वीडियो में कुलस्ते कहते दिखाई दे रहे हैं कि मैं तीन बार राज्यमंत्री रहा हूं। चौथी बार राज्यमंत्री बनना सही नहीं है। इसलिए मैंने साफ इनकार कर दिया। मैंने कह दिया कि कैबिनेट मंत्री बनना सही रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से बात हुई है। भविष्य में स्वतंत्र मंत्रालय को लेकर कोई विचार होगा तो मेरे बारे में सोचेंगे।' गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तीसरी बार पीएम पद की शपथ ली थी।
जीतू पटवारी ने कहा कि एक महीने में उनकी नई टीम सामने आ जाएगी। वहीं लोकसभा चुनाव में मिली हार को लेकर कांग्रेस नेताओं के सवाल उठाने पर जीतू पटवारी ने बयान दिया है। इस दौरान जीतू पटवारी ने मप्र सरकार पर हमला बोला।
मोदी ने कहा कि 100 दिन के रोडमैप को लागू करना है और पेंडिंग योजनाओं को भी पूरा करना है। उन्होंने कहा कि आपको जो विभाग मिलेगा, उसके कामों को आप जल्द से जल्द पूरा करें। अपने टारगेट की चिंता करें। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट के नए सहयोगियों से कहा कि 100 दिन एजेंडा की कार्ययोजना को जमीन पर उतारना है।
पीएम मोदी मोदी ने रविवार सुबह राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वे अटलजी की समाधि और नेशनल वॉर मेमोरियल गए। वहीं उन्होंने करीब 12 बजे पीएम आवास पर संभावित मंत्रियों के साथ चाय के साथ मीटिंग की। इस दौरान मोदी ने मंत्री पद की शपथ लेने वाले सभी को नसीहत दी है कि शपथ लेने के साथ तुरंत काम पर जुट जाए।
मोदी की नेतृत्व की असली परीक्षा अब आरंभ हुई है। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार सफलता के साथ पांच साल तक चली तो सोनिया गांधी की अगुआई में यूपीए सरकार ने दस साल तक उल्लेखनीय रूप से शासन चलाया। वाजपेयी अपनी सर्व-स्वीकार्य छवि के चलते सहयोगी दलों की गुड बुक में बने रहे और यूपीए के समय कांग्रेस राजनीति में इतनी बेअसर हो चुकी थी कि कांग्रेस तब गठबंधन वाले दलों को अपने पर हावी होने से रोकने में कामयाब नहीं हो पाई।
डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री के तौर पर भले ही नए हों लेकिन सार्वजनिक जीवन के अनुभवी नेता तो हैं। और खास बात यह कि इस अनुभव का ककहरा उन्होंने जमीन से जुड़े कार्यकर्ता से लेकर विधायक और मंत्री के रूप में सीखा है।
डॉ. मोहन यादव के लिए बड़ा जोखिम है। गृह विभाग उनके पास ही रहेगा। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है कि बेहद लोकप्रिय और कालांतर में चुनौती-विहीन साबित हुए शिवराज सिंह चौहान तक इस महकमे को संभालने से बचते रहे। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने यह विभाग खुद ही संभाला है और उनके इस निर्णय को राज्य में कठोर कानून-व्यवस्था से सीधे जोड़कर देखा जाता है।
संगठन के प्रति निष्ठा और जातिगत राजनीति के लाभ शुभ के साथ काम की क्षमता का सर्वाधिक महत्व है, तो फिर उसे मंत्रियों के चयन में भी यही दिखाना होगा कि पार्टी में अब 'तुम मुझे सब-कुछ दो, मैं तुम्हें कुछ भी नहीं दूंगा' वाले लोगों के दिन लद चुके हैं।