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मप्र में बढ़े महिला अपराध, नेता प्रतिपक्ष ने मोहन को लिया निशाने पर, लगाया गंभीर आरोप

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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बालिका दिवस पर बेटियों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। यहां पर पहले बता दें कि कांग्रेस राज्य में महिलाओं पर बढ़ते अपराध को लेकर सरकार को लगातार अपने निशाने पर ले रही है। अब सिंघार ने बेटियों की सुरक्षा को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया है कि मप्र से बीते पांच साल में 55 हजार बालिका लापता हो गई हैं।

सिंघार ने दावा कि यह सिर्फ आंकड़े नहीं, महिला सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न हैं। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश से 54,803 बालिकाएं लापता हुई हैं, और वर्ष 2025 में ही 13,146 एफआईआर दर्ज हुई हैं। ये आंकड़े साबित करते हैं कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

केवल नारे बनकर रह गए नारी सशक्तिकरण के दावे
राज्य के गृह विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास है और इसी को लेकर नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने तंज भरे अंदाज में कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि गृह विभाग की डोर मुख्यमंत्री के हाथ से फिसलती जा रही है। चुनावी समय में किए गए बड़े-बड़े दावे जमीनी हकीकत में शून्य साबित हुए हैं। महिला सुरक्षा और नारी सशक्तीकरण केवल नारे बनकर रह गए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे इस गंभीर विषय का तत्काल संज्ञान लें, प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और दोषियों पर कठोर कार्यवाही कर जवाबदेही तय करें।

बेटियां समाज की शक्ति, संस्कार और भविष्य
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बालिका दिवस के अवसर पर अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि बेटियां हमारे समाज की शक्ति, संस्कार और भविष्य हैं। हर बेटी को सम्मान, सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। आज हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा करेंगे, उनके सपनों को नई उड़ान देंगे और उन्हें आत्मनिर्भर, सक्षम और सशक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

दरअसल, राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर है। बीते कुछ दिनों में राज्य के कई हिस्सों से आपराधिक घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों में राज्य की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। इसके साथ ही बालिकाओं के लापता होने के मामले भी बढ़े हैं।

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