Sunday, May 26, 2024

क्या महज साधारण मामला है यह

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बारह ज्योर्तिलिंगों (barah jyortilingon) में से एक उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple of Ujjain) में किसी धर्म विशेष के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है। लेकिन यदि कोई फर्जी तरीके से नाम बदल कर प्रवेश करने की कोशिश करेगा तो क्या इसे साधारण घटनाक्रम मान लिया जाए? महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) में हिंदू युवक (Hindu youth) की फर्जी आईडी (fake ID) से प्रवेश करने वाले यूनुस मुल्ला (Yunus Mulla) का मामला उतना सीधा नहीं दिखता, जितना दिखाया जा रहा है। उज्जैन की कांग्रेस नेत्री नूरी खान (Congress leader of Ujjain Noori Khan) कुछ समय पहले एक वीडियो (Video) में शिव तांडव स्त्रोत (shiv tandav strot) पर तांडव करती दिख रही थीं। अब नूरी यूनुस के पक्ष में खड़ी हो गयी हैं। उनका कहना है कि मंदिर में किसी मुस्लिम (Muslim) के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है। तो नूरी को यह भी बताना चाहिए कि जब मुस्लिम के वहां आने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है तो फिर यूनुस को क्या जरूरत पड़ी कि वह फर्जी परिचय के जरिये वहां गया? यह शख्स इससे पहले इसी गलत तरीके से काशी-विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) में भी घुस चुका है।

मामला श्रद्धा का हो तो भी तरीका ए वारदात आशंका उत्पन्न करती है। आप किसी भी धर्म के हों, यदि आप शिव जी (shiv jee) के इतने ही बड़े भक्त हैं तो किसने रोका है कि आप इस बात को अपने वास्तविक नाम के साथ सार्वजनिक ना करें? यूनुस को मुंबई (Mambai) की लहंगा व्यवसायी खुशबू यादव (Khushboo Yadav) अपने साथ लाई थीं। गौरतलब बात यह कि इस जोड़े ने होटल (hotel) में रुकने के लिए यूनुस की पहचान नहीं छिपाई। यही वजह रही कि यूनुस को होटल में खुशबू के साथ रुकने की अनुमति नही दी गयी। यूनुस होटल में बाहर ही रहा। तो फिर ऐसी क्या जरूरत आ पड़ी थी कि यह शख्स मंदिर के बाहर नहीं रुक सका? क्यों वह भीतर जाने के लिए इतना आमादा था कि इसके लिए अपराध करने से भी नहीं चूका?

काशी-विश्वनाथ (Kashi-Viswanath) और महाकाल (Mahakala) से लेकर देश के तमाम प्रसिद्ध मंदिर विघ्न संतोषियों (vighn santoshiyon) के निशाने पर लंबे समय से हैं। अक्षरधाम मंदिर (Akshardham Temple) से लेकर अयोध्या में हुए आतंकी हमलों (terrorist attacks) के बाद यह सामने आया था कि आतंकियों ने वहां श्रद्धालुओं के भेष में जाकर हमले से पहले रेकी की थी। यूं भेष बदलना बहुत आसान है। एक कलावा या एक गेरुआ वस्त्र (gerua vastr ) भी आपकी पहचान बदल सकता है। मुंबई के ताज होटल पर हुए हमले के कसूरवार कलावा बांधे हुए थे। उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में दो साल पहले मार डाले गए हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी (hinduvadi neta kamalesh tiwari) के हत्यारे (killers) भी इसी तरह से अपनी पहचान छिपाकर अपने षड़यंत्र में सफल हो गए थे। यदि इन चार मामलों में मुस्लिम पहचान छिपाने का मकसद तबाही को अंजाम देना था तो फिर क्या ये आशंका गलत हो जाती है कि यूनुस का फर्जीवाड़ा (Yunus’s fraud) भी ऐसे ही किसी मंसूबों का सबब नहीं रहा होगा?

आश्चर्य यह है कि तमाम मामलों में तह तक जाने की कोशिश हुई है या नहीं, यह सामने आना बाकी है। होना तो यह चाहिए था कि यूनुस के लिए परमिशन बनवाने वाले पुजारी गणेश नारायण शर्मा (pujari ganesh narayan sharma) के भी लिंक टटोले जाते। पता लगाया जाता कि आखिर वह क्या वजह रही कि शर्मा ने एक गलत परीक्षण कार्ड जारी कर दिया? शोध तो इस विषय पर भी होना चाहिए कि खुशबू की यूनुस पर इतनी मेहरबानी आखिर किस वजह से हुई? कहीं ये मालकिन और नौकर से कहीं आगे वाला कोई और मामला तो नहीं है?

महाकाल मंदिर में अपनी तरह की यह पहली गलती नहीं है। इससे पहले उत्तरप्रदेश में पुलिस वालों का हत्यारा (Killer of policemen in Uttar Pradesh) विकास दुबे (Vikas Dubey) भी बेधड़क इस मंदिर में प्रवेश कर चुका था। कहा यह भी जा रहा है कि गणेश नारायण शर्मा ने ही यूनुस को अभिषेक दुबे (Abhishek Dubey) के नाम वाली फर्जी आईडी उपलब्ध कराई थी। तो पता यह भी लगाया जाना चाहिए कि क्या इस मंदिर में पहचान छिपाकर प्रवेश देने का भी कोई गोरखधंधा चल रहा है? यदि ऐसा है तो फिर इसके पीछे की निश्चित ही कोई सिहरन से भर देने वाली वजह कभी भी सामने आ सकती है।

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