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टीईटी परीक्षा आंदोलन के बाद अब शिक्षक संगठनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई

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टीईटी परीक्षा और वरिष्ठता विवाद को लेकर अप्रैल में हुए शिक्षक आंदोलन के बाद अब शिक्षक संगठनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज होती दिखाई दे रही है। आंदोलन खत्म होने के बाद शिक्षक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और दबाव की राजनीति के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले शिक्षकों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

संयुक्त मोर्चा के मुताबिक भोपाल में पदस्थ शिक्षक और संगठन के पदाधिकारी उपेंद्र कौशल को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि उपेंद्र कौशल फिलहाल जनगणना कार्य में लगे हुए हैं और इसकी जानकारी विभाग को विधिवत दी जा चुकी है। इसके बावजूद उनका अटैचमेंट समाप्त कर दिया गया और अब उनका वेतन भी रोक दिया गया है। संगठन ने इसे सीधे तौर पर द्वेषपूर्ण कार्रवाई बताया है।

शिक्षक संगठनों में प्रभाव दिखाने की होड़

मोर्चा का आरोप है कि टीईटी आंदोलन के बाद एक मान्यता प्राप्त शिक्षक संघ शासन और विभागीय अधिकारियों पर लगातार दबाव बना रहा है। संगठन का दावा है कि आंदोलन केवल एक संगठन का नहीं था, बल्कि कई शिक्षक संगठनों ने मिलकर सरकार पर दबाव बनाया था। इसके बावजूद अब कुछ लोग पूरे आंदोलन का श्रेय लेने और खुद को सबसे प्रभावशाली संगठन साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि संबंधित संगठन बड़े राजनीतिक और वैचारिक नामों का हवाला देकर अधिकारियों पर दबाव बना रहा है। मोर्चा के मुताबिक इसका असर अब विभागीय फैसलों में भी दिखाई देने लगा है और आंदोलन से जुड़े शिक्षक नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

भोपाल में सैकड़ों अटैचमेंट, कार्रवाई सिर्फ एक पर

शासकीय शिक्षक संगठन और संयुक्त मोर्चा ने विभागीय कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण करार दिया है। संगठन का कहना है कि भोपाल में अभी भी 100 से अधिक शिक्षक अलग-अलग कार्यालयों में अटैच हैं, लेकिन कार्रवाई केवल उपेंद्र कौशल पर की गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर एक ही शिक्षक नेता का वेतन क्यों रोका गया। संगठन का कहना है कि यदि विभाग वास्तव में नियमों के पालन को लेकर गंभीर है तो कार्रवाई सभी मामलों में समान रूप से होनी चाहिए। केवल एक शिक्षक पदाधिकारी पर कार्रवाई से बदले की भावना साफ दिखाई देती है।

सरकार तक पहुंचेगा मामला

संयुक्त मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षक नेताओं को प्रताड़ित करने की कार्रवाई नहीं रुकी तो मामला सीधे मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक ले जाया जाएगा। संगठन ने कहा कि जल्द ही ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की जाएगी। इसके साथ ही अधिकारियों पर दबाव बनाने और शिक्षक नेताओं को निशाना बनाने के आरोपों को लेकर संबंधित शिक्षक संघ के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की भी तैयारी की जा रही है।

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