तियानजिन। ट्रंप टैरिफ के बाद भारत-चीन के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका बड़ा उदाहरण रविवार को तब देखने को मिला, जब रविवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। दोनों राष्ट्राध्यक्षों की यह मुलाकात तियानजिन आयोजित हो रहे एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले हुई। मोदी और जिनपिंग गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे से मिले। इतना ही नहीं इस ऐतिहासिक मुलाकात ने दुनिया भर का ध्यान खींचा।
बता दें कि जून 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई है। इस मुलाकात ने न केवल सीमा विवाद पर समझौते की राह खोली, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग की नई उम्मीदें भी जगाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एससीओ शिखर सम्मेलन के मौके पर तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक बैठक की। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर सहमति जताई। पीएम मोदी ने इस मुलाकात से संबंधित तस्वीर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया।
चीनी राष्ट्रपति के साथ रही बैठक: मोदी
चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा कि एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान तियानजिन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सार्थक बैठक हुई। हमने कजान में पिछली बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की। हमने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर सहमति जताई और पारस्परिक सम्मान, हित और संवेदनशीलता के आधार पर सहयोग के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों देशों के बीच फिर शुरू होंगी सीधी उड़ानें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों ने समझौता किया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हो गई है और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो रही हैं। उन्होंने आगे कहा, भारत-चीन के सहयोग से 2.8 अरब लोगों को फायदा होगा और यह पूरी मानवता के कल्याण का रास्ता खोलेगा। आपसी विश्वास और सम्मान के आधार पर हम रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दोनों नेताओं के मुलाकात की अहमियत
यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस मुलाकात की अहमियत तब और बढ़ गई, जब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों को टैरिफ के मुद्दे पर धमकी दी थी। ऐसे में एससीओ समिट में भारत और चीन का एक साथ आना वैश्विक मंच पर एक सशक्त संदेश देता है। गर्मजोशी के साथ दोनों नेताओं ने हाथ मिलाए और भविष्य के लिए एक नई दिशा तय की।