कांग्रेस ने केंद्र सरकार की ओर से 14 अगस्त को जारी जनगणना के मौजूदा फॉर्मेट को लेकर सवाल उठाए हैं।
पार्टी का कहना है कि इस तरीके से होने वाली जातीय जनगणना से देश में अलग-अलग जातियों की सही संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पता नहीं चल पाएगा। कांग्रेस ने फॉर्मेट में बदलाव की मांग की है।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि बिहार और तेलंगाना में अपनाई गई जातीय गणना की प्रक्रिया को पूरे देश में लागू किया जाए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सही आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां प्रभावी तरीके से लागू नहीं की जा सकतीं।
उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है।
कांग्रेस सांसद रमेश के मुताबिक, केंद्र सरकार के 14 अगस्त के नोटिफिकेशन में कुल 40 सवाल हैं। इनमें जाति से जुड़ा सवाल भी है, लेकिन इसे खुले जवाब (ओपन-एंडेड) के तौर पर रखा गया है। यानी व्यक्ति अपनी जाति का नाम खुद लिखेगा। कांग्रेस का कहना है कि इससे जातियों के आंकड़ों में गड़बड़ी और अलग-अलग नामों के कारण भ्रम पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि फॉर्म में बैकवर्ड क्लास यानी पिछड़ा वर्ग का स्पष्ट विकल्प तक नहीं है। ऐसे में देश में OBC आबादी का सही आंकड़ा सामने आना मुश्किल होगा। कांग्रेस चाहती है कि जातियों के नामों की पहले से तैयार सूची के आधार पर ड्रॉपडाउन या तय विकल्प दिए जाएं। इससे जनगणना करने वाले कर्मचारी भी आसानी से सही जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि बिहार और तेलंगाना में जातियों की गणना के लिए अपनाई गई पद्धति को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 2027 की जनगणना अभी देश के ज्यादातर हिस्सों में फरवरी 2027 से शुरू होनी है, इसलिए फॉर्मेट में सुधार के लिए सरकार के पास अभी समय है।
कांग्रेस ने सरकार से इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने, राज्यों और विशेषज्ञों से बात करने और जनगणना के सवालों में बदलाव करने की मांग की है। रमेश ने साफ कहा कि कांग्रेस मौजूदा फॉर्मेट में जातीय जनगणना को स्वीकार नहीं करेगी।



