मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरदार सरोवर प्रोजेक्ट को लेकर 30 साल से लंबित वित्तीय लेन-देन विवाद में हुए समझौते को मप्र सरकार की बड़ी जीत बताया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के साथ हुए समझौते से मप्र सरकार को 1268 करोड़ रुपए की सीधी बचत हुई है।
अटॉर्नी जनरल द्वारा तय फॉर्मूले से मप्र पर गुजरात की 1500 करोड़ रुपए की देनदारी बन रही थी, लेकिन समझौते के बाद सिर्फ 231.80 करोड़ रुपए ही गुजरात को देना पड़ेंगे। सीएम ने इस ऐतिहासिक समझौते के लिए पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह का आभार जताया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फरवरी माह में भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा सुझाए फॉर्मूले के तहत सरदार सरोवर प्रोजेक्ट के विस्थापितों के पुनर्वास (आरएंडआर) पर हुए खर्च का 31.98% हिस्सा मप्र को उठाना था। यदि अटार्नी जनरल की सिफारिश वाला फॉर्मूला लागू होता तो मप्र को गुजरात को लगभग 1500 करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ता।
सरदार सरोवर परियोजना से राज्य को सस्ती बिजली मिलती है। कुल उत्पादित बिजली का 57% हिस्सा मप्र को मिलता है। अब तक 3900 करोड़ यूनिट बिजली मात्र 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से मप्र को मिल चुकी है।
प्रदेश की 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को इस परियोजना से पानी मिलता है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, देवास, धार और कटनी जैसे बड़े शहरों को पेयजल सप्लाई होती है।
राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में चारों राज्यों मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच बैठक में सर्वसम्मति से लागत के बंटवारे का नया फॉर्मूला तय किया गया।
सरदार सरोवर प्रोजेक्ट मामले में प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का कहना है कि इस समझौते से मप्र को करीब 1200 करोड़ से अधिक की बचत हुई है । यह एक ऐतिहासिक फैसला है ।
नर्मदा जल विवाद पर हुए निर्णय को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने डॉ. मोहन यादव को सरेंडर और कम्प्रोमाइज्ड सीएम कहा है। हरीश चौधरी ने कहा कि गुजरात को खुश करने के चक्कर में सीएम ने मप्र के साथ धोखा कर दिया।
कांग्रेस मप्र की जनता को उसका हक दिलाने की लड़ाई लड़ेगी। पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मोहन यादव गुजरात लॉबी के सामने नतमस्तक हैं। जिस मप्र ने सरदार सरोवर परियोजना के लिए अपनी ज़मीन दी, जंगल दिए, गांव डुबोए और लाखों लोगों का विस्थापन झेला, उसी मप्र सरकार को करोड़ों रुपए गुजरात को देने होंगे।
साफ दिख रहा है कि मोहन सरकार ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के सामने मप्र के हितों से समझौता कर लिया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि अब मप्र की जमीन, किसानों, आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की कीमत कौन देगा?”



