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प्रमोशन में आरक्षण पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इंकार

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मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में सोमवार को जबलपुर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने फिलहाल प्रमोशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अब मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच इसी सप्ताह करेगी।

सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। वे पहले आरबी राय प्रकरण में अधिवक्ता के रूप में पक्ष रख चुके हैं। वर्तमान मामला भी उसी फैसले के आधार पर आगे बढ़ रहा है। संभावित हितों के टकराव से बचने के लिए उन्होंने खुद को केस से अलग किया।

प्रमोशन पर रोक लगाने से कोर्ट का इनकार

सुनवाई के दौरान प्रमोशन पर रोक लगाने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत सुनवाई अब स्पेशल बेंच करेगी। उसी के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

इसी सप्ताह होगी स्पेशल बेंच में अहम सुनवाई

प्रमोशन में आरक्षण के मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच के समक्ष होने की संभावना है। एक्टिंग चीफ जस्टिस एक-दो दिन में स्पेशल बेंच का गठन कर सकते हैं।

माना जा रहा है कि इसी सप्ताह अंतिम बहस शुरू होगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। इस सुनवाई पर प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों की नजर है, क्योंकि अंतिम निर्णय का सीधा असर लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों पर पड़ेगा।

पिछली सुनवाई में सरकार ने समय मांगा था

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने कोर्ट को बताया था कि 13 जुलाई की सुनवाई में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह स्वयं सरकार का पक्ष रखना चाहते हैं।

उनकी अनुपलब्धता के कारण सुनवाई के लिए समय देने का अनुरोध किया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया था।

सपाक्स ने जल्द फैसला और प्रमोशन रोकने की मांग की

पिछली सुनवाई में सपाक्स (सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग कर्मचारी संस्था) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने मामले के तत्काल निराकरण की मांग की थी।

उन्होंने अदालत को बताया था कि पिछली सुनवाई में महाधिवक्ता ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया था कि अंतिम निर्णय आने तक नई प्रमोशन नीति के तहत पदोन्नति नहीं की जाएगी। जरूरत पड़ने पर पिछली सुनवाई का वीडियो रिकॉर्ड भी कोर्ट में प्रस्तुत किया जा सकता है।

लिखित आदेश नहीं, इसलिए प्रमोशन नहीं रोके जा सकते

 

अजाक्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने दलील दी थी कि कोर्ट के रिकॉर्ड में पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाने का कोई लिखित आदेश नहीं है। केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर सरकार प्रमोशन प्रक्रिया नहीं रोक सकती। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उस समय अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

विधानसभा सचिवालय के 15 प्रमोशन आदेशों पर भी विवाद

सपाक्स ने विधानसभा सचिवालय में हाल ही में जारी 15 पदोन्नति आदेशों पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। संस्था का कहना है कि जब प्रमोशन में आरक्षण का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, तब तक किसी भी विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं अपनाई जानी चाहिए।

कोर्ट ने कहा था- लंबे समय से लंबित है मामला

पिछली सुनवाई में एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की थी कि मामला लंबे समय से लंबित है। इसका जल्द अंतिम निराकरण किया जाएगा। कोर्ट ने राज्य सरकार से उस मौखिक आश्वासन पर भी स्पष्टीकरण मांगा था, जिसमें कहा गया था कि नई प्रमोशन नीति फिलहाल लागू नहीं की जाएगी।

सोमवार की सुनवाई में सरकार का जवाब आने के बाद भी प्रमोशन पर लगी रोक नहीं हटाई गई। अब सभी की नजर हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच पर है, जहां इसी सप्ताह मामले की अहम सुनवाई होने की संभावना है।

प्रमोशन के बाद 2 लाख पद होंगे खाली, भर्तियां होंगी

सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रमोशन के बाद रिक्त होने वाले पदों की जानकारी सभी विभागों से मांगी है। जिसके मुताबिक, चार लाख से अधिक कर्मचारियों को प्रमोशन दिए जाने के बाद सभी कैडर के 2 लाख पद खाली होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि अभी पदोन्नति के लिए पात्र अधिकारियों-कर्मचारियों को उच्च पदों का प्रभार दिया गया है।

इन्हें विधिवत पदोन्नति मिलने से पद रिक्त घोषित होंगे और फिर भर्ती प्रक्रिया होगी। ये चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। दरअसल, वर्तमान में सरकार का स्थापना व्यय (वेतन-भत्ते और पेंशन) कुल बजट का 27 फीसदी है। वह नई भर्ती के बाद बढ़ जाएगा। स्थापना व्यय वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है।

वर्ष 2026-27 और वर्ष 2027-28 में लगभग एक-एक लाख पदों पर भर्तियां होंगी क्योंकि मौजूदा साल में अलग-अलग समय में प्रमोशन दिए जाएंगे। वित्त विभाग ने भी इसी हिसाब से विभागों को तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। यह भर्तियां कर्मचारी चयन मंडल और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के माध्यम से कराई जाएंगी।

 

किस फॉर्मूले से भरे जाएंगे खाली पद

ऐसे कैडर जिनमें खाली पदों की संख्या 1 से 50 तक

यहां दो चरणों में भर्ती होगी। पहले साल 50% पद भरे जाएंगे। बाकी बचे 50% पद अगले साल भरे जाएंगे।

कैडर जिनमें खाली पदों की संख्या 51 से 200 तक

इनमें तीन चरणों में भर्ती होगी-

यदि पद 33% से कम हैं तो एक बार में भरे जाएंगे।

यदि 33% या उससे ज्यादा है, पर 66% से कम हैं तो तीन साल में भर्ती होगी। पहले साल 8% दूसरे साल 46% और तीसरे साल में 46% पद भरे जाएंगे।

यदि खाली पदों की संख्या 66% या उससे ज्यादा है तो पहले साल 8%, दूसरे साल 31%, तीसरे साल में 31% और चौथे साल 30% भर्ती होगी।

ऐसे कैडर जिनमें खाली पदों की संख्या 200 से ज्यादा है –

इस फॉर्मूले से होगी भर्ती-

यदि खाली पद 25% से कम हैं तो एक बार में रिक्त पदों की पूर्ति होगी।

यदि 25% या उससे अधिक हैं लेकिन 50% से कम हैं तो पहले साल 8%, दूसरे साल 46% और तीसरे साल 46% पद भरे जाएंगे।

यदि खाली पद 50% या उससे ज्यादा हैं, लेकिन 75% से कम हैं तो पहले साल 8%, दूसरे साल 31%, तीसरे साल 31% और चौथे साल 30% पदों की पूर्ति होगी।

यदि खाली पद 75% या उससे ज्यादा हैं तो पहले साल 8%, दूसरे साल 23%, तीसरे साल 23%, चौथे साल 23% और पांचवें साल में 23% पदों पर भर्ती होगी।

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