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भागीरथपुरा में दूषित पानी से 14 वीं मौत, 2456 मरीजों की पहचान, 26 गंभीर

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देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा बार-बार हासिल करने वाले इंदौर में दूषित पानी का कहर भयावह रूप ले चुका है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

ताजा मामला 43 वर्षीय अरविंद, पिता हीरालाल, निवासी कुलकर्णी भट्टा का है, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

क्षेत्र में बीमार लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक 2456 मरीजों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से 162 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 26 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

गुरुवार सुबह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चार मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक प्रदान किए।

भागीरथपुरा के घरों से रोज नए मरीज सामने आ रहे हैं। शहर के 14 सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज जारी है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के चाचा नेहरू अस्पताल में 11 बच्चे भर्ती हैं, जिनमें से पांच बच्चों को बुधवार को हालत बिगड़ने पर भर्ती किया गया।

इन बच्चों में एक माह की बच्ची से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं, जिससे हालात की गंभीरता और बढ़ गई है।

हालात की गंभीरता के बावजूद प्रशासन केवल चार मौतों की आधिकारिक पुष्टि कर रहा है। इससे नाराजगी बढ़ रही है, क्योंकि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनका आरोप है कि न तो उन्हें किसी तरह की सहायता मिली और न ही प्रशासन की कोई टीम उनसे हालचाल लेने पहुंची।

भागीरथपुरा से लगे अन्य इलाकों में संक्रमण फैलने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 21 टीमें गठित की हैं। इनमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा 11 एंबुलेंस भी तैनात की गई हैं। निजी अस्पतालों में समन्वय के लिए स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों के साथ राजस्व अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। अब तक 7992 घरों का सर्वे किया जा चुका है।

यह पहला मौका नहीं है जब इंदौर में दूषित पानी से जनस्वास्थ्य संकट खड़ा हुआ हो। जुलाई 2023 में क्लर्क कॉलोनी और सुभाष नगर क्षेत्र में हैजा फैल चुका है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। उस समय जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला की जांच में पानी के नमूनों में बैक्टीरिया और अन्य प्रदूषक पाए गए थे, जिनमें एक बैक्टीरिया हैजा का कारण बना था। तब भी स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम को घर-घर सर्वे करना पड़ा था।

भागीरथपुरा की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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