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सीबीएसई के अध्यक्ष और सचिव हटाए गए, ओएसएम टेंडर घोटाले की जांच एक सदस्यीय कमेटी करेगी

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ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) के जरिए बारहवीं के छात्रों के कराए गए मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों को लेकर विवादों में घिरे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के खिलाफ सरकार मंगलवार को एक्शन में दिखी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है जबकि ओएसएम से जुडे टेंडर मामले की जांच के लिए भी एक सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। जिसका जिम्मा कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की अध्यक्ष एस. राधा चौहान को सौंपा गया है। जिन्हें एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को रिपोर्ट देनी होगी।

CBSE चेयरमैन और सचिव का तबादला

सूत्रों के मुताबिक, पीएमओ ने पहले ही ओएसएम के जरिए कराए गए मूल्यांकन से जुड़ी गड़बड़ी पर एक रिपोर्ट भी मांगी थी। जो सोमवार को देर रात ही पीएमओ को दी गई थी। इस रिपोर्ट के बाद ही यह संकेत मिलने लगे थे, कि जल्द ही इनमें दोषियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

असली दोषी की पहचान तो जांच के बाद होगी लेकिन सीबीएसई चेयरमैन और सचिव को अब कोई राहत न देने का फैसला हुआ। वैसे भी फिलहाल वही इस पूरी खामी के लिए चेहरा बने हुए थे। सूत्रों की मानें तो पीएमओ इस बात से भी सीबीएसई से नाराज था, कि वह गड़बड़ियों के सामने आने के बाद भी उसे ठीक करने में फेल रहा है। छात्रों को परेशान होना पड़ रहा है।

OSM से जुड़े टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए कमेटी का एलान

पहले पुर्नमूल्यांकन का फैसला लेने में देरी और जब पुनर्मूल्यांकन के लिए बाद में उनका पूरा सिस्टम भी फेल हो गया था। सीबीएसई से जुड़ी गड़बड़ियों पर पहली कार्रवाई मंगलवार को कैबिनेट सचिवालय की ओर से की गई है। जिसमें ओएसएम मूल्यांकन से जुड़े टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी का एलान किया।

एस. राधा चौहान को सौंपा कमेटी का जिम्मा

साथ ही जांच कमेटी का जिम्मा कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की अध्यक्ष एस राधा चौहान को सौंपी गया। कैबिनेट सचिवालय के अतिरिक्त सचिव ( कैबिनेट) सत्येंद्र सिंह ने जांच का आदेश जारी करते हुए कमेटी से एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को सौंपने के लिए कहा है। वहीं कमेटी को यह अधिकार दिया है, वह अपनी पसंद के किसी भी अधिकारी को अपने साथ नियुक्ति कर सकती है।

सूत्रों का दावा है कि एस राधा चौहान कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कुछ और लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

12वीं के रिजल्ट आने के बाद शुरू हुआ विवाद

गौरतलब है कि सीबीएसई की मूल्यांकन से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर यह पूरा विवाद 13 मई को बारहवीं कक्षा का रिजल्ट आने के साथ ही खड़ा हो गया था। छात्रों ने इस दौरान कम अंक मिलने की शिकायत की। जिसे पहले सीबीएसई ने अनसुना कर दिया लेकिन जब यह तूल पकड़ा तो सीबीएसई ने पुर्नमूल्यांकन और कॉपियों को मुहैया कराने का फैसला लिया।

हालांकि इस दौरान कुछ छात्रों को जो कॉपियां मुहैया कराई थी, वह उनके बजाय किसी दूसरी की दे दी गई थी। छात्रों की आपत्ति के बाद गड़बड़ियों ने और तूल पकड़ा। जो अभी तक जारी है।

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