मध्य प्रदेश के बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र में 30 बच्चों की मौत के दावे पर दायर जनहित याचिका (PIL) पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा-केवल अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर जनहित याचिका दायर करना पर्याप्त नहीं है।
कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ता को बालाघाट जाकर बैहर और बिरसा क्षेत्र की ग्राउंड रियलिटी देखना चाहिए। साथ ही उपलब्ध तथ्यों की पुष्टि करने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद ही PIL पर आगे सुनवाई होगी। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को होगी।
1 सितंबर को दायर हुई थी PIL
नरसिंहपुर के करेली निवासी अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने 1 सितंबर को जनहित याचिका दायर की थी। इसमें दावा किया गया है कि बैहर और बिरसा क्षेत्र में मलेरिया, खसरा और कुपोषण सहित बीमारियों से हाल में 30 बच्चों की मौत हुई है। याचिका में बच्चों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, 50 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। याचिका में स्वास्थ्य व्यवस्था को गंभीर बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप और आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
याचिका और स्थानीय दावों के मुताबिक, बैहर और बिरसा के आदिवासी अंचलों में पिछले करीब ढाई महीने में खसरा, मलेरिया, चर्मरोग, डायरिया और अन्य बीमारियों से 30 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है।
आदिवासी समाज ने उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष दिनेश धुर्वे ने कहा- प्रभावित क्षेत्रों में इन बीमारियों पर अब तक पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। बीमार बच्चे रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे आदिवासी इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन की सेवाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने बताया- बच्चों की मौत के पीछे कुपोषण और वैक्सीनेशन की कमी को वजह बताया। आदिवासी बच्चों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और स्वास्थ्य मंत्री की भी जवाबदारी है। आदिवासियों के कल्याण के लिए आने वाली राशि आखिर कहां जा रही है। साथ ही मृत बच्चों के परिवारों को तत्काल आर्थिक मदद देने की मांग की।
दूसरे आदिवासी क्षेत्रों से भी पहुंचे प्रतिनिधि
दिनेश धुर्वे के मुताबिक, गुरुवार के प्रदर्शन में बालाघाट के अलावा प्रदेश के अन्य आदिवासी अंचलों से भी समाज के प्रतिनिधि पहुंचे। उनका दावा है कि अब तक करीब 30 बच्चों की मौत हो चुकी है और सरकार को प्रभावित परिवारों की तत्काल मदद करनी चाहिए।
मेरा 4 साल का बेटा कुंवर लाल जुलाई में बहुत बीमार हो गया था। उसके शरीर में माता निकल आई थी और उल्टी-दस्त भी हो रहे थे। हम उसे गांव के झोलाछाप डॉक्टर के पास ले गए। हालत बिगड़ी तो चाचा उसे सालेटेकरी भी लेकर गए, लेकिन वह नहीं बच पाया।



