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गलत नहीं हैं सुरेंद्र नाथ सिंह

जब आजकल अदालतों के आदेश से अवैध तौर पर बनाए गए बड़े-बड़े भवन बम लगाकर जमीदोंज किए जाते हैं, तब एमपी नगर में इन बड़े अतिक्रमण कारियों के साथ ऐसी सख्ती क्यों नहीं होना चाहिए। यहां ढेरों निर्माण तमाम नियमों को धता बताकर किए गए है। जिनके भीतर पार्किंग की व्यवस्था न किए जाने के चलते एमपी नगर की सड़कों पर पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। बाबूलाल गौर ने एमपी नगर की सड़कों को अस्सी फीट तक चौढ़ा किया था। लेकिन इन सड़कों का इस्तेमाल केवल पार्किंग के लिए हो रहा है। दरअसल यह सरकार और जिला प्रशासन छोटे-मोटे लोगों को कुचलने पर आमादा है। लेकिन बड़े मगरमच्छों से इसे भय लगता है। यदि ऐसा नहीं होता तो यह संभव ही नहीं था कि एमपी नगर का एक भी बड़ा भवन अपने भूतल में पार्किंग का इंतजाम नहीं करता। और अकेले सुरेन्द्रनाथ को गाली देने से भी कुछ नहीं होगा, क्योंकि इसी कांग्रेस सरकार में जो लोग भोपाल से मंत्री हैं, वे तो अतिक्रमण और झुग्गी बस्तियों के बड़े सरमाएदार रहे हैं। सुरेन्द्रनाथ सिंह ने कम से कम भोपाल में झुग्गियां तो नहीं ही बसाई हैं। read more  आगे पढ़ें

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...मगर दिल तो धड़कता रहे

सत्ता संभालने के बाद से ही कमलनाथ निरंतर मुसीबतों से दो-चार हो रहे हैं। उनके मंत्रिमंडल के अलग-अलग गुट जहां चार यार मिल जाएं.. की शैली में अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे हुए हैं। अध्यक्ष पद को लतियाते राहुल गांधी की हालत भी उम्रे-दराज मांगकर लाये थे चार दिन। दो आरजू में कट गये, दो इंतजार में। वाली हो गयी है। आरजू थी नरेंद्र मोदी को हराने की। अब उन्हें इंतजार है पार्टी के भीतर मौजूद निकम्मों के इस्तीफे का। एक ही गेंद पर चार रन यानी चौक्का तो गोपाल भार्गव ने भी बड़ी खूबसूरती से जड़ दिया। पौधारोपण की बात पर विधानसभा में ऐसी चुनौती दे दी कि शिवराज के खिलाफ जांच का पुख्ता इंतजाम हो गया। भार्गव स्वभाव से ही धाकड़ हैं। उस पर बुंदेलखंड का पानी उन्हें और ताकत से भरा हुआ है। फिर सबसे खास बात यह कि पौधारोपण से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं रहा था। इसलिए उन्हें जो कहना, करना था वह कह और कर गुजरे।  आगे पढ़ें

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वजह नरेंद्र मोदी के गुस्से की

सन 2024 में एक बार फिर सत्ता में वापसी के लिए इस सरकार को जितने सख्त अनुशासन और भारी परिश्रम की दरकार है, वह तब ही संभव हो सकेगा, जब एक-एक सांसद और पार्टी का प्रत्येक पदाधिकारी खुद को अनुशासन एवं नियमों में पूरी तरह आबद्ध कर दे। इसके लिए वैसी ही सख्ती की जरूरत है, जो मोदी ने इस कार्यकाल के आरम्भ से ही दिखाई है। उत्तराखंड के विधायक कुंवर प्रवीण सिंह चैम्पियन को छह साल के लिए पार्टी से निकालना इसी दिशा में एक ऐसा कदम है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। read more  आगे पढ़ें

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भाजपा का आरोप: श्रीलंका में सीता मंदिर निर्माण से पहले तथ्यों की जांच कराकर सरकार कर रही हिन्दुओं का अपमान

श्रीलंका में प्रस्तावित सीता मंदिर के निर्माण से पहले उसके तथ्यों की जांच कराकर कमलनाथ सरकार हिंदुओं का अपमान कर रही है। ये आरोप भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने लगाए। मंगलवार को भोपाल में मीडिया से बातचीत में चौहान ने कहा कि सारा देश और दुनिया जानती है कि सीताजी को श्रीलंका की अशोक वाटिका में रखा गया था। यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा मामला है, लेकिन प्रदेश सरकार इस तथ्य की जांच की बात कह रही है कि सीताजी लंका गई भी थीं या नहीं।  आगे पढ़ें

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कम आय बताकर दो बेटियों को छात्रवृत्ति दिलाने के मामले में फंसे पूर्व कृषि मंत्री बिसेन

