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सुरा को लेकर साध्वी प्रज्ञा का सियासी सुर

रूमानी तबीयत वालों के बीच शराब को लेकर एक तथ्य बेहद चर्चित है। वह यह कि जिसे इश्क में मायूसी हाथ लगती है, वह...

तगड़े होमवर्क के सहारे आगे बढ़ रहे हैं डॉ. मोहन यादव

डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री के तौर पर भले ही नए हों लेकिन सार्वजनिक जीवन के अनुभवी नेता तो हैं। और खास बात यह कि इस अनुभव का ककहरा उन्होंने जमीन से जुड़े कार्यकर्ता से लेकर विधायक और मंत्री के रूप में सीखा है।

डॉ. यादव के मंत्रिमंडल में नामदार नहीं, केवल कामदारों की जरूरत

डॉ. मोहन यादव के लिए बड़ा जोखिम है। गृह विभाग उनके पास ही रहेगा। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है कि बेहद लोकप्रिय और कालांतर में चुनौती-विहीन साबित हुए शिवराज सिंह चौहान तक इस महकमे को संभालने से बचते रहे। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने यह विभाग खुद ही संभाला है और उनके इस निर्णय को राज्य में कठोर कानून-व्यवस्था से सीधे जोड़कर देखा जाता है।

क्या ‘जगह मिलने पर ही साइड दी जाएगी’ वाला मामला दोहराया जाएगा मंत्रिमंडल में ?

संगठन के प्रति निष्ठा और जातिगत राजनीति के लाभ शुभ के साथ काम की क्षमता का सर्वाधिक महत्व है, तो फिर उसे मंत्रियों के चयन में भी यही दिखाना होगा कि पार्टी में अब 'तुम मुझे सब-कुछ दो, मैं तुम्हें कुछ भी नहीं दूंगा' वाले लोगों के दिन लद चुके हैं।

फीनिक्स पक्षी की बाघ वाली यह दहाड़

मध्यप्रदेश के चुनावी नतीजों में लाड़ली बहना योजना की बड़ी भूमिका रही तो आप यह भी मानेंगे कि इस योजना के पीछे का प्रमुख फैक्टर शिवराज ही थे। यह उनकी वर्ष 2005 से इस चुनाव तक की संचित निधि रही, जिसने राज्य की महिलाओं को भविष्य में तीन हजार रुपए प्रति माह देने की बात पर विश्वास में ले लिया

ये पसंद नहीं है…. तो ये लीजिए’

विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की दूसरी सूची इसी किस्से से मिलती जुलती है। चुनाव में आप किसी को 'हमें ही वोट दो' कहकर बाध्य नहीं कर सकते, लेकिन यह माहौल तो बना ही सकते हैं कि मतदाता के पास आप से हटकर और कोई विकल्प की संभावना कम रह जाए। यूं नहीं कि प्रदेश का मतदाता शिवराज सिंह चौहान से नाखुश है। हां, ऐसे नाखुश लोगों की भाजपा में अच्छी-खासी संख्या पनप चुकी है।

कमल के लिए खाद नहीं बन सकता कर्नाटक का कीचड़

रास्ते में कीचड़ से सामना हो जाना भले ही अच्छा न लगने वाला मामला हो। काम तो उससे भी लिया जा सकता है। कीचड़...

कुलीनों के कुनबे में ऐसी कलह

दीपक जोशी के साथ कांग्रेस कार्यालय होकर आई स्वर्गीय कैलाश जोशी की तस्वीर का तो पता नहीं लेकिन जोशी जी की आत्मा को हुए...

गांधी से लेकर पटवारी तक की ये कांग्रेस

'भारत में लोकतंत्र खतरे में है।' भारत में मेरी जासूसी की जा रही है।' ब्रिटेन की जमीन पर राहुल गांधी के इन बयानों से...

किस रूप में ‘तैयार’ नहीं थे मुरलीधर राव?

ये हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का दौर है। वो भी कई मामलों में बहुत अजीब। अनेक लोग किसी शोक सभा में अपने उद्बोधन के...

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