33.1 C
Bhopal

फिल्म समीक्षा:चाँद मेरा दिल… मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ

प्रमुख खबरे

 

डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी।

‘चाँद मेरा दिल’ का ट्रेलर देखकर फिल्म के बारे में नहीं जाना जा सकता।  इतना ही कह सकता हूँ कि आशिकी 2 टाइप की ‘पिच्चर’ है, जिसमें आशिक की आशिक़ी का भूत उतरकर फिर चढ़ जाता है।

मां -बाप बेटे को इंजीनियर बनाने के लिए कॉलेज भेजते हैं, मगर वह बेटा इंजीनियर से पहले बाप बनने की राह पकड़ लेता है। एलईडी बल्ब की भी साल भर की गारंटी होती  है, लेकिन आशिक मियां  की न तो कोई गारंटी है, न वारंटी! साला, मोहब्बत भी चाइना के  माल जैसी हो गई।  चले तो चले, नहीं तो रोते  रहो!

कहानी नहीं बताऊंगा लेकिन जिस तरह के कॉलेज और ‘पढ़ाई’ के सपने  आजकल के छोरा-छोरी  देखते हैं, हीरो हीरोइन वैसे ही कॉलेज में पढ़ाई कम मोहब्बत  के लिए जाते हैं। दोनों हायर मिडिल क्लास के हैं, जहां रोजी-रोटी की चिंता कम ही है।

हीरोइन को सब देखते हैं, लेकिन उस पर केवल हीरो का हक़ होता है। हीरो,  हीरोइन के सामने प्यार का इज़हार करने के लिए ‘रंग-मिलान’ करता है, अरे, वही  जिसे अंग्रेज़ी में  Twinning बोलते हैं। हीरोइन ने मिंट ग्रीन पोषाक  पहनी है, तो हीरो भी उसी कलर की शर्ट मांग-मूंगकर पहन जाता है, हीरोइन कोबाल्ट ब्लू पहने तो हीरो भी गहरा चमकदार नीला धारण कर ले, हीरोइन की कुर्ती पेस्टल शेड में  हो तो  हीरो की कमीज़ भी उसी तमीज़ में! फार्मूला चल जाता है! मतलब ये थोड़े कि मेलोडी खिलाओ और जंचा दो बात!

कहानी बताना नहीं है लेकिन बताया जाये कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में छोकरा लोग अच्छा इंजीनियर बने या न बने, अच्छा फ़्रेंड ज़रूर बनता है। वहां पे हाथ उठाया नहीं जाता, हाथ पकड़ा जाता है, थामा जाता है। जहाँ तक पागलपन की बात है मोहब्बत में थोड़ा- भोत पागल होना कम्पलसरी होता ही है!

लड़की इतराते हुए पूछती है – ”कैसी लग रही हूँ?”

जवाब मिलता है -”मेरी लग रही हो.”

जानूं, गिफ्ट लाये हो क्या मेरे लिए मेलोडी वाली?

असल जिंदगी में मोहब्बत के बाद क्या होता है ?

शादी।

शादी के बाद ?

बच्चा।

बच्चे के बाद ?

कमाने धमाने का टेंशन।

इस टेंशन के बाद ?

लड़ाई झगड़ा।

लड़ाई झगड़े के बाद ?

घरवाले और पडोसी आ जाते हैं।

फिर?

अलगाव विलगाव !

उसके बाद ?

तलाक की नौबत?

फिर?

फिर क्या? कुछ भी हो सकता है। तलाक भी।  फिर दुबारा शादी  भी हो सकती है। पहली वाली फिर से आ सकती है। नहीं भी आ सकती है। क्या गाँव वाले ताजिंदगी मेलोडी खिलाने का खर्चा उठाते रहेंगे?

हर लेजेंड्री लव  स्टोरी की तरह यहाँ भी ट्रेजेडी तो होनी ही थी। फिल्म में हीरोइन का नाम चांदनी, फिल्म का नाम चांद मेरा दिल !अब भिया, चांद है तो सुरूर हो न हो  गुरूर तो  होगा ही, दूर भी होगा और नूर भी!

गज़ब की एक्टिंग की है चंकी पांडे की छोरी अनन्या ने! लक्ष्य लालवानी भी गज़ब का एक्टर निकला! ‘किल’ फिल्म में तो बेचारे को खून-खच्चर के अलावा कुछ करने को ही नहीं मिला था।

फिल्म का इमोशनल ब्रेकडाउन बोर करता है,  हीरो हीरोइन की केमिस्ट्री ऐसी है जैसे इंस्टाग्राम रील और उदास बारिश, थोड़ी सुंदर, थोड़ी ओवरड्रामेटिक, लेकिन झेलनीय ! कुछ सीन स्लो मोशन की इंस्टा स्टोरी के मानिंद हैं।

मेरी तरह जवान हो तो सिनेमाघर में देखने जा सकते हो, वरना उधर मुंडा भी नहीं घुमाना भिया !

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

ताज़ा खबरे