Wednesday, May 22, 2024

बिगड़े हालातों को काबू में करने की सफल कोशिश करते शिवराज

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कोरोना (Corona) की दूसरी और पहले से ज्यादा भयावह लहर में परिस्थितियां हाथ से निकली हुर्इं हैं। बात किसी एक राज्य की नहीं, पूरे देश की है। अब अगर कोविड संक्रमितों (Covid infected) का आंकड़ा देश में साढ़े तीन लाख रोज तक जा पहुंचा हैं तो व्यवस्थाओं का गड़बड़ना स्वाभाविक सी बात है। ऊपर से देश के राजनीतिक (Political) और प्रशासन तंत्र (Administration system) की लापरवाही सामने दिख रही हो। दुनिया के तमाम देशों में कोरोना की दूसरी लहर (Second wave) जब कहर मचा रही थी, तभी देश को सावधान और सतर्क होकर तैयारियां करनी चाहिए थी। लेकिन राजनीतिक तंत्र चुनावों और दीगर राजनीति में व्यस्त हो गया और प्रशासनिक तंत्र पता नहीं क्या करता रहा। नतीजा, पूरा देश भुगत रहा है। कोरोना पीड़ितों (Corona sufferers) की सांसे उखड़ रही है। रेमेडिसिविर इंजेक्शन (Remedisive injection) कितना जरूरी है या नहीं, ये अलग बहस का विषय हो सकता है लेकिन जिन्हें जरूरत हैं, उन्हें मिल नहीं रहा है या फिर मिल रहा है तो समय पर नहीं मिल रहा है। लिहाजा चौतरफा हाहाकार मचा हुआ है। महाराष्ट्र से लेकर मध्यप्रदेश तक, सभी जगह स्थिति एक सी।

मध्यप्रदेश में भी हाहाकार मचा है। लेकिन देश और दूसरे राज्यों की तुलना में कह सकते हैं कि इधर का मुख्यमंत्री थोड़ा जज्बाती और जूनून की हद तक लड़ने और प्रयास करने वाला शख्स है। तो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को भी यह पता है कि परिस्थितियां हाथ से निकलती जा रही हैं। पूरी कोशिश केवल बिगड़ते हालात पर काबू पाने के अलावा और किसी दूसरे रास्ते की नहीं है। तो इसके लिए आप शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) की तारीफ कर सकते हैं बिना आलोचनाओं की परवाह किए, बिना हिम्मत हारे वे उन तमाम प्रयासों को करने में जुटे हैं जो बिगड़ी बात बना दें। अतीत के कई राजा प्रजा की सेवा के लिए सारा जीवन खपा देते थे। राज्य में किसी आपदा के आने पर वे स्वयं की चिंता किये बगैर आवाम की सेवा में जुटे जाते थे। निश्चित ही यह अति-जज्बाती होने की निशानी है। किन्तु यदि इसी प्रवृत्ति में ठोस और सुस्पष्ट तैयारी वाला भी पुट हो तो शासक के ऐसे प्रयास सफल होने में संदेह नहीं रह जाता। मध्यप्रदेश (Madhya pradesh) में इस समय बस यही हो रहा है। वह वर्तमान, जिसे यदि बीते हुए कुछ दिनों की तुलना में देखें तो साफ कहा जा सकता है कि देश के ह्रदय प्रदेश में शिवराज परिस्थितियों पर काबू पाने के हर वो प्रयास कर रहे हैं जो किए जा सकते हैं। आलोचना करना तो लिखने वालों का शाश्वत काम हैं लेकिन आपदा के इस काल में यदि शासक भी जो कुछ अच्छा कर रहा हो, उसे सामने तो लाना ही चाहिए।





कोविड-19 (COVID-19) के बिगड़े हालातों में पूरी तरह नियंत्रण तो दूर, उसके मामले कम करने तक में अधिकांश सरकारों को सफलता नहीं मिल पा रही है। तमाम विकसित राष्ट भी इस संक्रमण (Infection) के आगे असहाय हैं। ऐसे में यही विकल्प बचता है कि उपलब्ध संसाधनों का इस परिस्थिति से निपटने के लिए अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाए। यह बात निश्चित ही सुने में अव्यवहारिक लग सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसे वाकई व्यावहारिक रूप से धरातल पर उतारने की कोशिश में लगे हैं। शिवराज सिंह चौहान की सबसे आपदा के इस काल में सबसे अच्छा काम यह किया कि उन्होंने कोरोना से जुड़ी परेशानियों का श्रम-विभाजन की तर्ज पर निदान तलाशा। मसलन, मरीजों की संख्या बढ़ने पर यहां 6000 बिस्तर का देश का सबसे बड़ा दूसरा कोविड केयर सेंटर (Covid Care Center) तैयार कर दिया गया। देश में कोरोना काल में यह अपनी तरह का दूसरा बड़ा अस्पताल होगा। दस हजार बिस्तर का बड़ा कोविड केयर सेंटर दिल्ली में बनाया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश वह पहला राज्य भी बन गया, जहां रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सहयोग से एक हजार बिस्तर वाला कोविंड केयर सेंटर खड़ा कर दिया गया। यह भी देश में पहली बार मध्यप्रदेश में ही हुआ कि यहां मरीजों के लिये रेलवे ने 20 कोच का आइसोलेशन रैक (Isolation rack) तैयार किया है। साथ ही यहां सेना के अस्पतालों को भी सरकार की कोशिशो से आम जनता के लिए खोल दिया गया है।

