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हत्या करने या उकसाने के आरोपी को नहीं मिलेगी विरासत में संपत्ति

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सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति की हत्या करने या उकसाने के आरोपी को पीड़ित की संपत्ति विरासत में नहीं मिल सकती। यह नियम तब भी लागू होगा जब हत्या का मुकदमा चल रहा हो।

जस्टिस जे बी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। पीठ ने स्पष्ट किया कि संपत्ति विरासत में पाने की यह अयोग्यता वसीयत के माध्यम से और बिना वसीयत दोनों तरह के उत्तराधिकार पर लागू होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि हत्या के आरोपी व्यक्ति को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 के तहत संपत्ति के अधिकार से वंचित किया जाएगा।

इसके साथ ही, न्याय, निष्पक्षता और समानता के सिद्धांतों के आधार पर भी उसे यह अधिकार नहीं मिलेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिक कार्यवाही में सख्त सबूत अनिवार्य नहीं है।

यदि संभावनाओं का पलड़ा अपराध की ओर इशारा करता है, तो भी यह नियम लागू होगा। पीठ ने विशेष रूप से हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 का उल्लेख किया। यह धारा हत्या करने या उकसाने वाले व्यक्ति को मृतक की संपत्ति विरासत में लेने से अयोग्य ठहराती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हत्या के आरोपी को संपत्ति के अधिकार से वंचित करना हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 के अनुरूप है। यह धारा स्पष्ट रूप से हत्यारे या हत्या के लिए उकसाने वाले को मृतक की संपत्ति का वारिस बनने से रोकती है।

अदालत ने न्याय और निष्पक्षता के व्यापक सिद्धांतों पर भी जोर दिया। इसका मतलब है कि भले ही आपराधिक मुकदमा चल रहा हो, नागरिक कार्यवाही में उत्तराधिकार का दावा नहीं किया जा सकता।

यह फैसला कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आया, जिसने संपत्ति के उत्तराधिकार से संबंधित बेंगलुरु की एक सिविल अदालत के फैसले को रद्द कर दिया था।

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