्ट ने कृषि आदान विक्रेता संघ की याचिका खारिज करते हुए ई-विकास प्रणाली के तहत ऑनलाइन खाद वितरण व्यवस्था को वैध माना है. हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि जमीनी स्तर पर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था अभी भी संतोषजनक नहीं है.

फिलहाल इस पूरे विवाद का समाधान दो मोर्चों पर निर्भर माना जा रहा है. पहला, केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय और खरीदी से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनती है या नहीं. दूसरा सरकार किसानों की 100 प्रतिशत खरीदी जैसी प्रमुख मांगों पर क्या फैसला लेती है. जब तक इन मुद्दों पर ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक मूंग खरीदी का विवाद और किसान आंदोलन राजनीति के केंद्र में बने रहने की संभावना है.

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