तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इस दौरान सोमवार को अन्नामलाई के एक बयान ने पार्टी छोड़ने के कयासों को और हवा दे दी है।
दरअसल, सोमवार को अन्नामलाई चेन्नई से दिल्ली के लिए जा रहे थे। उसी समय मीडिया ने उनसे इसी मुद्दे पर सवाल पूछ लिया। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि दो दिन इंतजार का कीजिए। हम दो दिनों में बैठकर बात करेंगे। हालांकि उन्होंने नई पार्टी के गठन या किसी अन्य राजनीतिक कदम को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। लेकिन उन्होंने इसे सिरे से नकारा भी नहीं।
फिलहाल भाजपा नेता के दिल्ली दौरे और उनके बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। दिल्ली दौरे को भी काफी भी अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने भाजपा नेतृत्व से मुलाकात का समय मांगा है। हालांकि बैठक का एजेंडा अभी सामने नहीं आया है।
क्या मक्कल शक्ति इयक्कम नाम से नई पार्टी बना सकते हैं अन्नामलाई?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अन्नामलाई मक्कल शक्ति इयक्कम नाम से नया राजनीतिक संगठन बना सकते हैं। एक क्षेत्रीय अखबार में भी इस तरह का दावा किया गया है। हालांकि अन्नामलाई या उनके करीबी नेताओं की तरफ से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन लगातार बढ़ रही चर्चाओं और उनकी चुप्पी ने इन कयासों को और मजबूत कर दिया है।
क्या जन्मदिन पर बड़ा एलान कर सकते हैं अन्नामलाई?
अन्नामलाई का जन्मदिन 4 जून को है। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि उसी दिन वह कोई बड़ा राजनीतिक एलान कर सकते हैं। मदुरै और कोयंबटूर में उनके समर्थकों ने बड़े-बड़े पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों में अन्नामलाई को 2.0 अवतार में दिखाया गया है। पोस्टरों में लिखा गया है कि वह नया अवतार लेकर तमिलनाडु को बचाएं। इन पोस्टरों ने राज्य में राजनीतिक चर्चा और तेज कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक अन्नामलाई भाजपा और एआईएडीएमके के गठबंधन से पूरी तरह खुश नहीं थे। कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस फैसले के बाद वह खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे। उनके समर्थकों का दावा है कि चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्हें उम्मीद के मुताबिक भूमिका नहीं मिली। इससे उनके खेमे में निराशा बढ़ गई थी।
क्या तीन भाषा नीति पर बयान से बढ़ी नाराजगी?
अन्नामलाई ने हाल ही में केंद्र की तीन भाषा नीति के खिलाफ खुलकर बयान दिया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर शिक्षा मंत्रालय से इस फैसले को वापस लेने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यह फैसला खासकर तमिलनाडु के छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा सकता है। उनके इस बयान के बाद भाजपा के भीतर उनकी नाराजगी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।
क्या तमिलनाडु की राजनीति में आने वाला है बड़ा बदलाव?
अन्नामलाई 2021 से 2025 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे और उन्होंने राज्य में पार्टी को मजबूत पहचान दिलाई। ऐसे में अगर वह अलग राजनीतिक रास्ता चुनते हैं तो इसका असर तमिलनाडु की राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है। फिलहाल सभी की नजर अगले दो दिनों और 4 जून पर टिकी हुई है, जब अन्नामलाई अपने भविष्य को लेकर बड़ा फैसला या घोषणा कर सकते हैं।



