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कान्हा टाईगर रिजर्व में बाघों की लगातार मौत से हाईकोर्ट चिंतित

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मध्यप्रदेश के ‘कान्हा टाइगर रिजर्व’ में लगातार हो रही ‘बाघों की मौतों’ को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि बाघों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत निर्धारित सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की रोकथाम के लिए प्रभावी निवारक और उपचारात्मक कदम उठाए जाएं।

हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकारों को निर्देश दिया कि ‘कान्हा टाइगर रिजर्व’ के आसपास के क्षेत्रों में मौजूद कुत्तों को क्वारंटीन करने सहित आवश्यक जैव-सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। कोर्ट ने आदेशों के पालन की स्थिति बताने वाली स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।

दरअसल, मुंबई निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़े निर्धारित प्रोटोकॉल, रोग निगरानी, पशु चिकित्सा सेवाओं और जैव-सुरक्षा उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं किया गया। याचिका में मांग की गई कि बाघों की सुरक्षा और रोग नियंत्रण के लिए तय दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

सुब्रज चक्रवर्ती ने बाघों की मौत पर गंभीर सवाल उठाए

याचिका में बताया गया है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में हाल के महीनों में बाघों की मौतों में चिंताजनक वृद्धि हुई है। अप्रैल में बाघिन सुनैना, बाघिन अमाही और उसके चार अर्ध-वयस्क शावकों की मौत हो गई थी। इसके बाद मई में युवा नर बाघ महावीर की भी मृत्यु हुई। इन मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की आशंका जताई गई है। इसके अलावा दो अन्य वयस्क नर बाघ भी मृत पाए गए। याचिकाकर्ता के अनुसार, एक महीने के भीतर आठ बाघों की मौत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोर्ट का सख्त रूख, लापरवाही स्वीकार नहीं होगी

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, राज्य सरकार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन से जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दुर्लभ रॉयल बंगाल टाइगर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

30 दिनों में 8 बाघों की मौत, याचिका में चौंकाने वाले खुलासे

मुंबई के चेंबूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) में कान्हा टाइगर रिजर्व के डरावने आंकड़े सामने रखे गए हैं।

बाघिन सुनैना और अमाही की मौत: अप्रैल 2026 में कान्हा में बाघिन टी-122 (सुनैना) और बाघिन टी-141 (अमाही) के साथ उसके चार अर्ध-वयस्क शावकों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई।

बाघ महावीर ने भी तोड़ा दम: 19 मई 2026 को एक युवा नर बाघ टी-220 (महावीर) की भी मृत्यु हो गई।

शारीरिक कमजोरी और वायरस का लक्षण: मरने से पहले इन सभी बाघों की शारीरिक स्थिति में भारी गिरावट देखी गई थी, जिसका मुख्य कारण कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) का संदिग्ध संक्रमण माना गया है।

किसली और बालाघाट में भी मौतें: इसके अतिरिक्त दो अन्य वयस्क नर बाघ बालाघाट और किसली क्षेत्रों में मृत पाए गए।

क्यों खतरनाक है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस

‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस’ एक बेहद संक्रामक और घातक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से श्वसन, पाचन और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है। यह वायरस मूल रूप से संक्रमित कुत्तों या सियारों से बाघों और तेंदुओं में फैलता है। संक्रमित होने के बाद बाघ अपना मानसिक संतुलन खो देते हैं, इंसानों से डरना बंद कर देते हैं और बेहद कमजोर होकर दम तोड़ देते हैं। इसका कोई पुख्ता इलाज नहीं है, केवल वन्यजीवों के आसपास के कुत्तों का शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन ही एकमात्र बचाव है।

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