23.1 C
Bhopal

बैंकिंग सिस्टम के नियम आम लोगों पर बोझ बनने लगे हैं

प्रमुख खबरे

आम आदमी को बैंकों की सेवाएं उपलब्ध कराने और उसको बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन बैंकिंग सिस्टम में कुछ नियम आम लोगों पर बोझ बनते नजर आ रहे हैं। खासकर न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाली पेनल्टी को लेकर बहस तेज हो गई है।

मंगलवार को संसद के बजट सत्र में राघव चड्ढा ने खुलासा किया कि बैंकों ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में करीब 19,000 करोड़ रुपये केवल इस पेनल्टी के रूप में वसूले हैं।

न्यूनतम बैलेंस पेनल्टी के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

चड्ढा ने लोकसभा में सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान बैंकों ने कुल 19,000 करोड़ रुपये न्यूनतम बैलेंस पेनल्टी के रूप में जुटाए। उन्होंने कहा कि यह राशि उन खाताधारकों से ली गई, जो निर्धारित न्यूनतम राशि बनाए रखने में असमर्थ रहे।

उनके अनुसार, यह सिस्टम गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालता है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर है, जहां लोगों को 1,000 से 3,000 रुपये तक न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना पड़ता है।

गरीब खाताधारकों की बचत पर सीधा असर

चड्ढा ने अपने भाषण में एक उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक गरीब व्यक्ति महीनों की मेहनत से 6,000 रुपये जमा करता है, लेकिन किसी आपात स्थिति में पैसे निकालने के बाद वह न्यूनतम बैलेंस बनाए नहीं रख पाता। इसके बाद बैंक हर महीने 50 से 600 रुपये तक की पेनल्टी वसूलते हैं।

पेनल्टी नियमों का हटना जरूरी

आम आदमी पार्टी के सांसद चड्ढा ने सरकार से अपील की कि न्यूनतम बैलेंस पेनल्टी को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि देश में अधिक लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना है, तो ऐसे नियमों को हटाना जरूरी है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिस तरह किसानों के कर्ज माफ किए जाते हैं, उसी तरह बैंक चार्ज और एमएबी पेनल्टी को भी खत्म किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे गरीब वर्ग को राहत मिलेगी और आम आदमी को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद मिलेगी।

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

ताज़ा खबरे