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दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में आग लगी, 21 लोगों की मौत

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दिल्ली में मालवीय नगर के फ्लरिश स्टे होटल में बुधवार को आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक मरने वालों में 11 विदेशी नागरिक हैं। इनमें 9 अफ्रीकी और 2 तुर्कमेनिस्तान के हैं। एजेंसी ने पहले ये आंकड़ा 17 बताया था।

बताया जा रहा है कि मृतक 10 भारतीयों में से 8 आपस में रिश्तेदार थे। इनमें 3 राजस्थान के और 5 हरियाणा के रहने वाले थे। हादसे में कुल 35 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 19 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।

दक्षिण दिल्ली के साकेत स्थित हौज रानी इलाके में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत ने राजधानी में गेस्ट हाउस, होटल और रेस्तरां संचालन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिस एक मंजिला भवन को केवल छह कमरों के गेस्ट हाउस की अनुमति मिली थी, वहां छह मंजिला होटल बनाकर 26 कमरे और रेस्टोरेंट संचालित किए जा रहे थे।

आग लगने के समय भवन में 80 से 100 लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है। हादसे में जान गंवाने वालों में अधिकांश विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। ऐसे में यह हादसा केवल आग का नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी, विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का मामला बन गया है।

जांच का दायरा केवल आग लगने के कारणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जांच यह भी तय करे कि किस अधिकारी, किस विभाग और किस स्तर पर लापरवाही हुई।

गेस्ट हाउस, होटल या लॉज को संचालित करने के नियम

भवन निर्माण की स्वीकृति और उपयोग की अनुमति

दिल्ली अग्निशमन सेवा (फायर एनओसी)

पुलिस लाइसेंस

नगर निगम का ट्रेड लाइसेंस

विद्युत एवं सुरक्षा मानकों का अनुपालन

निर्धारित क्षमता और कमरे की संख्या का पालन

आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट)

फायर अलार्म, स्प्रिंकलर, अग्निशामक यंत्र और धुआं निकालने की व्यवस्था

क्या हुआ उल्लंघन

  1. स्वीकृत क्षमता से चार गुना अधिक विस्तार

यदि छह कमरों की अनुमति थी और 26 कमरे बनाए गए, तो यह भवन उपयोग और लाइसेंस शर्तों का गंभीर उल्लंघन

  1. भीड़ क्षमता का उल्लंघन

करीब 100 से अधिक लोगों की मौजूदगी, भवन का उपयोग स्वीकृत क्षमता का उल्लंघन

  1. अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

हादसे के दौरान कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से नीचे कूदना पड़ा। साफ है आग लगने के समय सुरक्षित निकासी व्यवस्था नहीं थी

  1. संकरे रास्ते और निकासी व्यवस्था

किसी भी होटल या गेस्ट हाउस में आपातकालीन निकासी का स्पष्ट मार्ग होना आवश्यक है। बड़ी संख्या में लोगों का फंस जाना और कुछ लोगों का इमारत से कूदना यह बताता है

  1. बिजली और संरचनात्मक सुरक्षा

भवन के बाहर दिखाई दे रहे तारों और आग से हुई व्यापक क्षति के बाद विद्युत सुरक्षा मानकों के पालन की भी जांच की आवश्यकता है।

जिम्मेदार कौन

सिर्फ भवन मालिक को दोषी ठहराना पर्याप्त नहीं होगा।

-भवन मालिक और संचालक

 

उन्होंने स्वीकृति से अधिक कमरे बनाए, क्षमता से अधिक लोगों को ठहराया, सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया,

-नगर निगम

 

अवैध निर्माण, अतिरिक्त कमरे और भवन उपयोग में बदलाव की निगरानी नगर निकाय की जिम्मेदारी होती है। यदि वर्षों तक यह संचालन कैसे चलता रहा

-दिल्ली अग्निशमन सेवा

यदि फायर एनओसी जारी की गई थी तो उसके बाद निरीक्षण और अनुपालन की स्थिति क्या थी? यदि एनओसी नहीं थी तो बिना कार्रवाई के प्रतिष्ठान कैसे चल रहा था?

-स्थानीय प्रशासन और पुलिस

लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठानों की समय-समय पर जांच और क्षमता नियंत्रण सुनिश्चित करना भी प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी का हिस्सा है।

यह हादसा केवल एक इमारत में लगी आग नहीं है। असली सवाल यह है कि यदि छह कमरों की अनुमति वाला गेस्ट हाउस छह मंजिला व्यावसायिक प्रतिष्ठान में बदलकर 26 कमरों तक पहुंच गया, तो क्या किसी विभाग ने कभी निरीक्षण नहीं किया? और यदि किया, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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