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पेट्रोल डीजल सीएनजी के रेट फिर बढ़े, अगले 7 दिनों में होगी और बढ़ोत्तरी

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पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में शनिवार को फिर से बढ़ोतरी हुई। इस महीने में यह तीसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है। जानकारों के मुताबिक आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इस महीने को खत्म होने में अभी एक हफ्ता बचा है।

ऐसे में संभव है कि अगले 7 दिनों में फिर से पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या एलपीजी की कीमत में बढ़ोतरी देखने को मिले। ईंधन महंगा होने से इसका आम लोगों से लेकर खास लोगों तक भी दिखाई दे रहा है। वहीं मिडिल क्लास पर भी बोझ बढ़ रहा है।

इस हफ्ते की शुरुआत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि उससे कुछ ही दिन पहले कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि देखी गई थी। केंद्र सरकार के अनुसार, इन बदलावों से पहले सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) दावा कर रही थीं कि उन्हें हर महीने करीब 1000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आखिर क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में आ रही इस तेजी की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का आसमान छूना है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 104.24 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स 97.46 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव से पहले क्रूड ऑयल 70 से 72 डॉलर प्रति बैरल पर मिल रहा था।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा आयात करता है। इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाली हलचल का सीधा असर देश की जेब पर पड़ता है।

कंपनियों पर क्या असर?

सरकारी तेल कंपनी बीपीसीएल (BPCL) ने हाल ही में कहा था कि वह फिलहाल डीजल पर प्रति लीटर 25 से 30 रुपये और पेट्रोल पर प्रति लीटर 10 से 14 रुपये का घाटा सहकर बिक्री कर रही है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निजी ईंधन खुदरा विक्रेता कंपनी शेल इंडिया (Shell India) इस समय पेट्रोल 115 रुपये प्रति लीटर से अधिक और डीजल 126 रुपये प्रति लीटर से अधिक की कीमत पर बेच रही है।

4 साल बाद बढ़ोतरी

सरकारी तेल कंपनियों ने इस महीने की पहली बढ़ोतरी 15 मई को की थी। अप्रैल 2022 यानी 4 साल के बाद यह पहली बढ़ोतरी थी। तेल कंपनियों ने अप्रैल 2022 से ईंधन की कीमतों में दैनिक मूल्य संशोधन बंद कर दिया था। यह कदम रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को बचाने के उद्देश्य से उठाया गया था ।

कंपनियों को वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही में भारी नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई उन्होंने बाद के महीनों में दरों में गिरावट आने पर कर ली। लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों को एक बार फिर बढ़ा दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है। घाटा कम करने के लिए कंपनियों ने इस महीने अभी तक 3 बार ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं।

रूसी तेल का सहारा भी कम पड़ा

पिछले दो वर्षों में भारत ने अपनी आयात लागत को नियंत्रित रखने के लिए रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी कच्चे तेल पर बहुत भरोसा किया था। लेकिन अब जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों ने महीनों तक कीमतों को स्थिर रखने के बाद आखिरकार घरेलू दामों में संशोधन करना शुरू कर दिया है।

वेनेजुएला से बढ़ी खरीदारी

भारत की तेल रणनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मई महीने में वेनेजुएला सऊदी अरब और अमेरिका को पछाड़कर भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। एनर्जी कार्गो ट्रैकर केपलर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने पश्चिम एशिया संकट के कारण सप्लाई में आ रही रुकावटों के बीच वेनेजुएला से मिलने वाले सस्ते और भारी कच्चे तेल की खरीद काफी बढ़ा दी है।

वेनेजुएला ने मई में भारत को करीब 4,17,000 बैरल प्रति दिन (bpd) कच्चे तेल की सप्लाई की।

यह आंकड़ा अप्रैल में हुई 2,83,000 बैरल प्रति दिन की सप्लाई से कहीं ज्यादा है।

इससे पहले लगातार 9 महीनों तक वेनेजुएला से भारत का तेल आयात शून्य था।

इसी साल जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दी थी, जिसका सीधा फायदा भारतीय रिफाइनरियों को मिला है।

किस देश से कितनी खरीदारी

रूस: भारत का नंबर वन तेल सप्लायर बना हुआ है। मई में करीब 1.9 मिलियन bpd की सप्लाई हुई।

संयुक्त अरब अमीरात: दूसरे स्थान पर बरकरार है।

वेनेजुएला: तीसरे स्थान पर आ गया है।

सऊदी अरब: चौथे नंबर पर आया। सऊदी अरब से भारत को होने वाली सप्लाई मई में घटकर आधी यानी 3,40,000 bpd रह गई, जो अप्रैल में 6,70,000 bpd थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी वजह सऊदी तेल की ऊंची कीमतें हैं।

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