मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर बड़ा अंतर्विरोध खुलकर सामने आया है। उज्जैन में वीर भारत न्यास को जमीन और बिल्डिंग देने के मामले में घोटाले के कथित आरोप पर शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मोहन सरकार को क्लीनचिट दे दी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा उज्जैन में करीब 500 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति को मात्र एक रुपये की लीज पर वीर भारत न्यास को सौंपने के आरोप की हवा खुद दिग्विजय सिंह ने निकाल दी है।
उज्जैन में मीडिया से चर्चा में दिग्विजय सिंह ने राज्य सरकार के इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि वह बिना रिसर्च के कोई बात नहीं करते और सांस्कृतिक संस्था वीर भारत न्यास को जमीन नियमानुसार ही आवंटित की गई है।
गौरतलब है कि कि इस ट्रस्ट के सचिव मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी हैं। इस बयान के बाद भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरने चली कांग्रेस खुद बैकफुट पर आ गई है।
दिग्विजय सिंह ने जीतू पटवारी के आरोप को गलत ठहराते हुए सरकार की नीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए एक रुपये की टोकन राशि पर जमीन देना हमेशा से एक तय और सही प्रक्रिया रही है। वीर भारत न्यास निजी नहीं बल्कि सरकारी ट्रस्ट है।
दिग्विजय सिंह ने दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ भी इस ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे हैं। उस समय यह चर्चा चली कि इस संपत्ति को ओबेराय होटल को दे दिया जाए।
इसे दिग्विजय सिंह का अपनी ही पार्टी के खिलाफ रुख न भी माना जाए तो भी उन्होंने अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भ्रष्टाचार के आरोप को सिरे से खारिज जरूर कर दिया है।
देश में दलालों की कमी नहीं
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि देश में दलालों की कमी नहीं है। दलालों का काम ही छोटे आरोप लगाना और इसके माध्यम से रुपये वसूली होता है। यह सब खेल दलालों का है। दिग्विजय के इस बयान से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस मोहन सरकार के विरुद्ध सड़क पर लड़ाई नहीं लड़ पा रही है और गलत आरोप भी लगा रही है।



