नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 की रिपोर्ट (मई 2026 में जारी) के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुछ श्रेणियों में अपराध कम हुए हैं, जबकि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में राज्य की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
बच्चों के खिलाफ अपराध में राज्य के लिए राहत की बात यह है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामले कम हुए हैं।
पिछले साल मध्य प्रदेश इस सूची में पहले स्थान पर था, लेकिन अब यह गिरकर तीसरे स्थान पर आ गया है। राज्य के प्रमुख शहर इंदौर में कुल संज्ञेय अपराधों में 28 प्रतिशत की कमी आई है, जो राष्ट्रीय और राज्य औसत से बेहतर सुधार है।
अपराध दर अब भी राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी
आंकड़ों के अनुसार, 2023 की तुलना में 2024 में कुल अपराधों में लगभग तीन प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, यहां की अपराध दर (प्रति लाख जनसंख्या पर 801.1) अभी भी राष्ट्रीय औसत (418.9) से लगभग दोगुनी है। राष्ट्रीय स्तर की तरह मध्य प्रदेश में भी हत्या की वारदातों में मामूली कमी देखी गई है। बुजुर्गों के खिलाफ अपराध में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा है। 2024 में बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
आदिवासी और अनुसूचित जाति पर अत्याचार में राज्य शीर्ष पर
अनुसूचित जनजाति वर्ग के खिलाफ अपराधों के मामलों में भी मध्य प्रदेश देश में शीर्ष पर है। राज्य में आदिवासियों के खिलाफ 3,165 मामले दर्ज किए गए। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों में मध्य प्रदेश देश के टॉप-5 राज्यों में शामिल है। राज्य में औसतन हर दिन 90 से ज्यादा घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा, ‘हत्या के साथ बलात्कार/गैंगरेप’ की श्रेणी में भी राज्य आगे रहा है। अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराध में उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है।
सार्वजनिक परिवहन और शेल्टर होम में असुरक्षित महिलाएं
सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के साथ यौन शोषण की घटनाएं केरल के बाद सर्वाधिक 65 मध्य प्रदेश में हुई हैं। यह आंकड़े वर्ष 2024 के हैं, जिन्हें एक दिन पहले नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने जारी किए हैं। दहेज हत्या के मामले में भी मध्य प्रदेश की स्थिति खराब है। वर्ष 2024 में दहेज हत्या के 450 मामले सामने आए, जो बिहार (1057) के बाद दूसरे नंबर पर है। शेल्टर होम में यौन शोषण की सर्वाधिक घटनाओं में भी मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है।



