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कानपुर में आईटीबीपी के जवानों थाना घेरा

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देश की सरहदों की हिफाजत में तैनात जवान और दूसरी तरफ उनकी मां के लिए सिस्टम की बेरुखी। कानपुर से आई यह तस्वीर संवेदनशील दिल को झकझोर कर रख देने वाली है।

आईटीबीपी का जवान अपनी मां के कटे हाथ को लेकर इंसाफ के लिए दर-दर भटकता रहा। अस्पताल की लापरवाही और फिर स्वास्थ्य व पुलिस विभाग का ढुलमुल रवैया दिखा तो मां के इंसाफ के लिए आईटीबीपी के कमांडों ने शनिवार को कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय का घेर लिया।

आईटीबीपी के कांस्टेबल विकास सिंह की मां का उपचार के दौरान हाथ कटने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट से नाराज उनके साथी जवानों ने शनिवार सुबह पुलिस आयुक्त कार्यालय घेर लिया। करीब आठ गाड़ियों में 50 से ज्यादा जवान पहुंचे। आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद और लाइजनिंग अफसर अर्पित पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल से मिलकर कार्रवाई करने को लेकर बात की।

उत्तरप्रदेश के कानपुर के महाराजपुर स्थित 32 बटालियन आइटीबीपी में तैनात कांस्टेबल विकास सिंह की मां का उपचार के दौरान हाथ कटने के मामले में सीएमओ डाक्टर हरिदत्त नेमी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट पुलिस आयुक्त को सौंप दी। हालांकि जांच रिपोर्ट में आशंकाओं के सिवा कुछ भी नहीं था। जांच रिपोर्ट की गोलमोल स्थिति को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने आख्या वापस कर दी है।

उन्होंने अनुरोध किया है कि स्वास्थ्य विभाग स्पष्ट आख्या दे कि हाथ कटने के मामले में लापरवाही हुई है या नहीं। अगर हां तो दोषी कौन है और लापरवाही किस स्तर से की गई। वहीं दूसरी ओर सीएमओ की गोलमोल रिपोर्ट को खानापूरी करार देते हुए पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री के सामने आवाज उठाने का फैसला किया है।

ये था पूरा मामला

आइटीबीपी के जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी को सांस की परेशानी पर 13 मई को टाटमिल स्थित कृष्णा हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि उपचार के दौरान उनका हाथ काला पड़ गया था, जिसमें संक्रमण फैलने की वजह से उन्हें यहां से पारस हास्पिटल में भर्ती कराना पड़ा और 17 मई को उनका हाथ काटना पड़ा था।

फिर इंसाफ के लिए पहुंचे थे पुलिस कमिश्नर के पास

20 मई को विकास अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर इंसाफ के लिए पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचा था। पुलिस आयुक्त ने प्रकरण में सीएमओ से जांच रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि सीएमओ की जांच रिपोर्ट मिल गई है। जांच रिपोर्ट में कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

संभावनाओं पर आधारित सीएमओ की जांच रिपोर्ट

पूरी जांच रिपोर्ट संभावनाओं पर आधारित है, जिसमें कहा गया है कि हाथ का इंन्फेक्शन थर्माे एम्बोलिज्म की वजह से हो सकता है। थर्माे एम्बोलिज्म का मतलब है खून का थक्का बनना। हालांकि यह स्थिति कैसे बनी, रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं है।

पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट मांगा जवाब

पुलिस आयुक्त के मुताबिक उन्होंने जांच रिपोर्ट इस अनुरोध के साथ वापस कर दी है कि विभाग मामले में स्पष्ट आख्या दे। विभाग बताए कि हाथ किन परिस्थितियों में काटना पड़ा और इसके लिए दोषी कौन है। यह भी कहा गया है कि जांच रिपोर्ट में यह भी बताएं कि आरोपितों के खिलाफ कौन से आरोप बन रहे हैं।

सीएम से मिलेंगे

पीड़ित विकास सिंह ने बताया कि वह आइटीबीपी के लाइजनिंग अफसर अर्पित के साथ शुक्रवार की सुबह पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे थे। मीडिया के माध्यम से उन्हें पता चला है कि सीएमओ की गोलमोल रिपोर्ट आई है। आइटीबीपी के लाइजनिंग अफसर अर्पित सिंह ने बताया कि वह इस गंभीर मामले को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री योगी से मिलने की कोशिश करेंगे।

यह है जांच रिपोर्ट

जांच रिपोर्ट के अनुसार गैंगरीन क्यों हुआ, हाथ क्यों काटना पड़ा, इसका कोई स्पष्ट कारण समझ में नहीं आया। गैंगरीन से जुड़े मामले में पैथोलाजी रिपोर्ट मिलने तक इंतजार करने को कहा गया है। आशंका जताई कि खून का थक्का जमने की वजह से ऐसा हुआ, मगर खून का थक्क क्यों जमे, इस पर कोई जानकारी नहीं है। रिपोर्ट में केवल एक स्थान पर यह कहा गया है कि अस्पताल प्रबंधन को इस प्रकरण में सर्जन की राय लेनी चाहिए थी, जो नहीं ली गई। आंशिक उपचार किया गया।

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