सबसे कठिन मोर्चा मेडिकल आॅक्सीजन (Medical oxygen) की कमी से निपटने का है। वह प्राणदायी वायु, जिसके नहीं मिलने से देश में कोरोना के कई मरीज रोज दम तोड़ दे रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले तो केंद्र सरकार से सुझाव के रूप में अनुरोध किया कि देश में आॅक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेन चलाई जाएं। नतीजा यह कि आज रेलवे की मदद से देश-भर में मेडिकल आॅक्सीजन की उपलब्धता कराई जा रही है। लेकिन मामला और इमरजेंसी वाला था। मध्यप्रदेश में मरीजों की संख्या के लिहाज से आॅक्सीजन की बहुत अधिक उपलब्धता की जरूरत है। इसलिए शिवराज सिंह चौहान ने वायु सेना के विमान की मदद से गुजरात से आॅक्सीजन टैंकरों की खेप राज्य में बुलवाई। प्रदेश के पांच बड़े जिला चिकित्सालयों में वीपीएसए तकनीकी (VPSA Technical) पर आॅक्सीजन प्लांट लगाकर भी कोरोना पीड़ितों की बड़ी मदद का प्रबंध रातों रात किया गया। चाहे तो इस बात के लिए सरकार को कोसा जा सकता है कि आक्सीजन के यह प्लांट उस दौर में क्यों तैयार नहीं हुए, जब परिस्थितियां एक तरह से काबू में आ चुकीं थी। लेकिन यहां परिस्थितियां अब बिगड़ी का बनाने के अलावा कुछ और नहीं हो सकती थी।





लिहाजा, हेलीकॉप्टर और विमान की मदद से ही राज्य में रेमडेसिविर इंजेक्शन भी मंगवाए गए ताकि उनकी कमी न होने पाए। और ये बता दें कि आॅक्सीजन एक्सप्रेस के लिए सुझाव देने सहित ऊपर बताये गए सभी काम करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है। शिवराज सिंह चौहान ने देश-भर में एक और नवाचार कायम करते हुए मंत्रिमंडल के प्रत्येक सदस्य को कोविड का संक्रमण रोकने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां दी हैं। यह चौहान की ही कोशिशें हैं कि देश में पहली बार मध्यप्रदेश में फिक्की के सहयोग से कोरोना के दौर में आर्थिक गतिविधियों का सफल संचालन किया गया। देर आए दुरूस्त आएं की तर्ज पर इस महामारी से निपटने हेतु ‘योग से निरोग’ कार्यक्रम का नवाचार भी शुरू किया गया।

मुख्यमंत्री शिवराज की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने हिम्मत हारने की बजाय कोरोना से निपटने के काम में किसी भी तरह की कमी या ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया। इस दिशा में किए गए कई सारे अच्छे कामों के कोरोना के खिलाफ सरकार की सफलताओं का बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में यदि कोरोना के एक्टिव मामलों (Active cases) की संख्या 4, 99, 304 रही, वहीं इससे ठीक होने वालों की संख्या भी 4, 02, 623 है। इसी तरह मरीजों की जो रिकवरी दर (Recovery rate) 23 अप्रैल, 2021 को 80. 41 प्रतिशत थी, वह आने वाले केवल दो दिन में बढ़कर 80. 64 फीसदी गई गयी है। स्थिति का एक और आशाजनक पक्ष है। इसी 22 अप्रैल को कोरोना के मामलों का पाजिटिविटी रेट (Pajitivity rate) 24. 29 फीसदी था, जो मात्र तीन दिन में घटकर 23. 01 प्रतिशत हो गया। यानी कोरोना के बेकाबू स्वरूप के बीच शिवराज सिंह चौहान की कोशिशों से जहां ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं नए केस भी अब घटने लगे हैं। ये बात देशव्यापी आंकड़ों से भी समझी जा सकती है।

 

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अभी 21 अप्रैल को कोरोना के एक्टिव केस (Active case) के मामले में मध्यप्रदेश देश में सातवें स्थान पर था और आज (महज तीन दिन बाद) राज्य दसवें स्थान पर पहुँच गया है। यानी इस महामारी से निपटने के शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) के प्रयासों को सफलता मिलती दिख रही है। इस सबके बीच बहुत बड़ी कामयाबी यह भी कि मध्यप्रदेश के 16 जिलों में कोरोना के नए मामलों की तुलना में रिकवरी रेट में तेजी से वृद्धि हुई है। निश्चित ही शिवराज सिंह चौहान जिस जूनूनी अंदाज में कोरोना से लड़ाई के लिए तंत्र का नेतृत्व कर रहे हैं वो कोविड-19 (Covid-19) से निपटने के प्रयासों को सफलता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि कोरोना से बिगड़ी परिस्थितियों को जल्दी ही काबू में किया जा सकेगा। तो सरकार जो भी कर सकती है, वो कर रही है बाकी जिम्मेदारी जनता की है जिसे अभी लंबे समय तक कोरोना प्रोटोकाल का पालन करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार रहना होगा।

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