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भाजपा विधायक ने डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना दोस्त बताया

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मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। अब एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना दोस्त बताया है। विधायक ने कहा है कि वह सुख-दुख में हमारा साथी रहा है। हमने कई बार जंगलों में जाकर उससे मुलाकात की। जिस डकैत का नाम प्रीतम लोधी शान से ले रहे हैं, वह कभी ग्वालियर चंबल के लिए टेरर था। उसके नाम से लोग थर्राते थे। आइए आपको बताते हैं कि खूंखार डकैत रामबाबू गड़रिया कौन था।

कौन है रामबाबू गड़रिया

दरअसल, ग्वालियर-चंबल इलाके में रामबाबू गड़रिया का एक समय में ऐसा दहशत था कि उसकी आहट से लोग घरों में दुबक जाते थे। पुलिस को रामबाबू और उसका भाई सरेआम चुनौती देता था। मगर पुलिस कुछ कर नहीं पाती थी। वह ग्वालियर जिले के हरसी गांव का रहने वाला था। हरसी ग्वालियर जिला मुख्यालय से 90 किमी दूर स्थित है। विवाद के बाद रामबाबू और उसके परिवार के लोगों ने 1999 में गांव छोड़ दिया था।

रामबाबू गड़रिया का पुलिस ने तीन बार किया एनकाउंटर

रामबाबू का पूरा गैंग ग्वालियर-चंबल के इलाके में सक्रिय था। वह जंगलों में रहता था। अपने खिलाफ अवाज उठाने वाले या मुखबिरी करने वालों को वह मौत की सजा देता था। उसका आतंक उस इलाके में इतना बढ़ गया था कि पुलिस के टारगेट नंबर वन में शामिल था। 8 जनवरी 1999 को पुलिस ने पहली बार दावा किया कि हमने रामबाबू गड़रिया का एनकाउंटर दिया है। पुलिस को इसके लिए खूब वाहवाही मिली।

इस मामले में टर्निंग प्वाइंट तब आया, तब 4-5 महीने बाद रामबाबू गड़रिया ने अपने भाई दयाराम, गोपाल और प्रताप के साथ सरेंडर कर दिया। साथ ही पुलिस झूठी साबित हुई और रामबाबू जिंदा निकला। सरेंडर करने के कुछ दिनों बाद ही सभी भाई पुलिस की कस्टडी से फरार हो गए।

जनवरी 2007 में पुलिस का फिर खोड़ के जंगल में रामबाबू गड़रिया के गिरोह से सामाना हुआ है। दोनों तरफ से फायरिंग हुई और पुलिस ने दावा किया कि हमने रामबाबू गड़रिया को मार दिया है। इसके बाद लोगों ने राहत की सांग ली। लेकिन यह भी कुछ दिनों की खुशी थी। बाद में पता चला कि वह जिंदा है।

अप्रैल 2007 में फिर हुआ एनकाउंटर

अप्रैल 2007 में फिर शिवपुरी पुलिस ने रामबाबू गड़रिया की घेराबंदी की। दोनों ओर से गोलियां चलीं और कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया ढेर हो गया। रामबाबू के शव के शिनाख्त पुलिस ने उसके परिजनों से कराई थी। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके साथ ही उसके इलाके में रामबाबू गड़रिया का आतंक खत्म हो गया।

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