रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन कई दिनों से जारी है।
झारखंड सरकार, प्रशासन और पुलिस ने साम, दाम, दंड और भेद की पूरी रणनीति अपनाई। संवाद से समाधान का प्रयास लगातार जारी है।
कई दौर की वार्ताएं, परीक्षाएं रद्द करने के ऐलान, जांच के वादे और लाठीचार्ज के बावजूद आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा।
स्टेडियम की बिजली काटने, एफआईआर के बावजूद आखिर क्यों नहीं खत्म हो पा रहा यह आंदोलन? जानिए पांच प्रमुख कारण।
- मुख्य मांगें अभी भी अधूरी
सरकार का दावा है कि उसने छात्रों की 98% मांगें मान ली हैं (जैसे 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करना, कुछ बैकलॉग परीक्षाएं रद्द करना, ED जांच का प्रस्ताव आदि)। लेकिन छात्र सीबीआई जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। जब तक ये दो सबसे महत्वपूर्ण मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन वापस लेने से इनकार कर रहे हैं।
- गहरे अविश्वास और सिस्टम सुधार की जिद
छात्रों को राज्य की सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है। वे मानते हैं कि राज्य एजेंसियों से निष्पक्ष जांच संभव नहीं, इसलिए स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी सीबीआई या बाहर के जजों की पैनल की मांग कर रहे हैं। यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में स्थायी पारदर्शिता और भ्रष्टाचार खत्म करने की लड़ाई बन गई है।
- अनशन और मजबूत संकल्प
कई छात्र (जिनमें देवेंद्रनाथ महतो जैसे नेता शामिल) लंबे समय से आमरण अनशन पर हैं। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद वे पीछे नहीं हट रहे। यह दृढ़ता बाकी अभ्यर्थियों का मनोबल बढ़ा रही है और आंदोलन को जीवित रखे हुए है।
- पुलिस कार्रवाई ने गुस्सा और बढ़ाया
विधानसभा मार्च के दौरान लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल ने छात्रों में और आक्रोश पैदा किया। कई घायल हुए, लेकिन इससे आंदोलन कमजोर होने के बजाय और मजबूत हुआ। छात्र कह रहे हैं कि दबाव से वे नहीं झुकेंगे।
- रोजगार और भविष्य का सवाल, व्यापक समर्थन
अधिकांश अभ्यर्थी सालों से तैयारी कर रहे हैं। उनके पास पीछे हटने का विकल्प नहीं है क्योंकि उम्र सीमा और परिवार का निवेश दांव पर है। पूरे राज्य से छात्र जुट रहे हैं, सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक समर्थन भी आंदोलन को ऊर्जा दे रहा है।
वरिष्ठ पत्रकार राकेश परिहार बताते हैं, सरकार ने कई रियायतें दी हैं, वार्ताएं कीं और बल प्रयोग भी किया, लेकिन जब तक CBI जांच जैसी मुख्य मांगें पूरी नहीं होतीं और छात्रों का भरोसा नहीं जीता जाता, आंदोलन थमने वाला नहीं है।
छात्रों के लिए यह अब सिर्फ परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि रोजगार और सिस्टम सुधार की जिद्दी लड़ाई बन चुका है। इसमें भी कोई संदेह नहीं कि परदे के पीछे राजनीतिक दल भी हैं।



