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शीत सत्र में हंगामे का सबब बनेगा व्यापमं घोटाले का गुमनाम पत्र, शिवराज और कमलनाथ सरकार ने दिए अलग-अगल जवाब

व्यापमं घोटाले का सूत्रधार कहा जाने वाला पत्र कहां गया। उस 'गुमनाम पत्र' का मुद्दा शीतकालीन सत्र में हंगामे का सबब बनेगा। इस पत्र के सवाल पर शिवराज और कमलनाथ सरकार ने दो अलग-अलग जवाब दिए हैं। भाजपा की पूर्ववर्ती शिवराज सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन तकनीकी शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि गुमनाम पत्र की प्रति अपराध शाखा इंदौर में है। वहीं बजट सत्र के दौरान गृहमंत्री बाला बच्चन ने अपने लिखित जवाब में यह भी स्वीकार किया है कि दो जुलाई 2014 को विधानसभा में इस गुमनाम पत्र का उल्लेख तत्कालीन मुख्यमंत्री (शिवराज सिंह चौहान) ने स्थगन पर चर्चा के दौरान अपने वक्तव्य में किया था, लेकिन ऐसा कोई गुमनाम पत्र मौजूद नहीं है।  आगे पढ़ें

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सिंघार को दिग्गी पर टिप्पणी करना पड़ सकता है महंगा, रिपोर्ट परीक्षण में पाए गए दोषी, अब आलाकमान करेगा फैसला

वन मंत्री उमंग सिंघार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर टिप्पणी करना महंगा पड़ सकता है। केंद्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष एके अंटोनी की रिपोर्ट के परीक्षण में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष शिवराज पाटिल और मीरा कुमार ने सिंघार को दोषी पाया है। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी आलाकमान को इस बारे में बता दिया है। इस मामले में अब आगे कार्रवाई पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को करना है। सिंघार ने तीन महीने पहले सार्वजनिक तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए थे। यह मामला हाई प्रोफाइल होने से सीधा केंद्रीय अनुशासन समिति के पास पहुंच गया था। वहां केंद्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष अंटोनी ने दिग्विजय और सिंघार से अलग-अलग चर्चा की थी।  आगे पढ़ें

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भाजपा विधायक की सदस्यता खत्म होने के मचा सियासी घमासान, शाह के हस्तक्षेप के बाद राज्यपाल से भाजपा के विधायक

पवई विधायक लोधी की सदस्यता खत्म होने का गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि ये सरगर्मी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद बढ़ी है। बताया जा रहा है कि भाजपा विधायक बगैर तैयारी के राज्यपाल से मिलने पहुंच गए थे, राज्यपाल लालजी टंडन ने भाजपा विधायकों को एक हफ्ते का समय दिया है। भाजपा विधायकों का दल लिखित ज्ञापन लेकर नहीं पहुंचे। इसलिए राज्यपाल टंडन ने एक हफ्ते का समय देकर फिर से लिखित शिकायत लेकर आने को कहा है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा कहा कि धारा 192 में विधायक को हटाने का अधिकार राज्यपाल को है विधानसभा स्पीकर को नहीं है।  आगे पढ़ें

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भाजपा के आंदोलन पर जीतू पटवारी ने कसा तंज, कहा- शिवराज घड़ियाली आंसू बहाना बंद करें, वह किसानों के दुश्मन हैं

जीतू पटवारी ने भोपाल में मीडिया से बातचीत में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के अन्य नेताओं ने 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद भी किसानों के लिए कुछ नहीं किया। अब विपक्ष में आने पर किसानों के नाम राजनीति कर रहे हैं। भाजपा नेता केंद्र से राहत राशि जानबूझकर नहीं दिलवा रहे हैं, ताकि राज्य के किसानों को राहत नहीं मिले और वह आक्रोशित हों और इसका लाभ भाजपा नेता उठाएं।  आगे पढ़ें

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मत बदलो लोकतंत्र को शोकतंत्र में

भाग्य शिवराज की तरह, कमलनाथ का भी लगता है मजबूत है। ले-देकर बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा और प्रहलाद लोधी नामक घटनाक्रम ने नाथ सरकार को फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित बहुमत वाली स्थिति में ला दिया। प्रदेश की जनता को एकबारगी लगा कि अब सरकार काम करेगी। नाथ बहुमत की दम पर जनकल्याणकारी योजनाएं लागू करेंगे। ऐसा होता तो दिख नहीं रहा। मुख्यमंत्री बहुमत की सुरक्षित रजाई के अंदर भी असुरक्षित बहुमत के चीथड़े ही लपेटे हुए दिख रहे हैं। कह रहे हैं कि कांग्रेस को दो-तीन और सीट मिल जाएंगी। read more  आगे पढ़ें

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भगवान अच्छे से जाने है पापी मन को तेरे..

