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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दिया

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनके निजी सहायक के घर से नकदी और आभूषण जब्त किए जाने के बाद शनिवार को कहा कि उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया है, ताकि छात्रों एवं परीक्षाओं के मुद्दे पर पार्टी तथा राहुल गांधी का विमर्श कमजोर न पड़े।

रावत ने यह भी कहा कि अगर संबंधित प्रकरण में उनकी संलिप्तता पाई जाती है तो वह जेल जाने के लिए तैयार हैं।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) की कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा दे रहे हैं, ताकि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के अभियान का विमर्श कमजोर न हो।

रावत के करीबी सूत्रों ने बताया कि वह जल्द ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर दोनों पदों से अपना इस्तीफा सौंपेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में संभावित विधानसभा चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा है और दावा किया कि ईडी की कार्रवाई एक खास तरह का विमर्श तैयार करने का प्रयास है।

रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह दो संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे रहे हैं, कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पद से इस्तीफा देने और पार्टी से इस्तीफा देने में ‘‘बड़ा अंतर’’ होता है।

यह घटनाक्रम बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा चंदन सिंह जीना के परिसरों पर की गई छापेमारी के दौरान एक दर्जन लग्जरी घड़ियां और 32 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने के बाद हुआ है।

जीना वर्तमान में रावत के निजी सहायक हैं और 2014-17 के दौरान मुख्यमंत्री के कार्यकाल में उनके विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) भी रह चुके हैं।

ईडी ने कहा है कि छापेमारी राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 2016 में आयोजित एक परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत की गई।

अपने निजी सहायक का बचाव करते हुए रावत ने कहा कि इस मामले में जीना की कोई भूमिका हो ही नहीं सकती।

रावत के मुताबिक, जीना लंबे समय से उनके साथ जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं और वह ‘‘बेहद शालीन, विनम्र और मेहनती व्यक्ति’’ हैं।

उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान ओएमआर शीट से छेड़छाड़ किए जाने का कोई सबूत मिलता है तो वह ऐसी हरकत से शर्मिंदा होंगे, लेकिन फिलहाल उन्हें इन आरोपों पर विश्वास नहीं है।

रावत ने कहा कि कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं और राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिये आवाज उठा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान भर्ती प्रक्रिया का जिक्र करते हुए रावत ने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था।

रावत के अनुसार, उनके करीब तीन साल के कार्यकाल में 42,000 से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने चिकित्सा और शिक्षा भर्ती समेत विभिन्न भर्ती बोर्ड गठित किए थे और लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षाएं आयोजित करने के लिए बाध्य किया था।

उन्होंने कहा कि यदि आयोग के अध्यक्ष के चयन के संदर्भ में ‘‘निर्णय में कोई चूक’’ हुई है तो वह उत्तराखंड की जनता से माफी मांगते हैं।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष आर बी एस रावत की नियुक्ति का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नियुक्ति उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी।

उन्होंने कहा कि इस नियुक्ति के संबंध में उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी से भी सलाह मिली थी।

रावत ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद जांच कराई गई और आयोग के अध्यक्ष को इस्तीफा देना पड़ा।

उनके अनुसार, इसके बाद तीन सदस्यीय समिति गठित की गई और उसकी रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा रद्द कर दी गई।

रावत ने कहा कि यदि किसी के पास भर्ती मामलों में उनके हस्तक्षेप या संलिप्तता का कोई सबूत है तो उसे सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को सौंपा जाना चाहिए।

उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि छात्र जीवन में वह जेल गए थे और बाद में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समर्थन में आंदोलन करने के दौरान भी उन्हें जेल जाना पड़ा था।

रावत ने कहा कि उन्हें दोबारा जेल जाने का भी कोई डर नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर कुछ गलत पाया जाता है तो जहां टांगना चाहें, वहां टांग दें।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या दबाव के आगे झुककर वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं, तो रावत ने कहा कि उनमें लड़ने का सामर्थ्य है।

रावत ने शुक्रवार देर रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था कि उन्हें जीना पर भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के लगाए गए आरोपों पर विश्वास नहीं है, लेकिन वह निश्चित रूप से नहीं चाहते कि ये आरोप उनकी पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को कमजोर करें।

ईडी ने शुक्रवार को कहा था कि उसने हरीश रावत के निजी सहायक के परिसरों पर छापेमारी की है।

ईडी के अनुसार, ये छापेमारी 2016 में राज्य सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित एक परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत की गई।

ईडी ने एक बयान में कहा कि बृहस्पतिवार को जीना के परिसरों पर की गई छापेमारी के दौरान 32 लाख रुपये नकद और एक दर्जन महंगी घड़ियां जब्त की गईं।

ईडी का मामला धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया है। यह मामला 2016 में आयोग द्वारा आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के संबंध में उत्तराखंड पुलिस और सतर्कता ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई चार प्राथमिकी पर आधारित है।

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