पुलिस ने कोर्ट की अनुमति के बाद मंगलवार को जेल में बंद राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों से करीब दो घंटे पूछताछ की। सबसे लंबी पूछताछ आरोपी अविनाश मिश्रा से की गई।
आरोपियों ने करोड़ों की चोरी स्वीकारते हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में भी बताया। इस दौरान ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया। जिसमें बताया गया कि दान राशि की गणना संबंधी प्रक्रिया में अनिल मिश्रा की प्रमुख भूमिका रहती थी।
प्रकरण में पुलिस ने बीते बृहस्पतिवार को केस दर्ज किया था। शुक्रवार को चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव व गणनाकर्मी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश व अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कोर्ट से अनुमति लेने के बाद पुलिस ने मंगलवार को जेल जाकर आरोपियों से पूछताछ की।
सूत्रों के मुताबिक चूंकि सबसे अधिक बरामदगी अविनाश के पास से हुई थी, इसलिए उससे लंबी पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में पता चला कि टिन्नू यादव के पास गणना कक्ष की चाबी रहती थी। दूसरी चाबी बैंक कर्मियों के पास होती थी। इन सभी की मिलीभगत से रकम पार की जाती थी। टिन्नू व बैंककर्मी चोरी की रकम में हिस्सा लेते थे।
एक आदमी करता था चोरी, बाकी उसे घेर कर खड़े होते थे
आरोपियों ने बताया कि टिन्नू की मिलीभगत होने से चोरी आसानी से होती थी। कोई भी सवाल करने वाला नहीं रहता था। उनको पता था कि कैमरे कहां-कहां लगे हैं। इसलिए कैमरे से बचकर चोरी को अंजाम देते थे। कैमरे की नजर से बचने के लिए एक आदमी रकम पार करता था और बाकी लोग उसे घेर लेते थे। फिर रकम बाथरूम में छिपाते थे और मौका पाकर बाहर ले जाते थे। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के करीबी होने की वजह से उनकी कहीं पर कोई चेकिंग नहीं होती थी।
कंट्रोल रूम से निगरानी बन गई थी औपचारिकता
मंदिर परिसर में बने कंट्रोल रूम में सभी कैमरों का कंट्रोल रहता है। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि निगरानी के लिए जो लोग लगाए गए थे, वह सिर्फ औपचारिकता करते थे। कोई भी निगरानी नहीं करते थे। ये बात भी आरोपियों को पता थी, इसलिए बेफिक्री से वह रकम पार करते रहे।
आरोपियों ने कहा…जमीन मकान में लगाया पैसा
सूत्रों के मुताबिक चोरी की रकम के इस्तेमाल पर आरोपियों ने जमीन व मकान में रकम खपाने की बात कबूली। ये उम्मीद नहीं थी कि पूरा खेल इतनी जल्द खुल जाएगा।



