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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बर्खास्त बीएसएफ जवान की याचिका पर पीएम को भेजा नोटिस

बता दें कि चुनाव के समय तेज बहादुर यादव की उम्मीदवारी खारिज हो गई थी। निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर का नामांकन रद्द कर दिया था। नामांकन रद्द होने पर तेज बहादुर ने कहा था, 'मेरा नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया। इस मामले में मैंने सबूत दिए भी। इसके बावजूद मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया। हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।' हालांकि, बाद में उच्चतम न्यायालय ने तेज बहादुर की याचिका खारिज कर दी थी।  आगे पढ़ें

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कबीर भजन गायक टिपानिया सहित 4 सड़क दुर्घटना में घायल, एक की मौत

जानकारी अनुसार हादसा गुरुवार दोपहर करीब सवा तीन बजे हुआ। टिपानिया पांच लोगों के साथ कार से भोपाल जा रहे थे। वे खड़ीजोड़ पर एक वाहन को ओवरटेक करने लगे, तभी सामने गाय आ गई। ड्राइवर ने कार को तुरंत नीचे कच्ची रोड पर उतारा और फिर सड़क पर चढ़ाते हुए तेजी से आगे बढ़ाई। इससे कार असंतुलित होकर पलट गई। आष्टा में प्राथमिक उपचार के बाद सभी को देवास भेजा गया। टिपानिया के साथ योगेश पटेल उर्फ मामू निवासी बालगढ़, पूर्व पार्षद व कांग्रेस नेता प्रदीप चौधरी निवासी बालगढ़ी, जगदीश रंदनखेड़ी, चिड़ावद और चालक तुलसी उर्फ लखन निवासी बालगढ़ सवार थे।  आगे पढ़ें

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अनिल शास्त्री का बड़ा बयान, कहा- कांग्रेस पार्टी की पतवार को संभालने के लिए गांधी परिवार के सदस्य का होना जरूरी

अनिल शास्त्री ने कांग्रेस पार्टी की पतवार को संभालने के लिए गांधी परिवार के एक सदस्य का होना जरुरी बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसा ना होने की सूरत में पार्टी के पतन को नहीं रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अगर गांधी परिवार के सदस्य के हाथों में पार्टी की कमान नहीं रही तो कांग्रेस का हाल भी एनसीपी, टीएमसी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों जैसा हो जाएगा। शास्त्री ने कहा कि पार्टी में गांधी परिवार जितनी स्वीकार्यता किसी की भी नहीं है, ऐसे में उन्होंने प्रियंका गांधी को अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की वकालत भी की। उन्होंने आशंका जताई है कि ऐसा नहीं होता है तो पार्टी में ही एक वर्ग विरोध में खड़ा हो सकता है, जिससे पार्टी का विघटन होना निश्चित है।  आगे पढ़ें

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जय हो हृदय प्रदेश के मौजूदा हालात की

भोपाल में गुरूवार के दो अलग-अलग भोजन कांड में यह देखना जरूरी हो गया है कि कहां हवाबाण हरडे ने काम किया और कहां हाजमोला की जरूरत पड़ गयी। ये तीनों उत्पाद देसी हैं। जिनका देश की विशिष्ट शैली वाली राजनीति में खूब प्रयोग हुआ। जिस फितरत के साथ ये भोजन संपन्न हुए, उसके आधार पर यह तो तय है कि आखिर में कायम चूर्ण ने अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई ही होगी। महाराजा का भोजन प्रजा के घर हुआ होता तो बात अलग थी। मान लिया जाता कि शायद आसपास कोई चुनाव होगा। किंतु यहां मामला महाराजा और प्रदेश के राजा वाला था। दोनों ही इस समय जिस विशिष्ट श्रेणी की भूख के शिकार हैं, उसे खाद्य पदार्थ तो मिटा ही नहीं सकते हैं। इसलिए तय मान लिया जाए कि श्यामला हिल्स स्थित खास निवास के उस बंद कमरे में भोजन की हैसियत विधानसभा में पेश किये गये किसी अशासकीय संकल्प से अधिक नहीं रही होगी।  आगे पढ़ें

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परेशान ममता की विधायकों को सलाह, जनता से पिछली गलतियों के लिए मांगे माफी

बता दें कि लोकसभा चुनाव में मिले करारे झटके के बाद से ममता बनर्जी काफी सतर्क हो गई हैं और अभी से ही विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई हैं। उन्होंने इससे पहले गत 18 जून को तृणमूल पार्षदों की एक बैठक को संबोधित करते हुए उन्हें आदेश दिया था कि वे लाभार्थियों से लिया गया कट मनी वापस करें। उन्होंने तब कहा था, मैं अपनी पार्टी में चोरों को नहीं रखना चाहती। यदि मैं कार्रवाई करूंगी, वे किसी और पार्टी में शामिल हो जाएंगे। कुछ नेता गरीबों को आवास अनुदान मुहैया कराने के लिए 25 प्रतिशत कमीशन मांग रहे हैं। यह तुरंत रुकना चाहिए। अगर आपने लिया है तो पैसा तत्काल लौटा दीजिए।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस अध्यक्ष की एक हां के चक्कर में उलझे पड़े हैं मप्र के कई राजनीतिक मसले