समरीते द्वारा नौ फरवरी 2019 को की गई शिकायत में कहा कि बिसेन ने दोनों बेटियों पायल बिसेन और मौसम बिसेन को पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति दिलाने के लिए वर्ष 2000 में सभी स्रोतों से अपनी आय 80 हजार रुपए बताई है। जबकि बिसेन वर्ष 1984 से विधायक हैं। वे 1999 में लोकसभा सदस्य भी रहे हैं और 1988 से आयकर दे रहे हैं। फिर भी वर्ष 2000 में सभी स्रोतों से अपनी आय सिर्फ 80 हजार रुपए सालाना बता रहे हैं। समरीते कहते हैं कि मामले में बिसेन पर अपराध दर्ज होना चाहिए, लेकिन प्रभावशाली व्यक्ति होने के कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। ज्ञात हो कि पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले भी स्थानीय स्तर पर यह मामला उठा था।  आगे पढ़ें

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संबल योजना में बड़ा घोटाला, मजदूरों के नाम पर भाजपा कार्यकर्ताओं को उपकृत

श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने मंगलवार को आशंका जताई कि संबल योजना के 40 से 50 फीसदी हितग्राही फर्जी हो सकते हैं। एक से पंद्रह जुलाई के बीच जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ एफआईआर भी होगी। बहुगुणा ने अगस्त 2018 में सेम्पल सर्वे कराकर पड़ताल कराई थी। उसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी थी। इसे उन्होंने दबवा दिया और कार्रवाई नहीं की। इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ को 22 मार्च को नोटशीट लिखकर जांच के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया था।  आगे पढ़ें

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शिवराज की संबल योजना और कमलनाथ का नया सवेरा कार्ड

मुख्यमंत्री जन कल्याण योजना यानी संबल योजना के तहत बने श्रमिकों के कार्ड अब नए सिरे से बनेंगे। कमलनाथ सरकार ने इन्हें नया बनाने का फैसला लिया है। राज्य सरकार ने योजना का नाम भी बदल दिया है। अब योजना का नाम संबल योजना नहीं बल्कि नया सवेरा नाम होगा।  आगे पढ़ें

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मजबूर दोधारी तलवार पर चलने की

भोपाल के डीआईजी इरशाद वली और वन विभाग के अपर मुख्य सचिव केके सिंह की चतुराई या नादानी के बारे में मैं नहीं जानता। इसलिए मुझे नहीं पता कि कल शिवराज सिंह चौहान द्वारा जमकर पिलायी गयी डांट के बाद इन अफसरान की हालत क्या है, लेकिन इतना तो जानता ही हूं कि दोनो बे-वजह नप गये। वली का अपने स्तर पर तो यह साहस हो ही नहीं सकता था कि आदिवासियों को शहर में प्रवेश करने से रोक दें। सिंह भी यह दुस्साहस नहीं कर सकते थे कि मुख्यमंत्री से बात किए बगैर यह कह दें कि जिस जमीन पर अधिकार बताया जा रहा है, वह दरअसल गलत तरीके से किये गये कब्जे का मामला है। दोनो के ऐसे करने और कहने की डोर ऊपर से बंधी हुई थी। बदले में यह हुआ कि मीडिया ने चटखारे लेकर उनकी बेइज्जती की खबर सार्वजनिक कर दी। खैर, जो हुआ सो हुआ। देखने वाली बात यह है कि इसके बाद आगे और क्या होगा? शिवराज ऐसे तीखे तेवर दिखाकर सफल रहे। मुख्यमंत्री ने उनसे ही सहयोग मांग लिया, पूरी नाटकीयता के साथ। उसी ड्रामेबाजी से शिवराज ने नाथ को सहयोग करने की बात कह दी। यानी फिलहाल मामला, लड़ाई-लड़ाई माफ करो...पर पहुंच गया है।  आगे पढ़ें

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युवक की मौत का मामला: शिवराज ने कहा- प्रदेश सरकार की संवेदनाएं मर चुकी हैं, पुलिस हुई निरंकुश

शिवराज सिंह ने पुलिस की पिटाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि, "युवक की कार बीआरटीएस कॉरिडोर की रेलिंग से टकरा गई थी। ये ऐसी घटना ऐसी नहीं थी कि पुलिस युवक को पीट-पीटकर मार डाले। ऐसे में पुलिसकर्मियों के खिलाफ सस्पेंशन के बजाए इस मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए। और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वो यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि, "मध्य प्रदेश में गरीबों को सताया जा रहा है, विरोध करता है तो झोपड़ी को आग लगा दी जाती है। उस आग में कूदकर एक बहन ने जान दे दी। क्या गरीबों को ऐसा जताया जाएगा, आदिवासियों को सताने का भी मामला सामने आया है। गरीबों के कल्याण की सारी योजनाएं बंद कर दी गई हैं। अन्याय की अति हो गई है।  आगे पढ़ें

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बाला के दबाव में दागी अफसर को प्रमोशन देने के फेर में कमलनाथ सरकार

मामला आबकारी विभाग से जुड़ा है। फिलहाल आरक्षण के कारण डिप्टी कमिश्नर के पद तक जा पहुंचे एक अफसर के खिलाफ विधि विभाग ने लोकायुक्त द्वारा चालान की अनुमति मांगे जाने के मामले में अपनी राय अफसर के खिलाफ दी है। इस अफसर के खिलाफ इंदौर में डिप्टी कमिश्नर आबकारी रहते हुए लोकायुक्त ने छापामारी की थी। मामला अनुपातहीन संपत्ति से जुड़ा था। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद उक्त अफसर को हटा कर मुख्यालय ग्वालियर में पदस्थ कर दिया गया था।read more  आगे पढ़ें

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