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आवारा कुत्तों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, बोला इतने आवेदन इंसानों के भी नहीं आते

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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में समक्ष दायर किये जा रहे अंतरिम आवेदनों की संख्या पर संज्ञान लिया और कहा कि आमतौर पर इनसानों से जुड़े मामलों में भी इतनी अधिक संख्या में आवेदन नहीं आते हैं।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने ये टिप्पणियां तब कीं जब दो अधिवक्ताओं ने उनके समक्ष आवारा कुत्तों का मामला उठाया।

एक अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने इस मामले में एक अंतरिम याचिका दायर की है। इस पर न्यायमूर्ति मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘इनसानों से जुड़े मामलों में भी आमतौर पर इतनी अधिक संख्या में याचिकाएं नहीं आतीं।’’

दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान एक वकील के बयान पर बड़ी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता वंदना जैन की एक दलील पर टिप्पणी की, ‘जब हम पशु प्रेमियों की बात करते हैं, तो इसमें सभी जानवर शामिल होते हैं। मैं अपने घर में कोई जानवर रखना चाहता हूं या नहीं, यह मेरा विवेक है।’

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘यही बात गेटेड कम्युनिटी पर भी लागू होती है। गेटेड कम्युनिटी में कुत्ते को घूमने देना चाहिए या नहीं, यह समुदाय को तय करना होगा। मान लीजिए, 90 प्रतिशत निवासियों को लगता है कि यह बच्चों के लिए खतरनाक होगा, लेकिन 10 फीसदी कुत्ते रखने पर जोर देते हैं।

कोई कल भैंस ला सकता है। वे कह सकते हैं कि मुझे भैंस का दूध चाहिए।’ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारी की तीन-न्यायाधीशों वाली विशेष पीठ बुधवार को इस मामले की सुनवाई करेगी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारी की तीन-न्यायाधीशों वाली विशेष पीठ बुधवार को इस मामले की सुनवाई करेगी।

शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में ‘चिंताजनक वृद्धि’ को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल सात नवंबर को आवारा कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।

न्यायालय ने यह भी कहा कि इस प्रकार पकड़े गए आवारा कुत्तों को उस स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

न्यायालय ने अधिकारियों को राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने कहा कि खेल परिसरों सहित संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं की पुनरावृत्ति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि इन परिसरों को रोके जा सकने वाले खतरों से सुरक्षित करने में ‘प्रणालीगत विफलता’ को भी उजागर करती है।

न्यायालय ने आवारा कुत्तों के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कई निर्देश जारी किए थे। यह न्यायालय राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से, विशेष रूप से बच्चों में, रेबीज फैलने की मीडिया रिपोर्ट के संबंध में पिछले साल 28 जुलाई को शुरू किए गए स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है।

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