मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया की अधिसूचना अब कानूनी दांवपेंच में फंस गई है।
इस संबंध में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दायर की गई है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होगी।
मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच करेगी।
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अक्षत पहाड़िया ने अधिसूचना को चुनौती देते हुए कई कानूनी और प्रक्रियागत सवाल उठाए हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि मेट्रोपॉलिटन एरिया के गठन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों और आवश्यक कानूनी पहलुओं की अनदेखी कर अधिसूचना जारी की गई है।
नामकरण पर भी उठे सवाल
याचिका में एक प्रमुख आपत्ति मेट्रोपॉलिटन एरिया के नाम को लेकर भी दर्ज की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रदेश के सबसे बड़े शहरी और आर्थिक केंद्र इंदौर का नाम उज्जैन के बाद रखा गया है, जिस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
16 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को किया गया शामिल
गौरतलब है कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत लगभग 16 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले विशाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम जिलों की 38 तहसीलों तथा 2781 गांवों को शामिल किया गया है।
75 लाख से अधिक आबादी को मिलेगा लाभ
प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की अनुमानित आबादी 75.34 लाख बताई गई है। योजना को चार चरणों में विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। अधिसूचना के अनुसार अंतिम रूप से 16,000.87 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को मेट्रोपॉलिटन एरिया में शामिल किया गया है।
इंदौर का पूरा क्षेत्र, उज्जैन का 59 प्रतिशत हिस्सा शामिल
अधिसूचना के मुताबिक इंदौर जिले का 100 प्रतिशत क्षेत्रफल, यानी 3901.63 वर्ग किलोमीटर, मेट्रोपॉलिटन एरिया में शामिल किया गया है। वहीं उज्जैन जिले के कुल 6097.99 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से 3595.24 वर्ग किलोमीटर हिस्सा शामिल किया गया है, जो जिले के कुल क्षेत्रफल का लगभग 59 प्रतिशत है।
सुनवाई पर टिकीं निगाहें
मेट्रोपॉलिटन एरिया प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी शहरी विकास योजनाओं में शामिल है। ऐसे में हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर प्रशासनिक, राजनीतिक और शहरी विकास से जुड़े सभी पक्षों की निगाहें टिकी हुई हैं।



