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कांग्रेस

अमरवाड़ा की जनता के सामने नाथ बहाएंगे घड़ियाली आंसू, भाजपा नेत्री का करारा हमला

भाजपा सांसद कविता पाटीदार ने कहा कि लोकसभा का चुनाव हारने के बाद कांग्रेस नेता कमलनाथ छिंदवाड़ा की जनता के भी नहीं हुए। लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ छिंदवाड़ा छोड़कर चले गए।

एक मंद अक्ल की साधना

राहुल अतीत की तरफ देखना ही नहीं चाहते है। वरना तो वह इस बात को याद रखते कि उनके

चुटकुला याद दिला रही है कांग्रेस की यह गारंटी

जिन्हें अतीत और वर्तमान, दोनों के सच का भान नहीं है, उनके लिए तो यह बेहद लोकलुभावन मामला है। लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस...

डूबा तो टाइटैनिक भी था, जला रोम भी था….

लगता ऐसा ही है, कांग्रेस में बहुत असरकारी भूचाल आ गया है। क्योंकि आज मध्यप्रदेश की सियासत में जो कुछ हुआ, उसकी तो यह...

राख के ढेर में शोला है न चिंगारी है

इस शोर के असर से कोई इंकार नहीं कर सकता। हां, इसके पीछे निहित जोर अपने साथ कई किस्म के प्रश्नवाचक और विस्मयादिबोधक चिन्ह...

करोड़पति नेताओं की बेचारी कंगाल कांग्रेस

राहुल गांधी के प्रभाव वाले इस पूरे कालखंड में कांग्रेस जनमत से लेकर धन के मामले में ठन-ठन गोपाल वाला सफर बड़ी दयनीय अवस्था में घिसट-घिसटकर तय कर पा रही है। वैसे तो यह सारा मामला ही किसी लतीफे जैसा है, फिर भी एक और लतीफा याद आ गया। सेना के अफसर ने नाश्ते के लिए बैठी टुकड़ी के जवानों से कहा, 'खाने पर दुश्मन की तरह टूट पड़ो।' टुकड़ी कई दिन की भूखी थी।

कांग्रेस ने दिल से हटकर दिमाग की सुध ली

पटवारी, सिंघार और कटारे को उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं। बरसों बरस बाद पंजे ने दिमाग को टटोला है। कांग्रेस के सच्चे शुभचिंतक यही चाहेंगे कि यह क्रम बना रहे। बाकी उनके भीतर यह आशंका कायम रहना भी स्वाभाविक है कि पंजा एक बार फिर दिमाग से फिसलकर दिल की तरह न चला जाए।

भाजपा का सयानापन और कांग्रेस का बचपना

कांग्रेस व्यवहारिकता के हिसाब से मुद्दों के टोटो और उनके नाम पर तोता रटंत की शिकार होकर रह गयी। जबकि भाजपा ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह अपने सामाजिक समरसता वाले वाक्य के अनुरूप आगे बढ़ने में ही यकीन रखती है।

शिवराज का फीनिक्स अवतार और सोने की भस्म

शिवराज ने बीते महीने खुद की तुलना उस फीनिक्स पक्षी से की, जिसके लिए कहा जाता है कि वह अपनी ही राख से एक बार फिर जीवन पा लेता है। यानी वह अजर-अमर है। मजे की बात यह कि यदि टाइगर को फिर से सही अर्थ में जीवित होना दिखाने के लिए पंद्रह महीने का समय लग गया था, तो फीनिक्स पक्षी ने एक पखवाड़े से भी कम की अवधि में अपने फिर से जीवित हो उठने वाले पूरे हालात स्थापित कर दिए हैं।

ये कमलनाथ का विश्वास है दिग्विजय पर

दिग्विजय ने जिन बातों के चलते अपने लिए कपडे फटने की स्थिति बुलाई, उनमें से अधिकतर बातें भले ही पार्टी के नाम पर की गईं, लेकिन उनके मूल में खुद दिग्विजय का निजी एजेंडा भी निहित था। खैर, इसे गलत भी नहीं मानना चाहिए। निजी शुभ-लाभ हासिल करने की निंदा करने से पहले यह देखा जाना चाहिए कि कपडे फड़वाने की दिग्विजय की तरह ऐसी बार-बार हिम्मत करना कांग्रेस में क्या किसी और के बूते की बात है?

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