सोमवार को कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के संग राहुल गांधी से मिलने गए कमलनाथ की मध्यप्रदेश से जुड़े मसलों पर शायद ही कोई चर्चा हुई हो। लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद से नाथ की यह तीसरी दिल्ली यात्रा है। पिछली दो यात्राओं में भी यह कयास लगाए जा रहे थे कि उनकी कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात होगी, लेकिन एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संग और दूसरी बार गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर लौट आए। तीसरी यात्रा में वे राहुल से मिले, लेकिन अलग एजेंडे के साथ। राहुल गांधी की हां-ना के चक्कर में सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों के सब्र का बांध टूट रहा है। बुरहानपुर से निर्वाचित निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा भैया पिछले छह माह से कमलनाथ सरकार का समर्थन और विरोध कर समय काट रहे हैं। जब भी वे सरकार के खिलाफ मुंह खोलते हैं, सरकार का कोई दूत उन तक पहुंचकर मंत्रिमंडल में उन्हें शीघ्र शामिल करने का आश्वासन दे आता है। अगले ही दिन शेरा भैया का बयान बदल जाता है।  आगे पढ़ें

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राहुल गांधी को मनाने शुरू हुआ जतन, पार्टी मुख्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ता

कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर राहुल गांधी से इस्तीफा वापस लेने की मांग पर अड़ गए हैं। उनका कहना है कि जब तक राहुल गांधी इस्तीफा वापस नहीं लेते हैं तब तक उन लोगों की हड़ताल जारी रहेगी। बता दें कि इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। पार्टी सिर्फ 52 सीटों में ही जीत हासिल कर चुकी है। इस हार की जिम्मेदारी राहुल गांधी द्वारा ली गई थी, इसके बाद उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इस्तीफा दे दिया था।  आगे पढ़ें

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पीसीसी चीफ के लिए सिंधिया का नाम आगे कर नाथ-दिग्गी समर्थकों ने चौंकाया

कमलनाथ गुट के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी गोविंद सिंह की मांग का समर्थन कर दिया है। दिग्विजय और कमलनाथ आंतरिक तौर पर सिंधिया के धुर विरोधी माने जाते हैं। लेकिन सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाए जाने के पीछे की क्या राजनीति है, यह तो वक्त ही बताएगा। पर इनके एक राय होने से सिंधिया के पीसीसी चीफ बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इसी बीच मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री दिल्ली पहुंच गए हैं और वे वहां 2 जुलाई तक रहेंगे। माना जा रहा है कि नाथ आज राहुल गांधी को अध्यक्ष पद से इस्तीफा सौंप सकते हैं। मुलाकात के दौरान प्रदेश के नए अध्यक्ष के नाम पर भी चर्चा हो सकती है।  आगे पढ़ें

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यूपी में बड़े बदलाव की तैयारी में प्रियंका गांधी, कांग्रेस को युवा शक्ति से करेंगी लैस

प्रियंका के चार सूत्री एजेंडा में जिले में नेतृत्व टीम में ओबीसी और एससी समुदाय के नेताओं की हिस्सेदारी शामिल है। पार्टी की नजर राज्य में किसान नेताओं, सामाजिक कार्यकतार्ओं और छात्र नेताओं पर भी है। उन्हें कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पार्टी में बड़े बदलाव की योजना में इंडियन यूथ कांग्रेस जैसे पार्टी के प्रमुख संगठनों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रियंका के समीक्षा बैठकें करने के दौरान कई नेताओं ने कहा था कि पहले कांग्रेस सरकारों में यूथ कांग्रेस का अधिक प्रतिनिधित्व होता था और किसी सार्वजनिक अभियान में उसे हमेशा शामिल किया जाता था।  आगे पढ़ें

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चुनाव मिली हार के बाद छलका मायावती का दर्द, कहा- गठबंधन कराना रही सबसे बड़ी भूल

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बसपा-सपा गठबंधन को मिली हार के बाद से ही दोनों दलों के बीच खींचतान नजर आने लगी थी। बड़ी हार के बाद दोनों ही पार्टियों ने विधानसभा उपचुनाव अलग लड़ने की घोषणा तक कर दी थी। अब एक बार फिर बसपा सुप्रीमों मायावती का दर्द गठबंधन को लेकर सामने आया है। मायवती ने रविवार को बसपा विधायकों, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक ली थी। इस बैठक में उन्होंने समाजवादी गठबंधन को लेकर लंबी चर्चा की और उसे लोकसभा चुनाव में मिली हार की वजह बताया।  आगे पढ़ें

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