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सुप्रीम कोर्ट ने केजी बेसिन मामले में रिलायंस की अपील पर शुरू की सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी साझेदार कंपनियों की उन अपीलों पर मंगलवार को अंतिम सुनवाई शुरू कर दी।

इन अपीलों में कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस विवाद में आए मध्यस्थता फैसले को निरस्त करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ बीपी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड और निको (एनईसीओ) लिमिटेड ने दिल्ली हाई कोर्ट के 14 फरवरी, 2025 के आदेश को चुनौती दी हुई है।

इससे पहले हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने 2023 में इन कंपनियों के पक्ष में मध्यस्थता फैसले को बरकरार रखा था।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से पेश सीनियर वकील अभिषेक सिंघवी ने केंद्र के इस आरोप को खारिज किया कि कंपनी ने पब्लिक सेक्टर की ओएनजीसी के ब्लॉकों से गैस ‘निकाली’ थी।

उन्होंने कहा कि गैस का प्रवाह दबाव के अंतर के कारण होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसकी तुलना जैविक प्रक्रिया ‘ऑस्मोसिस’ (परासरण) के साथ की जा सकती है।

सिंघवी ने कहा कि गैस की कथित ‘चोरी’ का आरोप तकनीकी और कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार ने परियोजना में कोई पूंजी निवेश या अन्वेषण जोखिम नहीं उठाया, लेकिन गैस से मिलने वाले रॉयल्टी और डिविडेंड की अंतिम लाभार्थी वही है।

उन्होंने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने गहरे समुद्र वाले इस प्रोजेक्ट पर 7.4 अरब डॉलर का निवेश किया है और ये घरेलू गैस उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

इससे पहले,  साल 2018 में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने केंद्र के 1.55 अरब डॉलर के दावे को खारिज करते हुए संबंधित कंपनियों को 83 लाख डॉलर का मुआवजा देने का फैसला सुनाया था।

हालांकि, बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र की अपील स्वीकार करते हुए इस फैसले को निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर बुधवार को आगे की सुनवाई करेगा।

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