भागलपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सोमवार को व्यस्त कार्यक्रम रहा है। एक ओर जहां उन्होंने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज सुबह 10.30 बजे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का शुभारंभ किया। वहीं दूसरी ओर बिहार का दौरा कर राज्य को बड़ी सौगात दी। पीएम मोदी ने भागलपुर में आयोजित कार्यक्रम से 24 हजार करोड़ के विकास कार्यों उद्घाटन और भूमिपूजन किया। इस दौरान मोदी पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 19वीं किस्त भी जारी की। उन्होंने डीबीटी के माध्यम से करीब 9.8 करोड़ किसानों के खातों में 22 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने आरजेडी और कांग्रेस पर भी जोरदार वार किया।
भाषण की शुरूआत पीएम ने अंगिका (बिहार की बोली) में लोगों को प्रणाम किया। नीतीश कुमार को लाडला मुख्यमंत्री बताया। इसके बाद पीएम मोदी ने विपक्ष पर वार करते हुए कहा कि ये जो जंगलराज वाले हैं, इनको हमारी धरोहर, आस्था से नफरत है। वे महाकुंभ को गाली दे रहे हैं। राम मंदिर से चिढ़ने वाले लोग महाकुंभ को भी कोसने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। जनता इन्हें माफ नहीं करेगी। पीएम ने कहा कि जिन्होंने पशुओं का चारा खाया वे हालात को बदल नहीं सकते।
मछुआरों को पुराने लोगों ने नहीं दिया फायदा
पीएम ने कहा- 2 परियोजना पूरी हो रही है। मोतिहारी का सेंटर आॅफ एक्सीलेंस, जो बेहतरीन गाय की नस्ल के लिए काम कर रहा है। दूसरा बरौनी का प्लांट। मछुआरे साथियों को पुराने लोगों ने कुछ फायदा नहीं दिया। हमने किसान क्रेडिट कार्ड दिया। ऐसे ही प्रयासों से बिहार आगे बढ़ रहा है। जैसे नीतीश कुमार ने बताया कि बिहार आज मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है।
विकसित भारत के यह चार मजबूत स्तंभ
पीएम ने कहा कि ‘मैंने लालकिले से कहा है, विकसित भारत के 4 मजबूत स्तंभ हैं- गरीब, अन्नदाता किसान, हमारे युवा और हमारे देश की नारी। चाहे केंद्र हो या यहां नीतीश के नेतृत्व में चल रही एनडीए की सरकार हो, किसान हमारी प्राथमिकता हैं। किसानों के लिए सरकार ने पूरी मेहनत से काम किया है।’ पीएम ने कहा- ‘खाद की बोरी जो 3 हजार रुपए की मिलती है, वो हम आपको 300 रुपए में देते हैं। हमारी सरकार न होती तो आज भी 3 हजार में मिलती। हमारी सरकार किसानों के लिए सोचती है। बीते 10 साल में करीब 12 लाख करोड़ रुपए जो आपके खाते से खाद खरीदने के लिए देने थे, वो केंद्र ने बजट में दिए हैं।’
पहले यूरिया के लिए किसान खाता था लाठी
‘पहले यूरिया के लिए किसान लाठी खाता था और यूरिया की कालाबाजारी होती थी। आज किसानों को पर्याप्त यूरिया मिलती है। आप कल्पना कर सकते हैं, अगर ठऊअ सरकार न होती तो क्या होता। अगर हमारी सरकार नहीं होती तो आज भी खाद के लिए किसानों को लाठियां खानी पड़ती। बरौनी खाद कारखाना बंद पड़ा होता।’