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लखनऊ में कोचिंग हादसे के बाद मप्र में सख्ती, एक महीने के भीतर खमियां दूर करने का टारगेट

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लखनऊ में हुए कोचिंग हादसे के बाद जिम्मेदार भोपाल में भी सख्त कदम उठाने जा रहे हैं। नगर निगम अब तक 8 कोचिंग क्लॉसेस को सील कर चुका है, जबकि अगले 1 महीने के अंदर खामियों को दूर करने का टारगेट है।

इसी मुद्दे पर मंगलवार को अफसरों ने कोचिंग संचालक, हाईराइज बिल्डिंग मालिकों की बैठक की और दो टूक कहा कि कोचिंग में खामी तो कड़ी सजा मिलेगी।

अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ, उपायुक्त भुवन गुप्ता की मौजूदगी में निगम मुख्यालय पर मीटिंग हुई। अपर आयुक्त वशिष्ठ ने कहा कि बच्चों की जिंदगी से ज्यादा कुछ नहीं है। कोई कंप्रोमाइज नहीं करेंगे। खामियां दूर कर लें, वरना हम बंद कर देंगे।

अभी खामियों को सुधारने का एक मौका दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई कोचिंग क्लॉसेस ऐसी है, जहां पर फायर एग्जिट नहीं है। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो इमरजेंसी तरीके से निकला ही नहीं जा सकेगा।

एमपी नगर में कोचिंग हब

उपायुक्त गुप्ता ने कहा कि भोपाल का एमपी नगर कोचिंग का हब है। यहां अधिकांश पुरानी बिल्डिंगों में क्लॉस लग रही है, जबकि ये कोचिंग के लिए नहीं बनी है। यह मीटिंग बुलाने का मकसद सभी को फायर नॉर्म्स पूरे कराना है। सबको अपना फायर प्लान बनाना होगा, जो जल्द सबमिट कर दें। फिर इंजीनियर जांच करेंगे।

अपर आयुक्त वशिष्ठ ने कहा कि यदि आप बिल्डिंग में कंप्रोमाइज करके कोचिंग चलाना चाह रहे हैं तो ये नहीं होने देंगे। यदि कोई खामी है तो अन्य जगह कोचिंग शिफ्ट करना पड़ेगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अभी रेसीडेंशियल बिल्डिंग में कोचिंग चला रहे हैं, ये ठीक नहीं है। प्लान बनाए, यदि बिल्डिंग चेंज करना है तो चेंज करें। खामी है तो इसे नहीं मानेंगे। छोटी कोचिंग के लिए फ्लोर टू फ्लोर कनेक्शन जरूर कर सकते हैं।

इन 20 नियमों का पालन करना होगा

भवन में फिक्स फायर सिस्टम स्थापित होना अनिवार्य है।

पानी की क्षमता कम से कम 10,000 लीटर होना अनिवार्य है।

भवन में 2 स्थान पर इमरजेंसी गेट हो।

भवन में ऑटोमेटिक लॉक डोर स्थापित नहीं होना बाहिए।

बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग अथवा स्टोर के लिए किया जाए।

भवन में ऑटोमेटिक डिटेक्शन सिस्टम होना अनिवार्य है।

जिन संस्थानों को नोटिस जारी हुआ है वे अपना उत्तर 200 रुपए के ज्यूडिशियल स्टॉम्प पर प्रस्तुत करेंगे। जिसमें अग्निशमन यंत्र स्थापित करने के लिए 30 दिवस से अधिक का समय नहीं दिया जाएगा।भवन में स्थापित सभी फायर सिस्टम ऑटो मोड पर रहना अनिवार्य है।

संस्था द्वारा प्रत्येक तीन माह में मॉक ड्रिल का आयोजन/बच्चों को फायर सेफ्टी के बारे में जागरूक करेंगे।

संचालक/प्रबंधक आवश्यकता अनुसार बच्चों को फ्यूम मॉस्क उपलब्ध करा सकते हैं।

भवन का बेसमेंट यदि 200 वर्गमीटर से अधिक हो तो अनिवार्य रूप से बेसमेंट में स्प्रिग्लर्स स्थापित किए जाए।

संचालक सभी स्टॉफ को फायर एक्टिग्यूशर चलाने की ट्रेनिंग देंगे।

सिक्योरिटी गार्ड को हाईडेंट सिस्टम चलाने की ट्रेनिंग दी जाए।

भवन में एक्जिट साइन चस्पा होने चाहिए।

भवन में निर्गम एरिया में कोई भी इलेक्ट्रिक उपकरण एवं पैनल नहीं लगे होने चाहिए।

ताकि आपात स्थिति में भवन से बाहर निकलने में कोई व्यावधान उत्पन्न न हो।

फायर पंप एवं डिटेक्शन सिस्टम को डीजी सेट से बायपास लाइन से कनेक्ट करना आवश्यक है।

जिससे लाइन के कट जाने के बाद भी पंप को संचालित किया जा सके।

डीजी सेट रिफ्यूज एरिया अथवा गेट पर स्थापित नहीं होना चाहिए।

भवन से धुआं बाहर निकलने के लिए प्रकृतिक वेंटीलेशन होना आवश्यक है।

हर साल फायर ऑडिट जरूर कराए।

भवन या परिसर का इलेक्ट्रिक सेफ्टी सर्टिफिकेट सबको लेना होगा।

हर साल लेना होगा इलेक्ट्रिक सर्टिफिकेट

अधिकारियों ने कोचिंग संचालकों से कहा कि 300 से ज्यादा क्षमता वाली कोचिंग को अपनी खुद की व्यवस्था करना पड़ेगी। उन्हें हर साल इलेक्ट्रिक सर्टिफिकेट लेना होगा। कोई भी लिफ्ट इमरजेंसी नहीं है।

लिखकर दें खामी और कब तक दूर करेंगे?

अफसरों ने संचालकों से कहा, शपथ पत्र में लिखकर दें कि उनके यहां क्या खामी है और उसे कब तक दूर करेंगे? अगले 15 दिन में इन खामियों को दूर कर लें। तब तक निगम उन्हें राहत दे सकता है।

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