मध्यप्रदेश की राजधानी में तीन दिनों से जारी किसान आंदोलन आखिरकार बुधवार को बातचीत के दौर तक पहुंच गया। संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा आंदोलनकारी किसानों को लेकर मंत्रालय पहुंचे, जहां 16 किसान संगठनों के साथ चर्चा जारी है।
इससे पहले किसानों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया। कुछ किसान अर्धनग्न होकर सड़कों पर उतरे, बैरिकेड्स तोड़कर बसों पर चढ़ गए और सद्बुद्धि यज्ञ किया। मुख्यमंत्री आवास जाने वाले रास्तों पर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। इस आंदोलन का सीधा असर शहर की व्यवस्था पर पड़ा है।
रहवासियों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है और सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने खुद मोर्चा संभाला है। भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
शाम चार बजे तोड़ी बैरिकेडिंग
बुधवार शाम 4 बजे किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया। मुख्यमंत्री आवास जाने वाला मार्ग डंपरों से बंद कर दिया गया है। लोग रोशनपुरा पर धरने पर बैठ गए, जबकि कुछ किसानों ने नर्मदापुरम रोड स्थित आरआरएल तिराहे के सामने से हटने से इनकार कर दिया और वहां भी डटे रहे।
हाईवे पर दिनभर लगा जाम
नर्मदापुरम-भोपाल हाईवे पर धरना और बैरिकेडिंग के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मुख्य मार्ग बंद होने से सारा दबाव भीतरी रास्तों पर आ गया है।
मिसरोद और होशंगाबाद रोड की कॉलोनियों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालात इतने बिगड़ गए कि गंभीर मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस को भी मुख्य मार्ग से नहीं जाने दिया गया, जिससे उन्हें संकरे और लंबे रास्तों से गुजरना पड़ा। इस अव्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा देखा गया और दिनभर वाहन डायवर्ट रास्तों से निकलते रहे।
आंदोलन का असर व्यापार पर भी दिखा। पास की शराब दुकान की बिक्री में भारी गिरावट आई। दुकान मैनेजर के अनुसार रोज साढ़े छह से सात लाख रुपये की बिक्री होती थी। मंगलवार को सिर्फ अस्सी हजार रुपये की बिक्री हुई। बुधवार को बिक्री लगभग शून्य रही। इसी तरह से अन्य कारोबारियों को ऐसा हाल रहा, नास्ते की दुकान जरूर चलती नजर आई।
लोग रहे घरों में कैद
सुरेंद्र विलास कॉलोनी के निवासी बालकृष्ण मिश्रा ने बताया कि चौबीस घंटे से लोग घर में कैद हैं। गेहूं पिसवाने और दूध लेने जैसे रोजमर्रा के काम भी नहीं हो पा रहे। उनका बेटा रात की ड्यूटी से अब तक घर नहीं लौटा है।
रहवासी आशीष शुक्ला ने कहा कि बीमार लोग डॉक्टर तक नहीं पहुंच पा रहे। मेडिकल स्टोर कर्मी जगतराम ने भी आवाजाही में परेशानी बताई।
किसान रमन वर्मा ने कहा कि वे अपने भाई के साथ आंदोलन में समर्थन देने आए हैं। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, वे वापस नहीं जाएंगे।
हजार पुलिसकर्मी तैनात
पुलिस आयुक्त संजय कुमार का कहना है लोगों को परेशानी न हो, इसलिए रूट डायवर्ट किया है। करीब 1000 से ज्यादा पुलिस बल तैनात है। पुलिस के आधिकारी हर मूवमेंट नजर रखी जा रही है।