माननीय शिवराज जी, प्रदेश की साढे सात करोड़ जनता के मंदिर के स्वयंभू पुजारी जी, सत्ता से हटते ही जागने का ढोंग क्यों कर रहे हों? जब जागने का मौका था, अफसरों के दिमाग से चलते रहे, अब अगर कमलनाथ ऐसा ही कर रहे हैं तो आपको विलाप करने का कोई हक है क्या? ये मंदिर में बैठे भगवानों के देखने का मामला है, स्वयंभू पुजारियों के स्यापा करने का नहीं। शिवराज सिंह चौहान के समय एमपी वाकई गजब बन पाया हो या नहीं, लेकिन बतौर मुख्यमंत्री अपना समय खत्म होने के बाद यह शख्स खुद अजब-गजब बन गया नजर आ रहा है। वे राज्य सरकार के विरुद्ध गरज रहे हैं और बकौल शिवराज मध्यप्रदेश नुमा इस मंदिर के भगवान बजरिए पुजारी पाप-पुण्य में गौते लगा रहे हैं। शिवराज उसी सब का सत्ता से हटने के बाद विरोध कर रहे हैं, जिसे लगभग पूरे तेरह साल तक उन्होंने खुलकर अंजाम दिया। पूर्व मुख्यमंत्री अपने मौजूदा समकक्ष को आंख दिखा रहे हैं। read more  आगे पढ़ें

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नए विश्रामगृह बनाने के प्रस्ताव की खिलाफत करने पर विस अध्यक्ष ने शिवराज से पूछा-क्या वे विधायक विरोधी हैं

विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि विधायक विश्रामगृह के प्रस्ताव का विरोध करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान क्या विधायक विरोधी हैं? नए विधायक विश्रामगृह के संबंध में हम पिछली सरकार के समय के प्रस्ताव को ही आगे बढ़ा रहे हैं। विधायक 450 वर्गफीट के आवास में रह रहे हैं। इसके लिए एनजीटी, टीएंडसीपी, पौधरोपण व 33 लाख रुपए देने की सभी परमिशन शिवराज सरकार ने ही दी और आज वे इसका विरोध कर रहे हैं, यह गलत है। पूर्व आईएएस अधिकारी भी इसमें न पड़ें, जिसको कुछ कहना है वे यहां आएं और मुझसे वन-टू-वन बात करें। छपास की बीमारी से बचें।  आगे पढ़ें

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झाबुआ और भाजपा के हालात

हार के बाद शिवराज किसी बुलावे पर दिल्ली निकल लिये। भार्गव खामोश हैं। विजयवर्गीय कह रहे हैं कि कांग्रेस अपनी परम्परागत सीट पर जीती है। राकेश सिंह सत्तारूढ़ दल पर सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग वाले आरोप की परम्परा निभा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। इस सबसे परे विधायक केदार शुक्ला ने इस पराजय के लिए सीधे-सीधे राकेश सिंह पर हल्ला बोल दिया है। प्रदेशाध्यक्ष को ही पराजय का मुख्य दोषी बता दिया है। जांघ उघाड़कर दिखाना पहले मूर्खता था और अब भाजपाई शब्दकोष में इसका अर्थ अनुशासनहीनता लिख दिया गया है। इसलिए दन्न से शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। जबकि कारण तो राकेश सिंह सहित राज्य इकाई के तमाम दिग्गजों से पूछा जाना चाहिए था कि आखिर प्रतिष्ठा की इस लड़ाई में वे हारे क्यों? ऐसा नहीं किया गया क्योंकि पराजय की वजह तो सबको पता है ही।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह मिले शिवराज से, सियासी अटकलों का दोर शुरू, बताया सौजन्य भेंट

लक्ष्मण सिंह से भेंट को शिवराज ने भी सौजन्य मुलाकात बताया। उन्होंने कहा कि हम संसद में साथ रहे हैं, विधानसभा में साथ हैं। कोई और बात नहीं है। दिग्विजय सिंह के भाई का शिवराज सिंह से मिलना इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि लक्ष्मण सिंह पहले भाजपा से सांसद रह चुके है। पिछले दिनों उन्होंने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर भी सवाल उठाए थे।  आगे पढ़ें

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ये कैसी ओछी राजनीति

मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार उन्माद में अंधी होती दिख रही है। वरना यह संभव ही नहीं था कि आम जनता के असीम दुख-दर्द की वजह बन चुके खराब रास्तों को लेकर इतनी खराब राजनीति की जाती। रायसेन में बीते दिनों बस पलटने से छह लोग मरे थे। पता चला कि पुल पर बने गड्ढे की वजह से ऐसा हुआ। एक अन्य घटना में कार की पीछे की सीट पर बैठी एक महिला सिर्फ इसलिए सिधार गयी कि सड़क पर बने भयावह गड्ढे में कार का पहियां चला जाने से उसका सिर वाहन की छत से टकरा गया था। होशंगाबाद में चार हॉकी खिलाड़ियों की कार भी इन्हीं गड्ढों के चलते अनियंत्रित होकर उनकी मौत का कारण बन गयी। यकीनन हादसे रोक पाना किसी के बस की बात नहीं है, लेकिन ऐसा न हो, इसके इंतजाम तो किये जा सकते हैं।  आगे पढ़ें

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