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रूक सकती है, रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी

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अगर आप भी रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की सब्सिडी को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया है।

अब देशभर में लाखों उपभोक्ताओं के बैंक खातों में आने वाली सब्सिडी रुकने वाली है, और कई फर्जी या निष्क्रिय कनेक्शनों पर हमेशा के लिए ताला लगने जा रहा है।

10 लाख से ज्यादा आय? तो भूल जाइए सब्सिडी

केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं की वार्षिक सकल कर योग्य आय 10 लाख रुपये या उससे अधिक है, उन्हें अब ‘उच्च आय वर्ग’ माना जाएगा।

ऐसे संपन्न लोग अब सब्सिडी वाले सस्ते गैस सिलेंडर के हकदार नहीं होंगे। तेल कंपनियों ने आयकर विभाग के साथ मिलकर ऐसे सक्षम लोगों का डाटा तैयार कर लिया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि अकेले राजस्थान के कोटा जिले में ही करीब 40 हजार उपभोक्ता इस दायरे में आते दिख रहे हैं। इनमें बड़े उद्यमी और व्यापारियों के साथ-साथ उच्च पदों पर बैठे सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं।

फर्जीवाड़ा और मृतकों के नाम पर चल रहे कनेक्शन

सरकार का अगला निशाना वे गैस कनेक्शन हैं जो या तो फर्जी दस्तावेजों पर चल रहे हैं या उन लोगों के नाम पर हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है। तेल विपणन कंपनियां आधार डेटाबेस के जरिए ऐसे खातों की पहचान कर रही हैं। यदि किसी मृत व्यक्ति के नाम पर अभी भी गैस ली जा रही है, तो परिवार को 30 दिनों के भीतर वह कनेक्शन किसी पात्र सदस्य के नाम ट्रांसफर करवाना होगा। ऐसा न करने पर गैस कनेक्शन को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा।

मोबाइल पर आ रहे हैं मैसेज, 7 दिन का है समय

अगर आपको भी अपनी पात्रता को लेकर कोई संदेह है, तो अपने मोबाइल का इनबॉक्स जरूर चेक करें। तेल कंपनियां चिन्हित उपभोक्ताओं को लगातार मैसेज भेज रही हैं। यदि आपको लगता है कि आप पात्र हैं और गलती से आपकी सब्सिडी काटी जा रही है, तो आपके पास केवल 7 दिनों का समय है। आप टोल-फ्री नंबर 1800-2333-555 पर कॉल कर सकते हैं या कंपनी के आधिकारिक पोर्टल पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

सिस्टम में पारदर्शिता लाने की कवायद

कोटा एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि कंपनियों की ओर से ऑनलाइन लिंक भेजकर जानकारी मांगी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सब्सिडी का लाभ केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचाना है जो वास्तव में इसके पात्र हैं, जैसे उज्ज्वला योजना के लाभार्थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग। इस अभियान के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाला सब्सिडी का बोझ कम होगा और रसोई गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी।

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