Sunday, May 26, 2024

क्रिया की ऐसी प्रतिक्रिया का सच

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यह सब देख और सुनकर अच्छा नहीं लग रहा। लेकिन बुरा भी महसूस नहीं हो रहा है। दीपावली (Deeepawali) के बाद दिल्ली में प्रदूषण और धुंध का कहर (Pollution and smog havoc in Delhi) एक बार फिर बरपा है। निश्चित ही यह चिंता का विषय है, लेकिन कुछ मसलों पर चिंतन की प्रक्रिया भी अनिवार्य हो गयी है। मसलन, यह सोचना होगा कि आखिर किसलिए इस साल की दीपावली के पहले ‘जमकर पटाखे चलाएं’ या ‘कृपया, आतिशबाजी (Fireworks) जरूर करें’ जैसे स्लोगन्स सोशल मीडिया (social media) पर लाइक्स और शेयर के रूप में दनादन आगे बढ़ते चले गए? ऐसा क्या हुआ कि जिस समय टीवी चैनल (TV Channel) दिल्ली के घुटते दम की बात बता रहे हैं, ठीक उसी समय सोशल मीडिया पर फटाकों (firecrackers) की बढ़ी बिक्री, उनके जलने से उठते धुंए के गुबार वाले फोटो और आतिशबाजी पर रोक संबंधी व्यवस्थाएं देने के लिए अधिकृत पद पर आसीन लोगों को धता बताने वाली पोस्टों की झड़ी लगी हुई है? लोग बढ़-चढ़कर बता रहे हैं कि उन्होंने कितने अधिक बम चलाये किस ‘बेख़ौफ़’ अंदाज़ में दीपावली मनाई। ये सभी चिंतन के विषय बन गए हैं।

दरसअल यह सब गतिविधियां उकताहट से उपजे गुस्से की प्रतीक हैं। वजह यह कि इस देश में यह कांसेप्ट थोपा जा रहा है कि प्रदूषण की वजह बम फोड़ना नहीं, बल्कि दीपावली मनाई जाना है। ऐसा साफ़ रूप से नहीं कहा जाता, लेकिन जिस तरह ये बातें कही जाती हैं, उनकी ध्वनि हिंदुओं (Hindus) के सबसे बड़े पर्व को लांछित करने वाली ही होती है। आतिशबाजी तो आर्यन खां को जमानत मिलने की खुशी में भी की गयी थी। क्रिसमस (Christmas) और नए साल पर भी बम फोड़े जाएंगे। लेकिन अदालतों की कुंडी (latch of courts) केवल दीपावली के पहले खटखटायी जाती है और उसके बाद उस दरवाजे पर अगली दीपावली तक कोई दस्तक नहीं दी जाती है। आतिशबाजी से दुखी जमात में शामिल सेलेब्रिटीज़ की भी यह पीड़ा केवल इस पर्व के लिए ही दिखती है। आमिर खान (Amir Khan), विराट कोहली (Virat Kohali) और उनकी स्वयंभू धर्मनिरपेक्ष वाली जाजम पर बैठे समान मानसिकता वाले चेहरों के तमाम सामजिक सरोकार होली से लेकर दीपावली तक ही सिमट जाते हैं। आप प्रदूषण (Pollution) से चिंतित हैं या दीपावली से, यह तो स्पष्ट करना ही होगा। और क्योंकि आज तक ये मंशा साफ़ नहीं की गयी है, इसलिए बहुत बड़ी संख्या में प्रतिक्रिया का वो सैलाब उठा, जिसका असर आज दिल्ली में दिखा है और कल सुबह के अखबारों में आप कई अन्य शहरों में भी उसका प्रभाव देखेंगे।

साल भर सूत-सूत कर मांसाहार करने वाले यह ज्ञान देते हैं कि दीपावली की आतिशबाजी के शोर तथा धुंए से कई पक्षी मर जाते हैं। एयर कंडीशनर (air conditioner) से निकली खतरनाक गैस (dangerous gas) पर्यावरण को जहरीला poisonous to the environment() बना रहे है। लेकिन दीपावली के प्रदूषण की फ़िक्र में दुबले हो रहे विराट कोहली को आप टीवी पर एक एयर कंडीशनर कंपनी का ही विज्ञापन (advertisement) करते हुए देख सकते हैं। लॉकडाउन lockdown() के समय देश के कई हिस्सों में पर्यावरण की सेहत इसलिए नहीं सुधर गयी थी कि वहां दीपावली की आतिशबाजी नहीं चलाई गयी, बल्कि ऐसा इसलिए हुआ कि उन सभी जगहों पर धुंआ उगलते वाहनों की आवाजाही बंद हो गयी थी। इसलिए यदि आप वाकई पर्यावरण के शुभचिंतक हैं तो एक दिन की आतिशबाजी का विरोध करने की बजाय रोजाना गाड़ियों के धुंए से वायुमंडल में बढ़ रहे जहर का विरोध करें। त्याग दीजिये डीजल या पेट्रोल से चलने वाला वाहन। दिखा दीजिये कि आपकी फ़िक्र एकांगी नहीं, बल्कि सबके लिए है।

अब भी समय है। अपनी क्रिया की ऐसी तीखी प्रतिक्रिया के मर्म को समझने का प्रयास करें। प्रदूषण के लिए अपने विरोध को किसी त्यौहार विशेष के खिलाफ दुष्प्रचार का जरिया न बनने दें। यदि आपको मकर संक्रांति की पतंग के मांझे से पक्षियों के घायल होने या मर जाने की फ़िक्र है तो फिर आपको यह भी करना चाहिए कि देश के कत्लगाहों में रोजाना भोजन के लिए मार डाले जा रहे करोड़ों जानवरों के हक में भी आवाज उठाएं। बूचड़खाने बंद करने की मांग करें। होली का पर्व यदि आपको पानी की बर्बादी लगता है तो फिर लीजिए शपथ कि कभी भी आप अपनी कार या कोई अन्य वाहन वाशिंग के लिए नहीं भेजेंगे।

समस्या यह है कि ऐसे लोगों की चिंता प्रायोजित होती है। उसके पीछे एक एजेंडा छिपा होता है। इसीलिये ऐसे झूठ की तुरपन अब उधड़ने लगी है और उसके भीतर छिपा नंगा सच सबको दिखने लगा है। पर्यावरण में प्रदूषण की चिंता बेशक कीजिये, लेकिन उससे पहले यह भी तो देख लीजिए कि खुद आप किस तरह से सामजिक प्रदूषण के एजेंट में तब्दील होकर रह गए हैं। वो जो सोशल मीडिया पर आतिशबाजी की तस्वीरों को गर्व से दिखा रहा है, वह प्रदूषण का पक्षधर नहीं है, वह केवल वह है जो यह जान चुका है कि आप भी पर्यावरण की स्वच्छता के पक्षधर नहीं हैं। आप मन, वचन और कर्म से एक संप्रदाय के साथ पक्षपात करने के अलावा और कुछ भी नहीं कर रहे हैं। यही आपका सच है।

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