भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने स्टांप ड्यूटी शुल्क में भारी भरकम इजाफा कर दिया है। भारतीय स्टांप (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक 2025 विधानसभा में पास होने के बाद मप्र में अब शपथ पत्र 50 रुपये के बजाय 200 रुपये में बनेगा और रेंट एग्रीमेंट 500 से 1000 चुकाने पडेंगे। वहीं प्रॉपर्टी एग्रीमेंट के लिए 1000 से 5000 देना होगा। हालांकि कांग्रेस इस विधेयक का पुरजोर तरीके से विरोध कर रही है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा है कि राज्य सरकार ने अपना राजकोषीय घाटा पूरा करने के लिए आमजन की जेब काटी है।
राज्य सरकार ने सरकारी कामकाज कराने में लगने वाली फीस, पंजीयन और स्टांप ड्यूटी में बड़ी वृद्धि की है। इसी का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे गए पत्र में कहा कि विधानसभा में पारित कुछ विधेयकों के माध्यम से आपने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राज्य सरकार आम जनता के हितों से नहीं, बल्कि राजकोषीय घाटे की भरपाई आम जनता की जेब काटकर करने में जुटी है।
यह आम आदमी की कमर तोड़ने की नीति
जीतू ने आगे कहा कि राज्य में शपथ पत्र, प्रॉपर्टी एग्रीमेंट, सहमति पत्र, पावर ऑफ अटॉर्नी, लाइसेंस नवीनीकरण, रजिस्ट्रियों में सुधार जैसे जरूरी दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क 100 प्रतिशत से लेकर 500 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है।यह वृद्धि सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, यह उस आम आदमी की कमर तोड़ने की नीति है, जो पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रहा है। राज्य सरकार पर पहले से ही साढ़े चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और हर महीने नए कर्ज लेकर आप प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों को भी ऋण के बोझ में धकेल रहे हैं।
राज्य में बढ़ रही फिजूलखर्जी
उन्होंने दावा किया कि राज्य में फिजूल खर्ची बढ़ रही है। बोले, सरकारी योजनाओं की लागत 50 प्रतिशत कमीशन की भेंट चढ़ चुकी है। सरकार की हवाई यात्राएं, बंगले, गाड़ियां और प्रचार पर फिजूलखर्ची थमने का नाम नहीं ले रही है। परिणामस्वरूप, लूट के इस जंगलराज की भरपाई अब जनता से की जा रही है। आमजन की समस्याओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने कहा है कि यह सिर्फ एक पत्र नहीं, बल्कि जनता की पीड़ा और आक्रोश की आवाज है।