इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद ध्वस्तीकरण के खिलाफ दायर याचिका पर राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित की है।
हाई कोर्ट ने याची से 6.41 करोड़ रुपये से अधिक के हर्जाने की वसूली पर रोक भी लगा दी है। अदालत ने शुक्रवार को यह आदेश मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर अहमद द्वारा संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दायर याचिका पर पारित किया है।
याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने दलील दी कि दोनों अधिकारियों के आदेश बिना अधिकार क्षेत्र के हैं। संपत्ति के मालिकाना हक की सही जांच किए बिना ही बेदखली का आदेश दिया गया, जबकि अभिलेखों में वाहिद खान और याकूब खान का नाम दर्ज था। अधिकारियों ने 1956 के राजस्व रिकार्ड को यह कहकर नजरअंदाज कर दिया कि प्रविष्टियां फर्जी हैं।
राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची का रुख विरोधाभासी है। एक तरफ वह जमीन को जमींदार की बता रहे हैं और दूसरी तरफ वक्फ संपत्ति। वक्फ को समर्पित किए जाने का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिकार्ड में यह जमीन कलेक्ट्रेट कचहरी के नाम दर्ज है।
उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम के तहत सिटी मजिस्ट्रेट ने बेदखली और अवैध कब्जे के एवज में 6.41 करोड़ रुपये से अधिक का हर्जाना लगाया था। इस आदेश के खिलाफ अपील जिला जज ने दो सितंबर 2026 को खारिज कर दी थी। इसके बाद प्रशासन ने पांच सितंबर की तड़के कलेक्ट्रेट परिसर में 315 वर्ग मीटर में बनी इस मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।



