कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और नागरिकता के सवाल को लेकर बड़ी टिप्पणी की है।
कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच ने मंगलवार को एक मामले में याचिकाकर्ता सिराज उल शेख को राहत देने से इनकार कर दिया।
मामला यह था कि SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद याचिकाकर्ता का पासपोर्ट आवेदन रोक दिया गया था।
जस्टिस कौशिक चंदा की पीठ ने रिट याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि पहले याचिकाकर्ता की नागरिकता का सवाल तय किया जाना चाहिए।
जस्टिस कौशिक चंदा की पीठ ने कहा कि हमारे हिसाब से मौजूदा रफ्तार से SIR ट्रिब्युनल को सभी अपीलों का निपटारा करने में 21 साल लगेंगे।
सिराजुल शेख नाम के व्यक्ति ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर करके अपील की थी कि उनके पासपोर्ट को ‘होल्ड’ पर रखने के मामले का समाधान किया जाए, ताकि वे विदेश में इलाज करा सकें।
पासपोर्ट ऑफिस ने शेख से अपना असली वोटर ID कार्ड दिखाने को कहा लेकिन वोटर लिस्ट से नाम हट जाने के कारण वह ऐसा नहीं कर पाए।
बेंच ने आगे कहा, ‘हमारे हिसाब से, मौजूदा रफ्तार से SIR ट्रिब्युनल को सभी अपीलों का निपटारा करने में 21 साल लगेंगे।’ जज ने कहा कि SIR अपीलेट ट्रिब्युनल के सामने मामलों की संख्या को देखते हुए अपीलों के निपटारे में ’21 साल लग सकते हैं’।
पिछले हफ्ते कलकत्ता हाईकोर्ट ने SIR के आधार पर फ़ूड सब्सिडी पाने वालों के नाम हटाने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि अब तक किसी भी प्रभावित व्यक्ति ने अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है।
शेख की वकील अविसिकता दास ने कोर्ट में दलील दी कि पासपोर्ट एक्ट, 1967 या पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत वोटर आईडी कार्ड कोई जरूरी दस्तावेज नहीं है, बशर्ते पहचान, पता और जन्म की तारीख़ दूसरे तरीकों से साबित हो रही हो।
हालांकि, कोर्ट ने पासपोर्ट ऑफ़िस को उनका तत्काल पासपोर्ट जल्द जारी करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।
साथ ही, पिछले हफ़्ते ही SIR के तहत नाम हटाए गए एक सीनियर पत्रकार राजगोपाल का पासपोर्ट लोगों के विरोध के बाद ‘प्रिंटिंग के लिए’ भेजा गया।



